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Explainer: 'रामायण' टैक्स-फ्री हुई तो किसकी होगी चांदी? टिकट सस्ते होंगे या मेकर्स की बढ़ेगी कमाई, समझिए पूरा गणित

'रामायण' को टैक्स-फ्री करने की चर्चा के बीच सवाल है कि इससे दर्शकों को टिकट पर कितनी राहत मिलेगी और फिल्म की कमाई पर क्या असर पड़ेगा? जानिए, GST और SGST में अंतर, टिकट की कीमतों का गणित, मेकर्स और सिनेमाघरों को होने वाला फायदा और टैक्स-फ्री स्टेटस से बॉक्स ऑफिस कलेक्शन बढ़ने की संभावनाएं.

Written By Swati Singh
Published: Oct 28, 2026, 04:49 PM IST | Updated: Oct 28, 2026, 05:11 PM IST
Image Credit: 'रामायण' टैक्स-फ्री हुई तो किसे होगा फायदा
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बीते कुछ सालों में राज्य सरकारों ने कई भारतीय फिल्मों को 'टैक्स-फ्री' किया है. दिवाली पर रिलीज होने वाली रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी की फिल्म 'रामायण' इसका सबसे ताजा  उदाहरण है. हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार ने इस पौराणिक महाकाव्य पर आधारित फिल्म को टैक्स-फ्री घोषित किया है.

रिलीज से दो हफ्ते पहले नमित मल्होत्रा ​​की 'रामायण', जिसे कथित तौर पर 4,000 करोड़ रुपये के बजट में बनाया गया है. इसे पश्चिम बंगाल में टैक्स-फ्री घोषित कर दिया गया है. रणबीर कपूर, यश और साई पल्लवी अभिनीत यह फिल्म 5 नवंबर को दुनिया भर के सिनेमाघरों में कई भाषाओं में रिलीज होगी. भारत में इसके स्पेशल प्रीव्यू 4 नवंबर से ही शुरू हो जाएंगे.

पश्चिम बंगाल में 'रामायण' हुई टैक्स-फ्री

यह घोषणा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने दशहरा के मौके पर की. सीएम ने कहा, ''रामायण' फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया गया है. 'द केरल स्टोरी', 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द बंगाल फाइल्स' इन सभी को टैक्स-फ्री किया गया है और यही बात 'रामायण' पर भी लागू होगी. आने वाले दिनों में हम श्री कृष्ण और अर्जुन और  महाभारत पर आधारित फिल्में भी देखेंगे.

यह घोषणा तब हुई जब अभिनेता रणबीर कपूर और यश, कोलकाता के साल्ट लेक स्थित सेंट्रल पार्क में दशहरा समारोह में शामिल हुए और स्थानीय दर्शकों के साथ विजयादशमी मनाई. उनके साथ निर्माता नमित मल्होत्रा, अभिनेता रवि दुबे और फिल्म निर्माता नितेश तिवारी भी मौजूद थे.

लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि किसी फिल्म के लिए 'टैक्स-फ्री' होने का असल में क्या मतलब है? क्या इससे बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन बढ़ता है, दर्शकों के लिए टिकट सस्ते हो जाते हैं, या फिर इससे निर्माताओं (प्रोड्यूसर्स) को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है? और असल में यह छूट किस तरह काम करती है?

'टैक्स-फ्री' क्या होता है?

भारत में किसी फिल्म को 'टैक्स-फ्री' दर्जा तब मिलता है, जब कोई राज्य सरकार उस फिल्म के सिनेमा टिकटों पर लगने वाले मनोरंजन कर (एंटरटेनमेंट टैक्स) को माफ कर देती है. ऐसा आमतौर पर उन फिल्मों के लिए किया जाता है, जो सामाजिक रूप से प्रासंगिक हों, ऐतिहासिक हों, देशभक्ति से जुड़ी हों, या फिर शिक्षा या संस्कृति से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर आधारित हों.

हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि यह स्टेट-लेवल का एक नीतिगत फैसला है, न कि CBFC (सेंसर बोर्ड) द्वारा दिया गया कोई विशेष दर्जा. हो सकता है कि किसी फिल्म को एक राज्य में टैक्स से छूट मिल जाए, लेकिन दूसरे राज्य में उस पर लागू कर (टैक्स) देना पड़े.

