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एक टाइम पर बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने वालीं साधिका रंधावा का जन्म 1 जनवरी 1977 को हुआ था. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी और साल 1995 में फिल्म ‘सनम हरजाई’ के साथ बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा के अलावा तेलुगु, पंजाबी, भोजपुरी, गुजराती और मराठी फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा. ‘सलमा पे दिल आ गया’, ‘अब के बरस’, ‘शिकार’, ‘बुलेट: एक धमाका’ और ‘रिवाज’ जैसी कई शानदार फिल्मों से उन्होंने अपनी एक खास पहचान बनाई.
हालांकि, कई बेहतरीन फिल्मों में काम करने के बाद वे धीरे-धीरे बड़े पर्दे से दूर होती चली गईं. हाल ही में साधिका रंधावा ने जी न्यूज को दिए एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ को लेकर कई बड़े और चौंकाने वाले खुलासे किए. उन्होंने अपने फिल्मी सफर, करियर में आए उतार-चढ़ाव, इंडस्ट्री के कड़वे अनुभवों और चकाचौंध से अचानक दूरी बनाने की असली वजहों पर खुलकर बात की. इसके साथ ही उन्होंने अपनी शादी की प्लानिंग और पर्दे पर कमबैक को लेकर भी साफ बातें कीं.
सवाल: आपने 90 के दशक में बॉलीवुड में एंट्री की थी और आपकी पहली फिल्म ‘सनम हरजाई’ थी. उस दौर में बतौर न्यूकमर पहली बार कैमरे का सामना करने का एक्सपीरियंस कैसा था और आपको पहला ब्रेक कैसे मिला था?
साधिका रंधावा: मैं बेसिकली जयपुर की रहने वाली हूं. साल 1993 में मुझे ‘जयपुर क्वीन’ का खिताब मिला था. सावन कुमार टाक जी, जो मेरे पहले प्रोड्यूसर-डायरेक्टर थे, वो भी राजस्थान से ही ताल्लुक रखते थे. उन्होंने अखबारों में मेरी तस्वीरें और आर्टिकल्स देखे और फिर सीधे मेरे मम्मी-पापा से कॉन्टैक्ट किया. बस इसी तरह मुझे मेरी पहली फिल्म ऑफर हुई और उन्होंने मुझे साइन कर लिया.
सवाल: जब आपने पहली बार कैमरे का सामना किया तो कैसा लगा? क्या एक्टिंग करते वक्त आपको कोई डर या झिझक थी?
साधिका रंधावा: सच कहूं तो मुंबई आते ही मैंने रोशन तनेजा जी की एक्टिंग क्लास जॉइन कर ली थी. मैंने करीब 2-3 महीने तक वहां बाकायदा ट्रेनिंग ली, उसके बाद ही कैमरे के सामने गई. थोड़ी बहुत नर्वसनेस होना तो नॉर्मल था, लेकिन जैसे ही कैमरा ऑन हुआ, सब कुछ बहुत आसान लगने लगा. मुझे लगता है कि एक्ट्रेस बनने का सपना बचपन से ही मेरे अंदर बसा हुआ था.
सवाल: आप एक आर्मी बैकग्राउंड से आती हैं और आपके पापा चाहते थे कि आप इंजीनियर बनें, लेकिन आपने ग्लैमर वर्ल्ड को चुना, ‘जयपुर क्वीन’ बनीं और नाम कमाया. ये पूरा सफर आपके लिए कितना मुश्किल रहा?
साधिका रंधावा: सफर सच में काफी मुश्किलों भरा था, क्योंकि मेरा पूरा परिवार नॉन-फिल्मी बैकग्राउंड से था. दूर-दूर तक किसी का फिल्मों से कोई लेना-देना नहीं था. हां, मेरी बहन जस्सी रंधावा पहले से मॉडलिंग की दुनिया में एक्टिव थीं. पहली फिल्म तो मुझे काफी आसानी से मिल गई थी और दूसरी फिल्म ‘सलमा पे दिल आ गया’ भी मुझे सावन जी के साथ ही मिली.
