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Faridabad में बाल सुधार गृह से 3 नाबालिग फरार, बाथरूम की खिड़की तोड़कर मेन गेट से निकले

फरीदाबाद के NIT-5 स्थित बाल सुधार गृह से तीन नाबालिग खिड़की तोड़कर फरार हो गए. जिसके बाद पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें CCTV फुटेज के आधार पर उनकी तलाश में जुटी हैं.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 04, 2026, 08:28 PM IST | Updated: Oct 04, 2026, 08:39 PM IST
Image Credit: AI GENERATED PHOTO
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Faridabad News: एनआईटी फरीदाबाद के 5 नंबर इलाके में स्थित महिला एवं बाल विकास विभाग के बाल सुधार गृह से तीन नाबालिग बाल बंदियों के फरार होने का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि तीनों बाल बंदी बीती देर रात बाथरूम की खिड़की तोड़कर बाहर निकले और मेन गेट से फरार हो गए. घटना की जानकारी मिलने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया.

बाल सुधार गृह से तीन नाबालिग बाल बंदी फरार
सूत्रों के मुताबिक, फरार हुए तीनों नाबालिगों को अलग-अलग मामलों में बाल सुधार के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग के अधीन रखा गया था. इनमें से दो बाल बंदी वर्ष 2024 से यहां रह रहे थे, जबकि तीसरा वर्ष 2025 से बाल सुधार गृह में था. सूत्रों का कहना है कि तीनों पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं और इसी के चलते उन्हें यहां रखा गया था.

तीनों हरियाणा के अलग-अलग जिले के रहने वाले
बताया जा रहा है कि फरार बाल बंदियों में एक गुरुग्राम, दूसरा मेवात और तीसरा हिसार जिले का रहने वाला है. घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में उनकी तलाश शुरू कर दी है. वहीं, क्राइम ब्रांच की टीमें भी फरार बाल बंदियों की तलाश में जुट गई हैं.

सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस, जांच जारी 
थाना एनआईटी इंचार्ज महावीर ने बताया कि बाल सुधार गृह की तरफ से उनको शिकायत मिली है. पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के साथ-साथ संभावित ठिकानों पर भी दबिश दे रही है. तीनों नाबालिग किस तरह बाल सुधार गृह से बाहर निकले और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई, इसकी भी जांच की जा रही है. फिलहाल पुलिस का पूरा ध्यान फरार बाल बंदियों को जल्द से जल्द तलाशने पर है.

क्या है बाल सुधार गृह ?
बाल सुधार गृह (Juvenile Home या Observation Home) एक ऐसा आवासीय केंद्र है, जहां कानून का उल्लंघन करने वाले या विधि से संघर्ष करने वाले बच्चों (आमतौर पर 18 वर्ष से कम उम्र के किशोरों) को रखा जाता है.

यहां बच्चों को सजा देने के बजाय उनके स्वभाव में सुधार लाने और उन्हें सही दिशा दिखाने का प्रयास किया जाता है. 
साथ ही बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने के लिए उनकी नियमित काउंसलिंग (परामर्श) की जाती है और उन्हें पढ़ाई या कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है. 
इन बच्चों के मामले किशोर न्याय बोर्ड (Juvenile Justice Board) के तहत देखे जाते हैं, जहां उनकी उम्र और अपराध की गंभीरता के आधार पर निर्णय होता है.

(फरीदाबाद से जय प्रकाश की रिपोर्ट)
 

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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