इसपर कर एवं कानूनी सलाहकार और अधिवक्ता मनीष यादव कहते हैं, 'टैक्स फ्री फिल्म का मतलब होता है, उसमें कोई भी मतलब नॉर्मल लैंग्वेज में लेमन लैंग्वेज में बोले कि किसी प्रकार का भी कोई वो नहीं लगेगा चार्जेस नहीं होंगे. वो फ्री हो जाएगा और गवर्नमेंट की ओर से टैक्स फ्री हो जाएगा. अगर हम मार्केटिंग कमीशन की बात करते हैं, जब ऐड होता है ऐड पर 5% का जीएसटी चार्ज करते हैं और वैसे 18% का तो मेन तो मोटिव यही है टैक्स का. टैक्स फ्री फिल्म का बेनिफिट प्रमोशन और बहुत सारी चीजों में एक्टिविटी में रहता है. जब हम ऐड चलाते हैं, तो उस ऐड में हमें 5% का एक वो टैक्स देना पड़ता है. वो ऐड एजेंसी जो उसकी ऐड बनाएगी. और जब वो उसे प्रमोट कर उसे बेचती है, जब सेल होती है आगे मूवी जब सेल होती है तो उसके ऊपर 18% का जीएसटी लगता है.'

क्या टैक्स-फ्री होने से दर्शकों की संख्या बढ़ती है?

संभवत, हां. अगर इस छूट का फायदा दर्शकों तक पहुंचाया जाए, तो फिल्म उन तक आसानी से पहुंच सकती है, क्योंकि उन्हें टिकट के लिए मूल कीमत से कम पैसे चुकाने पड़ते हैं. मेकर्स को अपने आप टैक्स रिफंड नहीं मिल जाता. लेकिन इससे दर्शकों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे फिल्म की कमाई में इजाफा हो सकता है.

टिकट की कीमतें कितनी कम हो सकती हैं?

इसपर मनीष कहते हैं, 'टैक्स में छूट मिलती है, तो टिकट की कीमत में राहत मिल सकती है. ऐसे में दर्शकों के लिए टिकट करीब 7 से 8 फीसदी तक सस्ता हो सकता है, जिससे फिल्म देखने का खर्च घटेगा.'

मान लीजिए, किसी फिल्म के एक टिकट की कीमत (बेस प्राइस) ₹200 है और इस पर 18% GST लगता है, जिसमें 9% सेंट्रल GST और 9% स्टेट GST शामिल है, तो टिकट की कुल कीमत ₹236 होगी. अगर महाराष्ट्र में इस फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया जाता है, तो राज्य सरकार अपना 9% स्टेट GST हटा लेगी, जिससे टिकट की कीमत में ₹18 की कमी आ जाएगी. ऐसे में दर्शकों को यह टिकट ₹218 में मिलेगा.

टैक्स-फ्री स्टेटस बॉक्स-ऑफ़िस पर सफलता की गारंटी नहीं देता

हालांकि, टैक्स-फ्री स्टेटस मिलने से टिकट की कीमतें कम हो जाती हैं और ज्यादा दर्शक आकर्षित हो सकते हैं. लेकिन इससे ज्यादा मुनाफे या बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन की गारंटी नहीं मिलती.

GST और किसी स्टेट की ओर से फिल्म को टैक्स फ्री करने में क्या फर्क होता है?

GST और किसी राज्य सरकार की ओर से फिल्म को टैक्स-फ्री करने में सबसे बड़ा फर्क यह है कि GST पूरे देश में लागू अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था का हिस्सा है. जबकि राज्य सरकार की छूट राज्य के अधिकार क्षेत्र और लागू नियमों पर निर्भर करती है. फिल्म को टैक्स-फ्री घोषित करने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उस पर लगने वाला पूरा GST खत्म हो गया हो.

टैक्स फ्री से कितना सस्ता होता है टिकट; जानें

-जब कोई राज्य सरकार फिल्म टैक्स फ्री करती है तो राज्य जीएसटी माफ होता है.

-100 रुपए तक के टिकट पर राज्य जीएसटी 6% और उससे ऊपर 9% के हिसाब से लगता है.

-कौन-सी फिल्म टैक्स फ्री होगी, कौन-सी नहीं, इसे लेकर कोई गाइडलाइन तय नहीं है.

-देश में सबसे पहले 1982 में गांधी फिल्म टैक्स फ्री हुई थी. इसे इंदिरा गांधी सरकार ने छूट दी थी.

-4 साल के अंदर 30 फिल्में टैक्स फ्री करने का रिकॉर्ड अखिलेश सरकार के नाम

पहले किन फिल्मों को मिला टैक्स-फ्री स्टेटस?

बॉलीवुड फिल्में जिन्हें कर छूट मिली

विवेक रंजन अग्निहोत्री की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' को हरियाणा के बाद गुजरात और मध्य प्रदेश की सरकारों ने भी टैक्स-फ्री घोषित कर दिया था. ऐसे में ऐसी ही पांच अन्य महत्वपूर्ण फिल्मों पर नजर डालते हैं, जिन्हें टैक्स-फ्री घोषित किए जाने के बाद बॉक्स ऑफिस पर अच्छी गति मिली.

