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एक्ट्रेस सारा अली खान अपनी फिल्म 'केदारनाथ' की रिलीज के बाद से ही इस पवित्र धाम की लगातार यात्रा करती रही हैं और अक्सर मंदिर में दर्शन करते हुए नजर आती हैं, लेकिन उनका यह आस्था भरा अंदाज कई बार विवादों में भी घिर जाता है. उत्तर प्रदेश के बरेलवी उलेमा मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सारा अली खान के केदारनाथ में पूजा-अर्चना करने पर एक फतवा जारी किया है, जिसमें उन्होंने इसे शरीयत के खिलाफ और 'हराम' करार दिया है. बयान में मौलाना ने एक्ट्रेस से तौबा करने और अल्लाह से माफी मांगने की बात कही है, जबकि दूसरी ओर सारा की इन यात्राओं पर पहले भी सवाल उठाए जाते रहे हैं. इसके बावजूद सारा अली खान अपनी कला, विश्वास और आस्था के रास्ते पर बिना किसी डर के आगे बढ़ती रही हैं.
लेकिन सच तो यह है कि बॉलीवुड की नींव ही 'गंगा-जमुनी तहजीब' यानी मिली-जुली संस्कृति पर टिकी है. यहां गणेश चतुर्थी के पंडाल में बप्पा की आरती उतनी ही धूमधाम से होती है जितनी ईद की सेवइयां बांटी जाती हैं. हिंदी सिनेमा के सुनहरे इतिहास से लेकर आज के दौर तक, ऐसे अनगिनत उदाहरण मौजूद हैं जहां कलाकारों ने मजहब की लकीरों को पार कर मोहब्बत और भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की है जो आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ा सबक है. ऐसे ही 10 खूबसूरत और इंस्पीरेशनल उदाहरण हैं, जो यह दिखलाते हैं कि बॉलीवुड में दिल से बड़ा कोई धर्म नहीं होता.
सितंबर - नवंबर 2018
केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)
सारा अली खान ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म 'केदारनाथ' की शूटिंग के दौरान और फिर उसकी रिलीज से पहले केदारनाथ मंदिर में दर्शन किए थे. इस दौरान उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए बाबा भोलेनाथ का आशीर्वाद लिया और अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की.
सितंबर 2021
कामाख्या देवी मंदिर (गुवाहाटी, असम)
सारा ने असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ कामाख्या देवी मंदिर के दर्शन किए थे. उन्होंने वहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और पारंपरिक पोशाक में अपनी तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर की थीं.
अक्टूबर 2021
केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)
इस यात्रा के दौरान सारा अली खान अपनी करीबी दोस्त और बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर के साथ केदारनाथ धाम पहुंची थीं. दोनों ने मंदिर में माथा टेका और वहां की वादियों में समय बिताया.
मई 2022
काशी विश्वनाथ मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
अपनी फिल्म की शूटिंग के दौरान सारा वाराणसी पहुंची थीं, जहां उन्होंने प्राचीन काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन किए. इसके साथ ही उन्होंने शाम को होने वाली प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती में भी हिस्सा लिया था.
जनवरी 2023
महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन, मध्य प्रदेश)
सारा अपनी मां अमृता सिंह के साथ उज्जैन के प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर गई थीं. उन्होंने तड़के होने वाली बाबा महाकाल की भस्म आरती में भाग लिया और पारंपरिक सूती साड़ी पहनकर पूजा में शामिल हुईं.
मई-जून 2023
महाकालेश्वर मंदिर (उज्जैन) और अजमेर शरीफ (राजस्थान)
अपनी फिल्म 'जरा हटके जरा बचके' के प्रमोशन के दौरान सारा ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन किए और इसके बाद राजस्थान स्थित ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर शरीफ दरगाह पर जाकर चादर चढ़ाई.
जुलाई 2023
पवित्र अमरनाथ गुफा और वैष्णो देवी (जम्मू-कश्मीर)
सारा ने जम्मू-कश्मीर में स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा के दर्शन कर बाबा बर्फानी का आशीर्वाद लिया. इसके साथ ही उन्होंने कटरा में माता वैष्णो देवी के दरबार में हाजिरी लगाई और पैदल चढ़ाई पूरी की.
अक्टूबर 2024
केदारनाथ धाम (उत्तराखंड)
सारा ने एक बार फिर केदारनाथ धाम पहुंचकर आम श्रद्धालुओं की तरह कतार में खड़े होकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन किए. दर्शन के बाद हाथ जोड़कर बाहर खड़ी सारा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं, जिसके बाद उलेमाओं की ओर से बयानबाजी और विवाद सामने आया था.
बॉलीवुड के 'किंग खान' यानी शाहरुख खान और गौरी खान की जोड़ी भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में सेक्युलर परिवार का सबसे बड़ा चेहरा है. शाहरुख खुद मुस्लिम हैं और गौरी हिंदू हैं, लेकिन उनके घर 'मन्नत' में ईद की दावत जितनी धूमधाम से होती है, उतनी ही भव्यता से दिवाली की पूजा और गणेश चतुर्थी मनाई जाती है. उनके बच्चे आर्यन, सुहाना और अबराम दोनों धर्मों के संस्कारों के बीच बड़े हुए हैं. शाहरुख कई बार इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उनके घर में बच्चों को हर धर्म का सम्मान करना सिखाया जाता है.
