बचपन में शुरू हुआ सफर, 5 दशकों तक कायम रहा जलवा; कमल हासन की ये फिल्में आज भी हैं मिसाल
बॉलीवुड और साउथ एक्टर कमल हासन के 7 नवंबर को अपना जन्मदिन सेलिब्रेट करेंगे. ऐसे खास मौके पर आज हम आपको उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों और उनके द्वारा निभाए गए किरदारों पर नजर डालते हैं, जिन्हें दर्शकों द्वारा काफी पसंद किया जाता हैं.
बॉलीवुड और साउथ फिल्मों के दिग्गज एक्टर कमल हासन काफी लंबे वक्त से फिल्मी दुनिया में एक्टिव हैं. उन्होंने 200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है, जिनमें उनकी एक्टिंग को भी काफी सराहा गया है. कमल हासन अगर चाहते तो सिर्फ एक फिल्म निर्माता के तौर पर भी अपना एक शानदार करियर बना सकते थे. उनके निर्देशन में बनी फिल्में ज्ञान की गहराई और नए प्रयोगों से भरी हैं. इन्हें किसी एक खास शैली (Genre) में नहीं बांधा जा सकता और न ही इनमें व्यावसायिक समझौतों की कोई जगह है. एक अभिनेता के तौर पर कमल हासन को बड़े पर्दे पर देखना एक शानदार अनुभव होता है. 1960 में 'कलथुर कन्नम्मा' में एक बाल कलाकार के रूप में अपनी शुरुआत से लेकर 2015 की 'थूंगा वनम' तक, 'उलगनायगन' (विश्व-स्तरीय नायक) ने अपने 57 साल के करियर में कई ऐसे किरदार निभाए हैं, जिन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता.
सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि अपने निर्देशन से भी उन्होंने सिनेमा प्रेमियों को काफी प्रभावित किया है. 'हे राम', 'विरुमांडी' या 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने हमें विश्व-स्तरीय सिनेमा का अनुभव कराया है. इस अभिनेता के बेहतरीन कामों में से किसी एक को चुनना मुश्किल है. उनकी कुछ बेहतरीन फिल्मों, जैसे 'अवल ओरु थोडार कथाई' और 'वरुमईयिन निरम सिवप्पु' का निर्देशन के. बालचंदर ने किया था. सी. रुद्रैया द्वारा निर्देशित फिल्म 'मारो चरित्र' ने कमल हासन को एक ऐसे रास्ते पर ला खड़ा किया, जिस पर उनके समकालीन कलाकारों में से कोई नहीं चला था. यहां 1970 के दशक से लेकर अब तक, हर दशक से इस अभिनेता की मेरी कुछ पसंदीदा फिल्में दी गई हैं.
70 के दशक के कमल हासन
1970 के दशक में कमल हासन की बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन के. बालचंदर ने किया था. इनमें से कई फिल्में एक महिला और जीवन के प्रति उसके नजरिए पर केंद्रित थीं. मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक 1974 की फिल्म 'अवल ओरु थोडार कथाई' है, जिसमें एक ऐसी महिला को दिखाया गया है, जो अपनी इच्छाओं का त्याग करके अपने परिवार को सहारा देने का फैसला करती है. इस फिल्म में कमल हासन मुख्य स्टार तो नहीं थे, लेकिन उनका किरदार सबसे बेहतरीन किरदारों में से एक था.
1977 की फिल्म 'अवरगल' भी एक ऐसी ही फिल्म थी, जो रिश्तों को लेकर एक महिला के नजरिए पर आधारित थी. इसमें सुजाता, रजनीकांत और कमल हासन ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं. सी. रुद्रैया द्वारा निर्देशित फिल्म 'अवल अप्पादिथान' मंजू (श्रीविद्या) की कहानी है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे प्रेम संबंधों की वजह से उसे जीवन में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. जीवन के प्रति उसका नजरिया निराशावादी हो जाता है. आज यह फिल्म तमिल सिनेमा की बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है, हालांकि बॉक्स ऑफिस पर यह सफल नहीं रही थी.
80 के दशक के कमल हासन
कई लोग सोच सकते हैं कि 'मूंद्रम पिराई' (हिंदी में 'सदमा') का नाम इसमें क्यों नहीं है. हालांकि 'सदमा' को अपने भावुक क्लाइमेक्स की वजह से काफी लोकप्रियता मिली, लेकिन मुझे 'पुन्नगाई मन्नन' कहीं ज्यादा पसंद आई. 1986 की इस फिल्म में कमल हासन ने दोहरी भूमिकाएं निभाई थीं- सेतु और चैपलिन चेल्लप्पा. यह फिल्म एक ऐसे जोड़े (सेतु और रंजनी) की कहानी है, जो अपने अधूरे प्यार के कारण आत्महत्या करने का फैसला करता है. हालांकि, सेतु बच जाता है और फिल्म उसके प्यार के बाद के जीवन पर आधारित है.
मणिरत्नम के निर्देशन में बनी 1987 की फिल्म 'नायकन' एक गैंगस्टर ड्रामा है. माना जाता है कि यह फिल्म बॉम्बे अंडरवर्ल्ड डॉन वरदराजन मुदलियार के जीवन पर आधारित थी. यह तमिल सिनेमा की बेहतरीन गैंगस्टर ड्रामा फिल्मों में से एक है. 1988 में कमल हासन ने 'सत्य' फिल्म में काम किया, जो हिंदी फिल्म 'अर्जुन' की रीमेक थी. इसमें उन्होंने एक ऐसे युवा का किरदार निभाया, जो दुनिया से निराश हो चुका है. वह और उसके दोस्तों का समूह खुद ही न्याय करना शुरू कर देते हैं और समाज में 'विजिलेंटे' (खुद कानून हाथ में लेने वाले) बन जाते हैं.
