App

एमएस सुब्बुलक्ष्मी: वो महान गायिका, जिन्हें मिली थी 'भारत रत्न' की उपाधि; UN में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय संगीतकार

एमएस सुब्बुलक्ष्मी भारतीय कर्नाटक संगीत की महान गायिका और अभिनेत्री थीं. उनकी जिंदगी और उपलब्धियों पर बनने वाली फिल्म में रश्मिका मंदाना उनका किरदार निभाएंगी. फिल्म की शुरुआत कमल हासन ने पहला क्लैप देकर की.

एमएस सुब्बुलक्ष्मी: वो महान गायिका, जिन्हें मिली थी 'भारत रत्न' की उपाधि; UN में परफॉर्म करने वाली पहली भारतीय संगीतकार
Image Credit: Photo: AI

एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी भारतीय शास्त्रीय संगीत की दुनिया का एक बेहद सम्मानित नाम हैं. उनके निधन के कई दशक बाद भी उनकी आवाज और संगीत की विरासत लोगों के बीच कायम है. अब उनकी जिंदगी और शानदार करियर को बड़े पर्दे पर दिखाने की तैयारी है. इस फिल्म में अभिनेत्री रश्मिका मंदाना एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का किरदार निभाती नजर आएंगी.

 फिल्म का आधिकारिक तौर पर एक ऐसे खास दिन शुभारंभ किया गया, जिसका संबंध महान गायिका की विरासत से है. यह फिल्म दर्शकों को सुब्बुलक्ष्मी के जीवन, संघर्ष और संगीत के सफर से रूबरू कराएगी.

रश्मिका मंदाना निभाएंगी एमएस सुब्बुलक्ष्मी का किरदार

रश्मिका मंदाना आने वाली बायोपिक में एमएस सुब्बुलक्ष्मी की भूमिका निभाएंगी. इस बायोपिक को मशहूर गायिका की 110वीं जयंती पर लॉन्च किया गया. मेकर्स ने लॉन्च इवेंट में फिल्म का टाइटल और पहला लुक भी जारी किया. फिल्म का नाम 'एम.एस. ए लेगेसी ऑन स्क्रीन' रखा गया है. फिल्म की रिलीज डेट और अन्य कलाकारों के बारे में अभी जानकारी नहीं दी गई है, लेकिन यह प्रोजेक्ट भारत की सबसे प्रसिद्ध कर्नाटक गायिका के जीवन और सफर पर आधारित होगा.

इस प्रोजेक्ट को अनुभवी अभिनेता कमल हासन द्वारा पहला क्लैप देकर औपचारिक रूप से लॉन्च किया गया. इस कार्यक्रम में रश्मिका, कमल हासन और अनुभवी निर्माता अल्लू अरविंद मौजूद थे. लॉन्च के मौके पर कमल हासन की उपस्थिति ने इस अवसर की महत्ता को और बढ़ा दिया, क्योंकि फिल्म निर्माताओं ने आधिकारिक तौर पर इस बायोपिक की शुरुआत की घोषणा की. यह फिल्म अब सिनेमा के माध्यम से सुब्बुलक्ष्मी की कहानी को दर्शकों की एक नई पीढ़ी तक पहुंचाएगी.

कौन है एमएस सुब्बुलक्ष्मी?

मदुरै षण्मुखवदिवु सुब्बुलक्ष्मी का जन्म 1916 में मदुरै में हुआ था और वह संगीत से गहराई से जुड़े परिवार में पली-बढ़ीं. उनकी मां षण्मुखवदिवु अम्मल, वीणा वादक थीं. जबकि उनकी दादी अक्कम्मल वायलिन वादक थीं. संगीत के इस माहौल ने सुब्बुलक्ष्मी को कम उम्र में ही कर्नाटक संगीत से परिचित करा दिया.

उन्होंने सेम्मंगुडी श्रीनिवास अय्यर जैसे मशहूर संगीतकारों से ट्रेनिंग ली और पंडित नारायणराव व्यास से हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत भी सीखा. अपनी दमदार आवाज़ और अनोखे अंदाज़ की वजह से वे आगे चलकर भारत की सबसे सम्मानित कर्नाटक संगीत गायिकाओं में से एक बनीं. सुब्बुलक्ष्मी सिर्फ़ भारत में ही अपनी कला का प्रदर्शन करने तक सीमित नहीं रहीं. समय के साथ, वह देश की एक अहम सांस्कृतिक प्रतिनिधि बनीं और कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रस्तुति दी.

कार्नेगी हॉल से यूनाइटेड नेशंस तक: सुब्बुलक्ष्मी का सफर

सुब्बुलक्ष्मी का करियर उन्हें दुनिया के कुछ सबसे प्रतिष्ठित मंचों तक ले गया. उन्होंने 1963 में एडिनबर्ग इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ़ म्यूज़िक एंड ड्रामा में और बाद में न्यूयॉर्क के कार्नेगी हॉल में प्रस्तुति दी. उन्होंने 1987 में मॉस्को में फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया में भी प्रस्तुति दी. उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का एक बड़ा पड़ाव 1966 में आया, जब वह यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में प्रस्तुति देने वाली पहली भारतीय संगीतकार बनीं.

उनकी प्रस्तुतियों ने दुनिया भर के दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत से परिचित कराया. उनकी उपलब्धियों को भारत और एशिया के कुछ सर्वोच्च सम्मानों से भी नवाज़ा गया. उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया और वह प्रतिष्ठित 'रेमन मैग्सेसे पुरस्कार' पाने वाली पहली भारतीय संगीतकार बनीं.

एक्ट्रेस भी थीं एमएस सुब्बुलक्ष्मी

हालांकि उन्हें मुख्य रूप से कर्नाटक संगीत में उनके योगदान के लिए याद किया जाता है, लेकिन सुब्बुलक्ष्मी का सिनेमा में भी करियर रहा है. उन्होंने 1938 में 'सेवासदनम' से एक्टिंग की शुरुआत की. बाद में वह 'शकुंतलाई' (1940), 'सावित्री' (1941) और 'मीरा' (1945) में नज़र आईं. उन्होंने 'मीरा' के हिंदी वर्शन 'मीराबाई' में भी काम किया, जो 1947 में रिलीज़ हुई थी. उनकी फिल्म ‘मीरा’ को खास पहचान मिली. सिनेमा से उनका जुड़ाव आने वाली बायोपिक को खास बनाता है, क्योंकि यह फिल्म एक ऐसी कलाकार की ज़िंदगी को दिखाएगी जो खुद भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर में संगीत और एक्टिंग के बीच सक्रिय थीं. उनकी उपलब्धियों की सूची बेहद लंबी है.

वह संगीत अकादमी, मद्रास का प्रतिष्ठित ‘संगीत कलानिधि’ सम्मान पाने वाली पहली महिला थीं. उन्हें रेमन मैग्सेसे अवॉर्ड, पद्म भूषण और पद्म विभूषण जैसे सम्मान भी मिले. 1998 में भारत सरकार ने उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ से सम्मानित किया. 1997 में अपने पति कल्कि सदाशिवम की मौत के बाद, सुब्बुलक्ष्मी ने पब्लिक परफॉर्मेंस देना बंद कर दिया. वह अपने कॉन्सर्ट और रॉयल्टी से होने वाली कमाई को चैरिटी के कामों में दान करने के लिए भी जानी जाती थीं. एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी का 2004 में 88 साल की उम्र में निधन हो गया.

 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Swati Singh

Swati Singh

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
Read More