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बातें कम, ड्रामेबाजी ज्यादा: विवादों के दलदल में फंसकर दम तोड़ रहे चैट शोज, क्या TRP की भूख ने छीन ली असली रूह?

टीवी और ओटीटी पर चमकने वाले चैट शोज अब आर्ट और सिनेमा की गहराई से भटककर केवल चटपटी गॉसिप और टीआरपी का अखाड़ा बन चुके हैं. आज सुर्खियां बटोरने के लिए केवल विवाद और पर्सनल लाइफ पर ही बातें की जाती हैं, जिससे सोशल मीडिया पर वो वायरल हो सकें.

बातें कम, ड्रामेबाजी ज्यादा: विवादों के दलदल में फंसकर दम तोड़ रहे चैट शोज, क्या TRP की भूख ने छीन ली असली रूह?
Image Credit: चैट शोज

एक समय ऐसा भी था जब टीवी और ओटीटी पर चैट शो सिर्फ एक इंटरव्यू नहीं, बल्कि सिनेमा की हस्तियों के एक्सपीरियंस, उनकी कला और फिल्मों के लिए उनके जुनून को समझने का खूबसूरत माध्यम हुआ करता था. हॉलीवुड के एलेन शो से लेकर इंडिया में 'कॉफी विद करण' और 'जीना इसी का नाम है' जैसे शो में कलाकार अपनी जिंदगी और काम पर खुलकर दिल की बात करते थे. लेकिन ऐसा लगता है कि मानों आज ये पूरा सीन बदल चुका है. अब इन शोज का मकसद सिनेमा की बारीकियों और पर्दे की पीछे की कहानी पर चर्चा करना नहीं, बल्कि टीआरपी बटोरने के लिए सेलेब्स की पर्सनल डायरियां खोलना बन गया है.

'कॉफी विद करण' का जिक्र आते ही वो मशहूर काउच दिमाग में आता है, जहां कभी इंडियन सिनेमा के बड़े-बड़े विजनरी आकर अपनी फिल्मों की मेकिंग और क्रिएटिविटी पर बात करते थे. लेकिन पिछले कुछ सीजन से इस काउच पर बैठने वाले लोगों की बातें और कॉफी का स्वाद पूरी तरह बदल चुका है. अब यहां दिल की बात कम और फिल्मों के टिकट्स की प्री-बुकिंग, बॉक्स ऑफिस कलेक्शन के आंकड़े और सेलेब्स के आपसी विवादों पर ज्यादा चर्चा होती है.

एक्सपीरियंस नहीं, शेयर होती हैं गॉस्पिस

करण जौहर के इस पॉपुलर शो का सेंटर अब सिनेमा न होकर ये बन गया है कि कौन किसे डेट कर रहा है या किसके ब्रेकअप की अफवाहों में कितनी सच्चाई है. पहले जहां किसी डायरेक्टर या एक्टर से उसकी आने वाली फिल्म, उसके किरदार की तैयारी और इंडस्ट्री के बदलते मिजाज पर सवाल पूछे जाते थे, वहीं अब सिर्फ डेटिंग लाइफ और गॉसिप के आसपास की बातें रह गई हैं. किसी कलाकार ने अपने प्रोजेक्ट में क्या नया एक्सपेरिमेंट किया, इस पर बात करने के बजाए शो के होस्ट और गेस्ट दूसरे सेलेब्स पर तंज कसते नजर आते हैं.

sara ali khan

जब सारा अली खान, जान्हवी कपूर और अनन्या पांडे जैसी यंग स्टार्स इस काउच का हिस्सा बनते हैं. तो चर्चा उनके काम के बजाए उनके एक्स-बॉयफ्रेंड्स और रिलेशनशिप स्टेटस पर आकर सिमट जाती है, जिससे पुराने फैंस तो अब ऊबने लगे हैं. तो वहीं यंग जनरेशन इन गॉस्पिस और कॉन्ट्रोवर्शी के ऊपर रील्स काटने में बिजी हैं.