90 के दशक के कमल हासन
'थेवर मगन' जाति-आधारित दंगों पर बनी बेहतरीन फिल्मों में से एक है. भरथन द्वारा निर्देशित 1992 की इस फिल्म में शिवाजी गणेशन, गौतमी और रेवती भी मुख्य भूमिकाओं में थे. राष्ट्रीय पुरस्कार जीतने वाली यह फिल्म एक पारिवारिक विवाद, जाति-आधारित दंगों और ग्रामीण तमिलनाडु में लोगों के जीवन जीने के तरीके को बहुत खूबसूरती से दिखाती है. इसके बाद 1994 में 'नम्मावर' आई, जिसमें कमल हासन ने एक ऐसे अनोखे कॉलेज प्रोफेसर का किरदार निभाया, जो छात्रों को सिर्फ सिलेबस ही नहीं, बल्कि जीवन की महत्वपूर्ण बातें भी सिखाना चाहते थे. पढ़ाने के उनके अलग अंदाज की वजह से छात्रों के एक समूह के साथ उनका विवाद हो जाता है, लेकिन आखिरकार वे उन छात्रों का दिल जीतने में कामयाब हो जाते हैं.
कमल हासन ने 'सती लीलावती' और 'काथला काथला' के जरिए कॉमेडी में भी हाथ आजमाया. 'सती लीलावती' दो शादीशुदा जोड़ों की कहानी है, जिसमें दिखाया गया है कि कैसे एक जोड़ा बेवफाई जैसी स्थिति से निपटता है. वहीं, 'काथला काथला' दो दोस्तों और उनकी अपनी-अपनी गर्लफ्रेंड के साथ उनके रिश्तों पर आधारित है. इसमें दिखाया गया है कि कैसे ये दोनों दोस्त अपनी गर्लफ्रेंड के परिवारों को मनाने की कोशिश करते हैं, जो काफी मजेदार और हंसाने वाला है. 1995 में रिलीज हुई 'कुरुथिपुनल' को उस दशक की बेहतरीन एक्शन-थ्रिलर फिल्मों में से एक माना जाता है. पी.सी. श्रीराम द्वारा निर्देशित इस फिल्म में कमल हासन ने एक इंटेलिजेंस ऑफिसर की भूमिका निभाई है.
2000 के दशक में कमल हासन
इस दशक में कमल हासन ने 'पम्मल के. संबंधम' और 'पंचतंत्रम' जैसी कई फिल्मों में भी काम किया. ये फिल्में बहुत अच्छी थीं, लेकिन जिन फिल्मों ने मेरा दिल जीता, वे थीं 'हे राम', 'अन्बे शिवम' और 'विरुमांडी'. 'हे राम' बंटवारे के समय पर आधारित है और महात्मा गांधी की हत्या की घटना से प्रेरित है. यह सच में विश्व-स्तरीय सिनेमा का बेहतरीन उदाहरण है. शानदार स्टार कास्ट होने के बावजूद, यह कमल हासन की उन शुरुआती फिल्मों में से एक बन गई, जिन्हें वह पहचान नहीं मिल पाई, जिसकी वे हकदार थीं.
'अन्बे शिवम' में माधवन और कमल हासन मुख्य भूमिकाओं में थे. यह भी ऐसी फिल्म रही, जो व्यावसायिक रूप से सफल नहीं हो पाई. राजनीतिक विषयों से गहराई से जुड़ी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी. हालांकि, कई अन्य बेहतरीन फिल्मों की तरह आज इसे एक 'कल्ट' फिल्म माना जाता है.
'विरुमांडी' दो कैदियों की कहानी है, जिनमें से एक को मौत की सजा सुनाई गई है और दूसरा उम्रकैद की सजा काट रहा है. रोहिणी, जो मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं और अपनी पीएचडी कर रही हैं, इन कैदियों से बात करती हैं. जब वह एक ही घटना के बारे में दोनों कैदियों से अलग-अलग बातें सुनती हैं, तो उन्हें एहसास होता है कि कैसे भ्रष्टाचार ने विरुमांडी की जिंदगी बर्बाद कर दी है. इसके बाद वह इस सच्चाई को दुनिया के सामने लाने की कोशिश करती हैं.
2010 के बाद कमल हासन
2010 के बाद कमल हासन ने 'विश्वरूपम', 'उत्तम विलेन', 'पापनाशम' और 'थूंगा वनम' जैसी कई फिल्मों में काम किया. फिलहाल, वह 'विश्वरूपम' के सीक्वल और 'दशावतारम' के स्पिन-ऑफ 'शाबाश नायडू' पर काम कर रहे हैं. अगर मुझे 2010 के बाद उनकी कोई फिल्म देखनी हो, तो मैं 'उत्तम विलेन' चुनूंगा- एक गंभीर ड्रामा, जिसमें उन्होंने टर्मिनल कैंसर से जूझ रहे एक अभिनेता का किरदार निभाया है. इसके अलावा, 'मन्मथन अंबु' भी मेरी पसंदीदा फिल्मों में से एक है, जो एक कॉमेडी फिल्म है.