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अपनी दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और बेबाक व्यक्तित्व के लिए मशहूर दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने एक बार इंटरव्यू में अपने अतीत के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया था. अपने सफर को याद करते हुए नाना ने माना कि अगर उन्होंने एक्टिंग में करियर नहीं बनाया होता, तो उनके हिंसक स्वभाव की वजह से वे शायद अंडरवर्ल्ड की दुनिया में चले जाते.
सिद्धार्थ कन्नन के साथ एक पुराने इंटरव्यू में नाना ने बताया था, 'लोग मुझसे डरते थे. मैं बहुत हिंसक था. मैं ज्यादा बात नहीं करता था. मेरे काम ही मेरी बात कहते थे.' उन्होंने आगे कहा कि भले ही अब वे शांत रहते हैं, लेकिन उकसाने पर वे आज भी शारीरिक तौर से ही रिएक्ट करते हैं. उन्होंने अपनी उथल-पुथल भरी शुरुआती जिंदगी के बारे में खुलकर बात करते हुए कहा, 'अगर मैं एक्टर नहीं बना होता, तो अंडरवर्ल्ड में होता. मैं इस बात को लेकर बहुत सीरियस हूं.'
खुद को ही नाना ने बताया था 'हिंसक'
अपने पुराने बर्ताव को याद करते हुए नाना पाटेकर ने माना था कि लोग उनसे डरते थे, क्योंकि वे बहुत हिंसक थे और ज्यादा बात नहीं करते थे. नाना पाटेकर ने कहा, 'आज भी अगर कोई मुझे उकसाता है, तो मैं मारपीट पर उतर आता हूं.' संजय लीला भंसाली के साथ अपने चर्चित झगड़े के बारे में बात करते हुए नाना ने 'खामोशी' के सेट पर हुई अनबन को याद किया. उन्होंने माना, 'जिस तरह से मैं उनपर (संजय लीला भंसाली पर) चिल्लाया था, उन्हें बुरा लगा होगा. उसके बाद से हमने साथ काम नहीं किया है.' हालांकि, नाना ने इस बात पर जोर दिया कि उस झगड़े का उनकी जिंदगी या करियर पर कोई असर नहीं पड़ा.
मतभेदों के बावजूद उन्होंने संजय लीला भंसाली के साथ काम करने को लेकर पुरानी यादें ताजा कीं और कहा, 'मुझे उनके साथ काम करना याद आता है, लेकिन समस्या मेरे रूखे व्यवहार की है.' नाना पाटेकर ने खुलकर माना था कि उनकी कड़वी बातों से फिल्ममेकर नाराज हो सकते थे, लेकिन साथ ही कहा, 'मैं इसे अपनी गलती नहीं मानता. अगर हम एक-दूसरे को इतनी अच्छी तरह जानते हैं, तो छोटी-मोटी गलतफहमियों को समझाने की क्या जरूरत है?' नाना ने सुलह की गुंजाइश बनाए रखी और कहा, 'सही समय आने पर हम इसे सुलझा लेंगे.'
आज अंडरवर्ल्ड में होता: नाना पाटेकर
बता दें कि नाना पाटेकर ने हिंदी सिनेमा के साथ-साथ मराठी इंडस्ट्री में अपनी छाप छोड़ी है. उन्होंने पर्दे पर हीरो से लेकर सपोर्टिंग एक्टर और विलेन तक के किरदार को बखूबी निभाया है. नाना की निजी जिंदगी संघर्षों से भरी ररही है. एक्टर ने अपने बचपन में बेहद गरीबी देखी. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था, 'मैं गरीब था. बचपन में फुटपाथ पर सोया हूं. महीने की सैलरी 35 रुपये और एक वक्त का खाना थी. परिवार में आर्थिक तंगी के चलते मैंने 13 साल की उम्र में नौकरी शुरू कर दी. मैं हमेशा कहता हूं कि उस समय मेरा कोई रिश्तेदार नहीं था. लेकिन जब थोड़ा नाम और पैसा आया, तो बहुत सारे रिश्तेदार हो गए.'
दरअसल, एक्टर के पिता का मुंबई में कपड़े का अच्छा-खासा कारोबार था. लेकिन फिर किसी के धोखे में उनसे सबकुछ छीन गया. तब परिवार का खर्च उठाने के लिए उन्होंने पेंटर की नौकरी की. उन्होंने बताया था कि वह बचपन में आर्मी में जाना चाहते थे, लेकिन घरवालों ने उन्हें जाने नहीं दिया. नाना वरिष्ठ रंगकर्मी और डायरेक्टर विजया मेहता को अपना गुरू मानते थे. एक्टर कहते थे कि उनके साथ-साथ अरविंद देशपांडे, सुलभा देशपांडे जैसे लोगों का भी उनकी पहचान को गढ़ने में बड़ा योगदान रहा. नाना हमेशा कहते कि अगर ये लोग मेरी जिंदगी में नहीं आए होते, तो शायद मैं अंडरवर्ल्ड में होता.'
यादों में रह गए नाना: करियर अपर एक नजर
बता दें कि बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर का गुरुवार को निधन हो गया है. नाना पाटेकर का असली नाम विश्वनाथ पाटेकर था. फिल्मों में आने से पहले उन्होंने थिएटर के जरिए एक्टिंग की दुनिया में कदम रखा. उनका शुरुआती दौर आसान नहीं था. एक साधारण परिवार से आने वाले नाना ने कम उम्र में ही काम करना शुरू कर दिया था. उन्हें आर्थिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा. एक समय ऐसा था, जब उनकी कमाई इतनी कम थी कि गुजारा करना भी चुनौती बन जाता था.
नाना पाटेकर और नीलकांति पाटेकर ने 1978 में शादी की थी. कहा जाता है कि दोनों की शादी भी बेहद सादगी से हुई थी. नाना पाटेकर ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन फिल्म 'वेलकम' का उदय शेट्टी यानी उदय भाई का किरदार आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है. उनकी खास डायलॉग डिलीवरी, गुस्सा और कॉमिक टाइमिंग ने इस किरदार को यादगार बना दिया. हालांकि, नाना की पहचान सिर्फ एक किरदार तक सीमित नहीं रही. 'परिंदा', 'क्रांतिवीर', 'अग्नि साक्षी', 'तिरंगा', 'खामोशी: द म्यूजिकल' और 'अब तक छप्पन' जैसी फिल्मों में उन्होंने अलग-अलग रंग के किरदार निभाए.
आज नाना पाटेकर हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके निभाए किरदार, उनकी आवाज और उनके संवाद हमेशा दर्शकों की यादों में जिंदा रहेंगे. कभी एक शो के लिए 50 रुपए पाने वाला यह कलाकार अपनी मेहनत और हुनर के दम पर सिनेमा में ऐसी पहचान छोड़ गया, जिसे मिटा पाना आसान नहीं है.
(आईएएनएस इनपुट)