पुराने सवाल और आज के विवाद

हम कुछ साल पहले के शोज की तुलना आज से करें, तो जमीन-आसमान का फर्क दिखता है. सिमी गरेवाल के शो 'रेंदेबू विद सिमी गरेवाल' में जब अमिताभ बच्चन, रेखा या शाहरुख खान आते थे, तो उनकी बातचीत में एक ठहराव, गरिमा और विचारों की गहराई होती थी. यहां तक कि 'कॉफी विद करण' के शुरुआती सीजन में भी जब रानी मुखर्जी, प्रियंका, आमिर और काजोल जैसे स्टार्स आते थे, तो स्क्रिप्ट और एक्टिंग गंभीर चर्चा होती थी. लेकिन आज वही सवाल घटकर 'रैपिड फायर' राउंड की बेतुकी कंट्रोवर्सीज और कौन ज्यादा हॉट है जैसे बचकाने लेवल तक सीमित हो गए हैं.

koffee with karan

पीआर स्टंट और नेगेटिव पीआर का नया अड्डा

चैट शो अब सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं रहे, बल्कि ये सोचे-समझे पीआर स्टंट का बन चुके हैं. शो में दिए गए बयानों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वो सोशल मीडिया पर तुरंत वायरल हो जाएं. अक्सर किसी नई फिल्म की रिलीज से ठीक पहले विवादित बयान दिए जाते हैं, ताकि पब्लिसिटी मिल सके. कभी-कभी ये मंच नेगेटिव पीआर का शिकार भी बनता है, जहां बातचीत के किसी एक कटे-छंटे हिस्से को इंटरनेट पर उछालकर किसी आर्टिस्ट की इमेज को फायदा या नुकसान पहुंचाने का खेल खेला जाता है.

Rendezvous with Simi Garewal

चैट शोज का बदलता मिजाज

ये बदलाव सिर्फ 'कॉफी विद करण' तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के दूसरे पॉपुलर चैट शोज में भी साफ झलकने लगा है. 'द कपिल शर्मा शो' या नए दौर के पॉडकास्ट्स को ही ले लीजिए. जहां कभी कॉमेडी और फिल्मों के प्रमोशन के साथ कलाकारों के सफर पर अच्छी बातचीत होती थी, अब वहां भी डबल-मीनिंग जोक्स, पर्सनल लाइफ की खींचतान और जबरन के विवादों पर जोर दिया जाने लगा है. पॉडकास्ट्स में भी अब जरूरी बातों के बजाए, ऐसे क्लिप्स काटने पर ध्यान रहता है जो रील वर्ल्ड में ट्रेंड कर सकें.

TOO MUCH CHAT SHOW

क्या खो गया है असली बातचीत का स्वाद?

आज के चैट शोज में मसाला और चटखारे तो भरपूर हैं, लेकिन वो असली बातचीत की खुशबू गायब हो चुकी है जो लोगों को गहराई से जोड़ती थी. जब ऑडियंस किसी पसंदीदा कलाकार को स्क्रीन पर देखते हैं, तो वो उसकी सोच और उसके काम को जानना चाहते हैं, न कि महज किसी बेबुनियाद गॉसिप का हिस्सा बनना. अगर चैट शोज को अपनी असली पहचान बचाए रखनी है, तो उन्हें टीआरपी की इस अंधी दौड़ से बाहर निकलकर वापस उसी सिनेमाई स्वाद और गंभीर बातचीत की तरफ लौटना होगा, जिसकी वजह से ये कभी ऑडियंस के दिल के करीब हुआ करते थे.

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About the Author

Jyoti Rajput

Jyoti Rajput

ज्योति सिंह राजपूत जी न्यूज में सब एडिटर हैं और पिछले 1 साल से ज्यादा से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. दैनिक जागरण प्रिंट और सहारा न्यूज नेटवर्क में ट्रेनिंग लेने के बाद अब Zee News में काम कर रही हैं. कुछ समय तक लाइफस्टाइल की खबरों में काम करने के बाद अब एंटरटेनमेंट में काम कर रही हैं. वहीं हॉलीवुड की खबरों और फिल्मों पर पैनी नजर रखती हैं. उन्होंने पंडित माखनलाल चतुर्वेदी नेशनल यूनिवर्सिटी (MCU) से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री हासिल की है. आप Jyoti.Rajput@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं.
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