‘सनम हरजाई’ बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई, लेकिन ‘सलमा पे दिल आ गया’ ने मुझे रातों-रात स्टार बना दिया और मुझे असली पहचान मिली, लेकिन इसके बाद का सफर बिल्कुल भी आसान नहीं रहा. मुझे इस काम और सिनेमा से बहुत प्यार है, लेकिन यहां अंदरूनी पॉलिटिक्स बहुत ज्यादा है. कई ऐसी चीजें भी हैं जिन्हें मैं खुलकर बोलना भी नहीं चाहती.
सवाल: आपने इंडस्ट्री के बड़े-बड़े कलाकारों के साथ स्क्रीन शेयर की और फिर रीजनल सिनेमा में भी हाथ आजमाया. जब आप उस पुराने दौर को याद करती हैं तो कैसा महसूस होता है?
साधिका रंधावा: मुझे बहुत खुशी होती है और मैं ऊपर वाले का दिल से शुक्रिया अदा करती हूं, जो ख्वाब लाखों लोग देखते हैं, मुझे उन्हें असल जिंदगी में जीने का मौका मिला. फिल्मों से दूरी बनाना भी पूरी तरह मेरा अपना फैसला था. ऑफर्स तो मुझे बाद में भी लगातार आ रहे थे, लेकिन जब तक मैंने काम किया, हमेशा मेन लीड रोल्स ही निभाए. मैं खुद को बहुत लकी मानती हूं कि मुझे ये सब देखने को मिला.
सवाल: आप फिल्मों में काफी समय तक एक्टिव रहीं और आपको ‘मोस्ट गॉर्जियस एक्ट्रेस’ का अवॉर्ड भी मिला. फिर धीरे-धीरे आप स्क्रीन से गायब क्यों होती चली गईं? क्या ये आपका खुद का फैसला था या माहौल से परेशान होकर ये फैसला लिया?
साधिका रंधावा: ये 100 परसेंट मेरा अपना ही फैसला था. इसके पीछे दो-तीन बड़ी वजहें रहीं. पहली और सबसे दर्दनाक वजह मेरी मां का अचानक दुनिया छोड़कर चले जाना था. वो बहुत कम उम्र में हमें अकेला छोड़कर चली गईं. उनके जाने के बाद मुझे अंदर तक अहसास हुआ कि जब अपने ही साथ न हों, तो बेशुमार दौलत और शोहरत किसी काम की नहीं रह जाती. इस हादसे के बाद मेरा काम से मन बिल्कुल उचट गया. हालांकि, जो कमिटमेंट्स मैंने पहले से कर रखे थे, उन्हें मैंने ईमानदारी से पूरा किया. दूसरी वजह थी इंडस्ट्री में बढ़ती गंदी पॉलिटिक्स.
मैंने जी टीवी का एक हिट शो ‘शोभा सोमनाथ की’ किया था, जिसमें मैं मेन नेगेटिव लीड रोल में थी, लेकिन सेट पर इतनी ज्यादा पॉलिटिक्स और खींचतान थी कि मैंने उसी वक्त तय कर लिया कि अब जिंदगी में कभी टीवी शोज नहीं करूंगी. इसके अलावा मैंने साउथ और भोजपुरी में मनोज तिवारी और रवि किशन के साथ भी कई फिल्में कीं, लेकिन एक वक्त के बाद मुझे लगा कि जब मैं बॉलीवुड में अच्छा-खासा मेनस्ट्रीम काम कर चुकी हूं, तो इस तरह बेवजह खींचते रहने का कोई मतलब नहीं है. मैं पार्टियों में जाने वाली, काम पाने के लिए लोगों को मस्का लगाने वाली या फोन करके काम मांगने वाली इंसान बिल्कुल नहीं हूं. इसलिए मैंने खुद ही इज्जत के साथ दूरी बना ली.