'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' (2017): GST लागू होने के बाद उत्तर प्रदेश में टैक्स-फ्री होने वाली यह पहली फिल्म थी. 'टॉयलेट: एक प्रेम कथा' ने महिलाओं की निजता और शौच जाने से जुड़ी सामाजिक समस्या को उठाया था. फिल्म के प्रमोशन के दौरान अक्षय कुमार ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया था. फिल्म रिलीज होने के बाद निर्देशक श्री नारायण सिंह और उनकी टीम अपने अगले प्रोजेक्ट्स में लग गई.

एयरलिफ्ट: अक्षय कुमार की एक और फिल्म 'एयरलिफ्ट' को भी टैक्स-फ्री होने से काफी फायदा मिला. यह अभिनेता के करियर की अब तक की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक है.

'छपाक' (2019): यह दिल दहला देने वाली फिल्म और भी बेहतर हो सकती थी, अगर इसमें दीपिका पादुकोण की जगह असल पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल ने काम किया होता. दीपिका ने फिल्म में पीड़िता के असली दर्द को केवल अभिनय के जरिए दिखाने की कोशिश की थी. असल में, पीड़िता ने खुद को इस प्रोजेक्ट से अलग कर लिया था, जिसके कारण फिल्म में दीपिका के किरदार का नाम बदलकर 'मालती' रखना पड़ा. मध्य प्रदेश और राजस्थान में इस फिल्म को शायद केवल मानवीय आधार पर टैक्स-फ्री किया गया था.

'तानाजी' (2020): इस वीर मराठा योद्धा की कहानी ने, खासकर महाराष्ट्र में, राष्ट्रवाद की गहरी भावना जगाई. लोगों की इन भावनाओं को समझते हुए महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सरकारों ने फिल्म को टैक्स-फ्री कर दिया. हालांकि, फिल्म को इस टैक्स छूट का फायदा मिल पाता, उससे पहले ही कोविड महामारी आ गई.

'बाजीराव मस्तानी' (2015): उत्तर प्रदेश सरकार ने संजय लीला भंसाली की इस भव्य फिल्म को रिलीज के पूरे एक महीने बाद टैक्स-फ्री किया था. तब तक, शुरुआती चार हफ्तों में ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी-खासी कमाई कर ली थी. कहानी का सार यह है कि अगर किसी फिल्म को टैक्स में छूट देनी है, तो यह छूट फिल्म की रिलीज के समय दी जानी चाहिए.

'दंगल' और 'नीरजा' (2016): उसी साल आई इन दो बड़ी फिल्मों को कई राज्यों में टैक्स से छूट दी गई थी, और वे सच में इसके हकदार भी थे. 'दंगल' और 'नीरजा' दोनों ने अपने-अपने तरीके से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया.

बता दें कि साल 2012-2016 के बीच यूपी की अखिलेश सरकार ने 30 फिल्में टैक्स-फ्री कीं, जो रिकॉर्ड है. इसमें पीके, तेवर, हवाईजादा, डेढ़ इश्किया जैसी फिल्में भी हैं. राज्य सरकारों को फिल्म टैक्स फ्री करने का हक है.

टैक्स फ्री हुई फ्लॉप बॉलीवुड फिल्में

 

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About the Author

स्वाति सिंह एक वरिष्ठ डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह Zee News Hindi की डिजिटल टीम के एंटरटेनमेंट (मनोरंजन) सेक्शन में काम कर रही हैं. स्वाति की एक्सपर्टीज बॉलीवुड न्यूज़, सिनेमा, एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के ट्रेंड्स और सेलेब्स की इन-डेप्थ रिपोर्टिंग में है.अपने करियर के दौरान स्वाति ने आयुष्मान खुराना, नीना गुप्ता, गजराज राव और ध्वनि भानुशाली जैसी कई जानी-मानी बॉलीवुड और म्यूजिक इंडस्ट्री की हस्तियों के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं. Zee News से पहले उन्होंने अमर उजाला, लाइव हिंदुस्तान और लोकमत जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं, जहां काम के लिए उन्हें सम्मानित भी किया गया है.माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय (MCU) से मास कम्युनिकेशन और सुरेश ज्ञान विहार यूनिवर्सिटी से बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) की डिग्री हासिल करने वाली स्वाति, मनोरंजन जगत की खबरों को पाठकों तक रोचक और सटीक ढंग से पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.आप स्वाति सिंह से swati.kumari@india.com पर सीधे ईमेल के जरिए संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप उनसे एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम और लिंक्डइन पर भी कनेक्ट कर सकते हैं.
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