भारतीय सिनेमा का वो सितारा... जिसने बड़े पर्दे पर 17 बार निभाया श्रीकृष्ण का रोल; लोग सच में भगवान मानकर छूने लगे थे पैर
Actor Who Played Lord Krishna 17 Times: अक्षय कुमार, पवन कल्याण, जेमिनी गणेशन और सचिन पिलगांवकर जैसे कई स्टार्स ने बड़े पर्दे पर श्रीकृष्ण का किरदार निभाया है, लेकिन आज हम आपको उस एक स्टार के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने एक, दो या तीन बाद नहीं, बल्किन 17 बार बड़े पर्दे पर श्रीकृष्ण बनकर लोगों का दिल जीता है.
भारतीय सिनेमा में भगवान श्रीकृष्ण के किरदार को बड़े पर्दे पर उतारना हमेशा से एक बड़ा और चैलेंजिंग काम रहा है. जब भी कोई कलाकार मोरपंखी मुकुट पहनकर और हाथ में बांसुरी लेकर सामने आता है, तो दर्शक सिर्फ उसकी एक्टिंग नहीं देखते, बल्कि उससे अपनी गहरी आस्था भी जोड़ लेते हैं. चेहरे की शांत मुस्कान से लेकर बोलने की मिठास तक, हर छोटी बात को लोग बहुत बारीकी से परखते हैं. अक्षय कुमार ने फिल्म ‘ओएमजी - ओह माय गॉड!’ में आज के दौर के हिसाब से कान्हा का मॉर्डन किरदार निभाया था, तो वहीं तेलुगु स्टार पवन कल्याण ने ‘गोपाला गोपाला’ में ये रोल प्ले किया था.
सचिन पिलगांवकर ने ‘गोपाल कृष्ण’ में और जेमिनी गणेशन ने तमिल फिल्म ‘चक्रवर्ती थिरुमगल’ में कृष्ण बनकर खूब वाहवाही बटोरी थी. हर साल जन्माष्टमी आते ही टीवी और सिनेमा के पुराने सीन लोगों की आंखों के सामने तैरने लगते हैं. बांसुरी की धुन, माखन चुराने की नटखट शरारतें और कुरुक्षेत्र के मैदान में गीता का दिव्य उपदेश, इन सभी सीन्स ने कृष्ण की एक अलग ही इमेज लोगों के दिलों में बसा दी है, लेकिन सिनेमा जगत में एक भी बेमिसाल कलाकार भी हुआ, जिन्होंने एक, दो या तीन बार नहीं, बल्कि पूरे 17 बार बड़े पर्दे पर कृष्ण बनकर ऐसा जादू चलाया कि लोग भी उनके भक्त हो गए थे.
एन. टी. रामा राव ने बनाया अनोखा रिकॉर्ड
उस महान कलाकार का नाम था एन. टी. रामा राव, जिन्हें लोग आज भी प्यार से एनटीआर कहते हैं. साउथ सिनेमा से लेकर पूरे देश में उन्होंने अपनी अदाकारी का ऐसा डंका बजाया कि उनका नाम इतिहास के पन्नों में हमेशा के लिए दर्ज हो गया. उन्होंने अपने पूरे फिल्मी सफर में रिकॉर्ड 17 बार भगवान श्रीकृष्ण का किरदार निभाया है. उस दौर में जब भी कोई धार्मिक फिल्म बनती और उसमें कान्हा के किरदार की बात आती, तो मेकर्स और दर्शकों के दिमाग में सबसे पहला नाम सिर्फ एन. टी. रामा राव का ही आता था. उनकी शांत मुस्कान, बड़ी आंखें और भारी आवाज ने इस दिव्य किरदार में सचमुच जान फूंक दी थी.
‘माया बाजार’ से लेकर कई यादगार फिल्में
आज भी उनका ये रिकॉर्ड अटूट बना हुआ है. एन. टी. रामा राव ने साल 1957 की क्लासिक फिल्म ‘माया बाजार’ में पहली बार भगवान कृष्ण का किरदार निभाया था. इस फिल्म में उनके काम को इतना ज्यादा पसंद किया गया कि इसके बाद उनके पास ऐसे रोल्स की झड़ी लग गई. इसके बाद उन्होंने ‘श्री कृष्ण तुलाभारम’, ‘श्री कृष्ण विजयमु’, ‘श्री कृष्ण सत्य’ और ‘पांडव वनवासम’ जैसी कई यादगार और सुपरहिट फिल्मों में श्रीकृष्ण का रोल अदा किया. हर फिल्म के साथ उनका अभिनय और निखरता गया. चाहे अर्जुन को गीता का ज्ञान देना हो, रुक्मिणी और सत्यभामा के साथ संवाद हो या फिर युद्ध के मैदान में सुदर्शन चक्र उठाना, उनके हर एक सीन पर सिनेमाघरों में तालियों और जयकारों की गूंज सुनाई देती थी.
स्क्रीन पर आते ही हाथ जोड़ लेते थे लोग
उस दौर में सिनेमाघरों का माहौल किसी बड़े मंदिर जैसा बन जाता था. जब बड़े पर्दे पर एन. टी. रामा राव कृष्ण बनकर आते थे, तो लोग अपनी कुर्सियों से उठकर हाथ जोड़कर खड़े हो जाते थे. महिलाएं स्क्रीन के सामने नारियल फोड़ती थीं और लोग अगरबत्तियां जलाकर उनकी आरती उतारने लगते थे. उनकी पॉपुलैरिटी का आलम ये था कि लोग उन्हें केवल एक फिल्म स्टार नहीं, बल्कि साक्षात भगवान का रूप मानने लगे थे. दूर-दराज के गांवों से लोग उनके घर सिर्फ उनके दर्शन करने और पैर छूने के लिए आते थे. उन्होंने इस किरदार की गरिमा को इतने सम्मान और निष्ठा से निभाया कि सिनेमा और असल जिंदगी का फासला ही पूरी तरह मिट गया था.
आज भी कोई नहीं ले पाया उनकी जगह
आज तकनीक बदल चुकी है, सिनेमा का रंग-रूप बदल चुका है और कई नए कलाकारों ने भी पौराणिक किरदारों में हाथ आजमाया है, लेकिन एन. टी. रामा राव ने पर्दे पर भगवान श्रीकृष्ण की जो दिव्य छवि गढ़ी थी, उसकी बराबरी आज तक कोई दूसरा अभिनेता नहीं कर पाया. 17 बार एक ही भगवान का रोल करना और हर बार दर्शकों से वही अटूट प्यार और सम्मान पाना किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने न केवल सिनेमा जगत में एक नया इतिहास रचा, बल्कि अपनी इसी बेपनाह पॉपुलैरिटी के दम पर बाद में राजनीति में भी ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की. जब भी भारतीय सिनेमा में भगवान कृष्ण के किरदारों की बात होगी, एनटीआर का नाम हमेशा सबसे ऊपर रहेगा.