सवाल: आप और आपकी बहन जस्सी रंधावा, दोनों ही इस ग्लैमर वर्ल्ड का बड़ा चेहरा रही हैं. जब आप दोनों घर पर मिलती हैं, तो क्या पुराने दिनों को याद करती हैं? कोई ऐसा किस्सा जो आज भी याद आता हो?
साधिका रंधावा: हां, हम जब भी बैठते हैं तो अक्सर पुरानी यादें ताजा करते हैं. बहन के साथ काम का कोई ऐसा किस्सा इसलिए नहीं है, क्योंकि वो मॉडलिंग में ज्यादा बिजी थीं और जब उन्होंने 2-3 फिल्में कीं, तब मैं साउथ के प्रोजेक्ट्स की शूटिंग में उलझी हुई थी, लेकिन मेरे अपने शुरुआती दिनों का एक किस्सा मुझे हमेशा याद रहता है. मेरी पहली फिल्म के एक गाने की शूटिंग चल रही थी. मनमीत जी सिनेमैटोग्राफर थे और सरोज खान जी या रेखा चिन्नी प्रकाश जी कोरियोग्राफी कर रही थीं.
उस दिन सावन जी ने पूरी यूनिट के सामने एक बात कही थी, जो मेरे लिए सबसे बड़ा कॉम्पलिमेंट बन गई. उन्होंने कहा था, ‘साधिका बिल्कुल श्रीदेवी जैसी है. कैमरे के पीछे जब ये बैठती है, तो लगता है जैसे इसे ठीक से बोलना भी नहीं आता, लेकिन जैसे ही कैमरा रोल होता है, ये एकदम बदल जाती है और इसका एक अलग ही रूप सामने आ जाता है’. इतने बड़े डायरेक्टर के मुंह से अपने पहले ही शॉट पर ऐसी तारीफ सुनना मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती.
सवाल: आजकल ओटीटी का जमाना है और आपके फैंस आपको फिर से स्क्रीन पर देखना चाहते हैं. क्या वे जल्द ही आपके कमबैक की उम्मीद कर सकते हैं? क्या कोई नया प्रोजेक्ट आ रहा है?
साधिका रंधावा: बिल्कुल, फैंस पूरी उम्मीद रख सकते हैं और मैं खुद भी वापसी के लिए पूरी तरह तैयार हूं. बीच में मेरे पास कुछ ऑफर्स आए भी थे, जिनमें एक मराठी फिल्म और कुछ ओटीटी सीरीज शामिल थीं. उस वक्त मेरा मूड नहीं था, लेकिन अब मैं ओटीटी प्लेटफॉर्म पर काम करना चाहती हूं. मेरी बस एक ही शर्त है कि रोल दमदार हो, कहानी के सेंटर में हो और उसमें थोड़ा एक्शन करने का मौका मिले. जैसे ही कोई ऐसी सॉलिड स्क्रिप्ट मेरे पास आएगी, मैं तुरंत सेट पर लौट आऊंगी.
सवाल: क्या आपके पूरे करियर में ऐसी कोई बेहतरीन फिल्म रही जो बनते-बनते अटक गई या रिलीज नहीं हो पाई, जिसका आपको आज भी पछतावा होता है?
साधिका रंधावा: हां, मेरी दो-तीन बहुत शानदार फिल्में रिलीज नहीं हो सकीं. उनमें से एक फिल्म थी ‘रॉकी एंड रॉनी’, जिसे हमने पूरी तरह बैंकॉक में शूट किया था. उस फिल्म में मेरे साथ दिव्या दत्ता, गुलशन ग्रोवर और चंकी पांडे जैसे मंझे हुए कलाकार थे और राजीव बवेजा डायरेक्टर थे. वो फिल्म अपने वक्त से काफी आगे की थी और पूरी बनकर तैयार खड़ी थी, लेकिन बदकिस्मती से रिलीज नहीं हो पाई. उस फिल्म के डिब्बे में बंद रहने का दर्द मुझे आज भी होता है.
