लंगूर, मूर्ति और बाबा का आशीर्वाद! 'हनुमान अंश' की शूटिंग में हुआ कुछ ऐसा, मेकर्स भी रह गए हैरान
हनुमान अंश फिल्म इन दिनों सुर्खियों में है. फिल्म में नीम करोली बाबा के जीवन के बारे में दिखाया गया है. फिल्म की टीम ने जी इंटरव्यू से फिल्म निर्माण और बाबा के अनुभव के बारे में बात की है.
नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों सुर्खियों में है. जी न्यूज के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल सिन्हा के खास कार्यक्रम में फिल्म हनुमान अंश की टीम विशाल चतुर्वेदी,साधु तिवारी और शोभिनव सत्या ने फिल्म निर्माण और बाबा नीम करोली पर खुलकर बात की है. आपने एक ऐसी फिल्म बनाई है जो कि सफलता से बहुत आगे निकल गई है. इंटरव्यू में हनुमान अंश की टीम और राहुल सिन्हा ने अपनी लाइफ में नीम करोली बाबा के अनुभव के बारे में शेयर किया है.
एंकर सवाल- मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल सिन्हा ने बताया है कि साल 1995 में पहली बार उन्हें अखबार से बाबा नीम करोली के बारे में पता चला था. उन्होंने पेपर से बाबा की फोटो काटकर अपने पास रखी थी. उन्होंने अपने अनुभव के बारे में बताया, इसी के साथर राहुल सिन्हा ने विशाल चतुर्वेदी से सवाल किया कि आपकी लाइफ में पहली बार बाबा नीम करोली कब आए?
निर्देशक विशाल चतुर्वेदी का जवाब- फिल्म निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बताया है कि वह बाबा पर यकीन नहीं करते थे. साल 2006 में वह दोस्तों के साथ जा रहे थे. तेज बारिश की वजह से उन्हें कार रोकनी पड़ी थी. जब उन्होंने कार का दरवाजा खोला तो वह दरवाजा कैंची धाम के गेट के नीचे ओपन हुआ था. उस समय नीम करोली बाबा या कैंची धाम के बारे में ज्यादा लोगों को नहीं पता था. इसके बाद हनुमान जी के लिए भक्ति बढ़ गई.
इस दौरान नीम करोली बाबा की कहानी में उनकी दिलचस्पी बढ़ी. इसके बाद उन्होंने फिल्म की कहानी को पर्दे पर दिखाने का फैसला किया. विशाल चतुर्वेदी ने बताया कि फिल्म बनाने का फैसला आसान नहीं था. उनके पास ना तो बड़ा बजट था ना ही कोई बड़ा स्टार था. लेकिन उन्होंने फिल्म बनाने का फैसला किया. उन्होंने बोला कि वह शुरू से ही फिल्म बाबा का रोल करने के लिए नया चेहरा चाहते थे.
एंकर सवाल- आप बाबा से पहली बार कब जुड़े, इस किरदार को करने से क्या बदलाव आया?
शोभिनव सत्या एक्टर का जवाब- फिल्म की शूटिंग के दौरान अनुभव किया है कि बाबा हर जगह मेरे साथ रहे हैं. मेरे लिए भगवान और बाबा की रेखा मिट चुकी हैं. मेरे लिए बाबा ही भगवान है. शोभिनव ने बताया है कि वह बाबा से सीधे तौर पर नहीं जुड़े हैं. वह हनुमान जी से जुड़े हुए थे.
उन्होंने बताया स्कूल में उनका एक दोस्त था जो बाबा की कहानी पढ़ रहा था, तब मैंने पहली बार बाबा के बारे में पढ़ा था, लेकिन बाबा मेरे जीवन का हिस्सा नहीं बने थे. मैं हनुमान भक्त था. लॉकडाउन के दौरान बाबा के बारे में लोगों को ज्यादा नहीं पता था, उस समय मुझे पता था. हम हर दिन कहानियों के बारे में बात करते थे. धीरे-धीरे मैं बाबा से जुड़ा.
एंकर का सवाल- कैसे मिला बाबा जी का किरदार
जवाब- महाराज जी का रोल निभाने के लिए डायरेक्टर ने कई शर्ते रखी थी. उनके दिमाग में लगभग 10 से 12 पैरामीटर थे. उनका कहना था कि जो बाबा जी किरदार करेगा वह स्टार शाकाहारी हो, गाली-गलौज से दूर रहता है. इसके अलावा वह महाराज जी के व्यक्तित्व को समझने में रूची रखता हो. डायरेक्टर ने फिल्म शूटिंग के दौरान सेट हुए अनुभव के बारे में बताया है.
फिल्म की शूटिंग के दौरान लंगूर का सेट पर आने का किस्सा बताया है. मेकर्स के अनुसार जब मुर्ति की स्थापित की गई थी. उस टाइम पर लंगूर आकर उसके कंधे पर बैठ गया. पहले तो डायरेक्टर को संयोग लगा. लेकिन वह लंगूर रोज सेट पर आता था. तो लगा कि बाबा जी का आशीर्वाद मिल गया.