सलमान खान का परिवार इस बात की सबसे बेहतरीन मिसाल है कि प्यार में कोई मजहब आड़े नहीं आता. उनके पिता सलीम खान ने सुशीला चरक (जो बाद में सलमा खान कहलाईं) से शादी की थी. सलमान के घर में हर साल गणेशोत्सव बेहद भव्य तरीके से मनाया जाता है, जहां पूरा खान परिवार बप्पा की सेवा में लीन रहता है. इसके साथ ही ईद और क्रिसमस का जश्न भी उतने ही उत्साह से मनाया जाता है. परिवार का यह मेल-मिलाप भारत की असली खूबसूरती को पर्दे पर और असल जिंदगी में उतारता है .
नवाब परिवार से ताल्लुक रखने वाले सैफ अली खान और उनकी पत्नी करीना कपूर खान अपने घर में हर त्योहार को बराबर महत्व देते हैं. सैफ खुद इस्लाम को मानते हैं और करीना हिंदू धर्म से हैं, लेकिन उनके दोनों बेटे तैमूर और जेह के लिए घर में क्रिसमस ट्री भी सजता है, ईद की सेवइयां भी बनती हैं और दिवाली के दीये भी जगमगाते हैं. सैफ का परिवार हमेशा से कला और संस्कृति की उस विरासत को आगे बढ़ाता आया है जहां मजहब कभी आपसी प्यार के बीच नहीं आया.
अगर पुराने दौर की बात करें, तो महान गायक मोहम्मद रफी साहब का नाम सबसे ऊपर आता है. रफी साहब ने अपने करियर में जितने रोमांटिक और देशभक्ति गाने गाए, उतने ही अमर भजन भी गाए. 'मन तड़पत हर दर्शन को आज' या 'मधुबन में राधिका नाचे रे' जैसे अनगिनत भजन आज भी लोगों की जुबान पर हैं. उन्हें गाते वक्त रफी साहब कभी यह नहीं देखते थे कि वे भगवान के लिए गा रहे हैं या किसी और के लिए, उनके लिए संगीत ही सबसे बड़ा धर्म था.
50 और 60 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस नरगिस और दिग्गज अभिनेता सुनील दत्त की प्रेम कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है. नरगिस मुस्लिम परिवार से थीं और सुनील दत्त हिंदू परिवार से थे. 'मदर इंडिया' के सेट पर आग लगने के दौरान सुनील दत्त ने नरगिस की जान बचाई थी, जिसके बाद दोनों में प्यार हुआ और उन्होंने शादी कर ली. शादी के बाद भी नरगिस ने अपने धर्म का सम्मान किया और दत्त परिवार ने उन्हें पूरी आजादी दी. उनके बेटे संजय दत्त आज भी दोनों धर्मों की मान्यताओं का पूरा सम्मान करते हैं.
आमिर खान और उनकी पूर्व पत्नी किरण राव ने भले ही आपसी सहमति से तलाक ले लिया हो, लेकिन उनके रिश्ते में हमेशा से एक आइडली खुलापन और धार्मिक सहिष्णुता रही है. आमिर खुद मुस्लिम हैं और किरण हिंदू परिवार से हैं. उन्होंने अपने बेटे आजाद राव खान को दोनों संस्कृतियों के बीच बड़ा किया है. आमिर के घर में आज भी आमिर खान प्रोडक्शंस के ऑफिस में हर नए प्रोजेक्ट की शुरुआत नारियल फोड़कर और पूजा-पाठ के साथ की जाती है .
'भारत कुमार' के नाम से मशहूर अभिनेता मनोज कुमार ने अपनी फिल्मों के जरिए भारतीय संस्कृति, मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारे की एकता को पर्दे पर अमर कर दिया. उनकी फिल्मों के गाने जैसे 'मेरे देश की धरती' या धार्मिक गीत इस बात को साबित करते हैं कि बॉलीवुड में काम करने वाले कलाकारों के लिए कला किसी भी एक मजहब की बपौती नहीं रही है. उन्होंने हमेशा अपनी फिल्मों के जरिए देश के हर नागरिक को जोड़ने का काम किया .
दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर और मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी का घर विचारों की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक विविधता का केंद्र है. वे दोनों नास्तिक या प्रोग्रेसिव सोच के माने जाते हैं, लेकिन उनके घर में देश के हर त्योहार को पूरे सम्मान के साथ मनाया जाता है. उनकी यह जोड़ी इस बात का संदेश देती है कि इंसानियत और कला किसी एक मजहब के दायरे में बंधकर नहीं रह सकती.
ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान, जिन्होंने इस्लाम अपनाने से पहले हिंदू धर्म छोड़ा था और उनका नाम एएस दिलीप कुमार था. संगीत की दुनिया में उनका एक ऐसा नाम हैं जो हर धर्म के लोगों को अपनी धुनों पर झूमने पर मजबूर कर देते हैं. उन्होंने अपनी सुरीली आवाज और संगीत से न सिर्फ इस्लामिक और सूफी गानों को नई ऊंचाइयां दीं, बल्कि कई ऐसे देशभक्ति और आध्यात्मिक गीत रचे जो हर भारतीय के दिल को छू जाते हैं. उनके लिए संगीत ही उनका सबसे बड़ा मंदिर और मस्जिद है.