बाकी सभी एक्टर्स के साथ काम करने का मेरा एक्सपीरियंस बहुत कमाल का रहा. खासकर डैनी डेन्जोंगपा जी ने मुझे सबसे ज्यादा इम्प्रेस किया. हमने फिल्म ‘शिकार’ में साथ काम किया था, जहां मैं एक-एक करके सारे विलेन्स से बदला लेती हूं और डैनी जी भी उनमें शामिल थे. एक इंसान और को-स्टार के तौर पर डैनी जी लाजवाब हैं. मसूरी में शूटिंग के दौरान पैकअप होते ही हम दोनों जिम चले जाते थे, वर्कआउट करते थे और साथ डिनर करते थे. उनसे मुझे सेट पर काम को लेकर प्रोफेशनलिज्म सीखने को मिला.
सवाल: आपके करियर की ऐसी कौन सी फिल्में हैं, जो आपके दिल के सबसे ज्यादा करीब हैं?
साधिका रंधावा: सबसे पहली तो ‘सलमा पे दिल आ गया’ ही है, जिसके गाने और मेरा रोल आज भी मुझे बहुत प्यारे लगते हैं. दूसरी फिल्म आशुतोष राणा के साथ ‘2 अक्टूबर’ है, जिसका गाना ‘चांद सितारे’ लोग आज भी सुनते हैं. इसके अलावा एक एक्शन थ्रिलर फिल्म थी ‘बुलेट: एक धमाका’, जिसकी पूरी शूटिंग हमने बुल्गारिया की खूबसूरत लोकेशंस पर की थी. उस फिल्म में मेरा कैरेक्टर बहुत पावरफुल था और वो काम मुझे पर्सनली बहुत पसंद आया था.
सवाल: आप अक्सर साईं बाबा के मंदिर में दर्शन करते दिखती हैं. ग्लैमरस लाइफस्टाइल के बीच आध्यात्म की तरफ आपका झुकाव कैसे हुआ?
साधिका रंधावा: आध्यात्म मेरे खून और संस्कारों में रचा-बसा है. मेरी नानी, दादी, मां और अब मेरी बहन हमारे घर का पूरा माहौल ही हमेशा से आध्यात्मिक रहा है. साईं बाबा मेरे सद्गुरु हैं और मेरी जिंदगी में आध्यात्म की सबसे बड़ी जगह है. एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब मैं दुनिया के सारे काम छोड़कर अपनी बहन की तरह पूरी तरह से खुद को ऊपर वाले की भक्ति में समर्पित कर दूंगी.
सवाल: सोशल मीडिया पर लोग आपकी फिटनेस की खूब तारीफ करते हैं. 49 की उम्र में भी आप बेहद फिट दिखती हैं, लेकिन फैंस अक्सर पूछते हैं कि आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की, आप शादी कर रही हैं?
साधिका रंधावा: मैं इस बात को भी ऊपर वाले की मर्जी और डेस्टिनी से जोड़कर देखती हूं. मुझे लगता है कि भगवान ने हर इंसान के लिए एक अलग रास्ता तय कर रखा होता है और शायद मेरे रास्ते में मुझे पहले अकेले ही चलना था. ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मैं कभी रिलेशनशिप में नहीं रही, लेकिन बात कभी शादी तक नहीं पहुंच सकी. शायद उस वक्त किस्मत को यही मंजूर था.
लेकिन हां, अब मेरी लाइफ में एक बहुत ही खास इंसान आ चुका है, जो बिल्कुल मेरी तरह सोचता है और मुझे अच्छी तरह समझता है. मेरे बार-बार गोवा जाने की सबसे बड़ी वजह भी यही है, क्योंकि वो वहीं रहते हैं. अगर सब कुछ सही रहा और ऊपर वाले ने चाहा, तो हम बहुत जल्द शादी के बंधन में बंधने वाले हैं. जैसे ही तारीख पक्की होगी, मैं खुद सबसे पहले यह खुशखबरी अपने चाहने वालों को दूंगी.