'औरत मजबूर हो सकती है, कमजोर नहीं': राजनीति और अभिमान की जंग बयां करता है भोजपुरी फिल्म 'दशहरा' का ट्रेलर
Dussehra Trailer New Bhojpuri Movie: भोजपुरी की दमदार फिल्म 'दशहरा' का जबरदस्त ट्रेलर रिलीज हो चुका है. देव सिंह, ऋचा दीक्षित और संजय पांडे स्टारर यह फिल्म दर्शकों को बहुत अच्छा संदेश देती है, जिसमें बताती है कि औरत मजबूर हो सकती है, कमजोर नहीं.
Dussehra Trailer New Bhojpuri Movie: अगर आप भी भोजपुरी फिल्मों को देखना पसंद करते हैं तो दमदार फिल्म 'दशहरा' का ट्रेलर रिलीज हो चुका है. नई भोजपुरी फिल्म 'दशहरा' इसी पर चोट करती है. 'दशहरा' में देव सिंह, ऋचा दीक्षित और संजय पांडे नजर आएंगे. इस फिल्म के ट्रेलर में गांव के चुनाव की जबरदस्त राजनीतिक उठा-पटक को केंद्र में रखा गया है, लेकिन कहानी का मूल इससे कहीं ज्यादा आगे है.
औरत को सिर्फ घर की चारदीवारी और चूल्हा-चौका तक सीमित समझने की सोच आज भी देश के विकास में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है. नई भोजपुरी फिल्म 'दशहरा' इसी मानसिकता पर सीधा प्रहार करती है. फिल्म का 4 मिनट 49 सेकंड का ट्रेलर रिलीज हो चुका है, जो दर्शकों को सीधे देश के ग्रामीण परिवेश से जोड़ता है. इसमें वेब सीरीज 'पंचायत' की तरह गांव के प्रधानी चुनाव की झलक तो मिलती है, लेकिन यहां मामला केवल हंसी-मजाक का न होकर एक गंभीर पारिवारिक और राजनीतिक ड्रामे का है.
यहां देखें फिल्म का धांसू ट्रेलर
किसने संभाली है निर्देशन और कहानी की कमान?
फिल्म 'दशहरा' का निर्माण 'वेस्ट भोजपुरी' के बैनर तले किया गया है. इस सिनेमाई कहानी के लेखक और निर्देशक विजय प्रकाश मौर्य हैं. वहीं, फिल्म के असरदार डायलॉग और कसी हुई स्क्रीनप्ले संजय कुमार महतो ने तैयार की है.
क्या है फिल्म 'दशहरा' की कहानी?
फिल्म की कहानी मोहन (संजय पांडे) के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पिछले 15 सालों से गांव का प्रधान बनने का सपना देख रहा है. गांव का मौजूदा प्रधान केवल झूठे वादे करने और चुनाव जीतने के बाद जनता को भूल जाने में माहिर है. लेकिन कहानी में असली मोड़ तब आता है, जब गांव के प्रधान की सीट महिलाओं के लिए आरक्षित घोषित कर दी जाती है.
कैसे बदला एक घरेलू महिला का सफर?
सीट महिला आरक्षित होते ही मौजूदा प्रधान चिंता में आकर एक नृत्यांगना से शादी कर उसे प्रत्याशी बनाता है, वहीं मोहन अपनी पत्नी फूल गेंदा देवी (ऋचा दीक्षित) पर चुनाव लड़ने का दबाव डालता है. सिलाई सेंटर चलाने वाली और राजनीति से बिल्कुल दूर रहने वाली घरेलू महिला फूल गेंदा देवी भारी मन से चुनावी मैदान में उतरती है. हालांकि, चौका-चूल्हा छोड़कर मैदान में उतरी फूल गेंदा देवी एक कमाल की जन-नेता साबित होती है और 150 वोटों से चुनाव जीतकर नई प्रधान बन जाती है.
जीत के बाद क्यों शुरू हुआ नया विवाद?
चुनाव जीतने के बाद कहानी में असली अहम की टक्कर देखने को मिलती है. जब गांव के लोग और प्रशासनिक अधिकारी मोहन को प्रधान मानने के बजाय 'प्रधान पति' कहकर ताना मारते हैं, तो मोहन का पुरुषवादी अहम जाग उठता है. उसे लगता है कि उसकी पत्नी अब उसकी बातें नहीं सुनती. यह स्थिति पति-पत्नी के रिश्तों में कलह की वजह बनती है, जिसका फायदा उठाने के लिए विरोधी पूरी तरह तैयार बैठे हैं.
कौन-कौन से कलाकार और संगीतकार हैं शामिल?
फिल्म में देव सिंह, ऋचा दीक्षित और संजय पांडे के अलावा संतोष श्रीवास्तव, अंजलि सिंह, चंदन कश्यप, धर्मेंद्र श्रीवास्तव, शनि शर्मा, आशुतोष राय, संजय महतो, सुनीता मौर्य, डॉ. विनोद कुमार, गुलाम मुस्तफा शेख, ज्योति सिंह, शेर अली और कोमल जैसे दिग्गज कलाकार मौजूद हैं. फिल्म का संगीत अशोक राव का है, जबकि गीत मुसाफिर जौनपुरी, बृजेश यादव और विजय प्रकाश मौर्य ने लिखे हैं. इन गानों को शिल्पी राज, आलोक कुमार, प्रियंका सिंह चौहान, विकाश चतुर्वेदी, अंशुमान शुक्ला और स्वकृति मिश्रा ने अपनी आवाज दी है.