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बॉलीवुड एक्टर इमरान खान को बॉम्बे हाई कोर्ट से अंतरिम राहत मिली है. अब उन्हें अपनी याचिका पर सुनवाई पूरी होने तक भारत छोड़ने की जरूरत नहीं होगी. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के मौजूद न होने के चलते कोर्ट ने सुनवाई को 2 नवंबर तक के लिए टाल दिया है. इससे पहले खान को बुधवार तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया था. सुनवाई टलने से उन्हें अगली सुनवाई तक 'भारत छोड़ो' नोटिस से राहत मिल गई है.
बता दें की लीव इंडिया का नोटिस 14 अक्टूबर को आव्रजन और विदेशी अधिनियम (आईएफए), 2025 के कथित उल्लंघन के लिए जारी किया गया था. इमरान पर आरोप है कि उन्होंने 10 अक्टूबर को अगस्त क्रांति मैदान के पास मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में भाग लेकर उल्लंघन किया था. 44 वर्षीय अभिनेता ने एलआईएन को रद्द करने और इसके संचालन और कार्यान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है, जब तक कि उनकी याचिका का निपटारा नहीं हो जाता.
याचिका में कोर्ट से अंतरिम राहत की भी मांग की गई थी ताकि अधिकारियों को उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई करने से रोका जा सके. इमरान खान ने दावा किया कि 'गैर-वास्तविक' एलआईएन 'मनमानी और सत्ता के घोर दुरुपयोग' के तहत जारी किया गया था. एमजेडएम लीगल के अधिवक्ता जुल्फिकार मेमन, परवेज मेमन और चिराग नाइक सोमवार को मुख्य न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष याचिका पर तत्काल सुनवाई के लिए विचार कर सकते हैं.
10 अक्टूबर को मुंबई पुलिस द्वारा अभिनेता को विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने शिकायत दर्ज कराई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि अमेरिकी नागरिक और ओसीआई कार्डधारक ने कानून का उल्लंघन किया है. पुलिस द्वारा अग्रेषित एफआईआर के बाद, एफआरआरओ ने 14 अक्टूबर को एलआईएन जारी किया.
याचिका में दावा किया गया है कि एलआईएन बिना किसी कारण के जारी किया गया है और इसमें कानून के किसी प्रावधान का कोई विशिष्ट उल्लंघन नहीं बताया गया है. याचिका में दावा किया गया है कि नोटिस में याचिकाकर्ता को केवल अमेरिकी नागरिक के रूप में वर्णित किया गया है और नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत उनके ओसीआई पदनाम का उल्लेख नहीं किया गया है, जो एक वैधानिक दर्जा है और भारत में आजीवन निवास का अधिकार प्रदान करता है. इसलिए, इस मूलभूत तथ्य की अनदेखी 'विवेचना का अभाव' दर्शाती है.
याचिका में आगे दावा किया गया था कि एलआईएन एक 'अंतिम आदेश' है जो बिना किसी पूर्व जांच, कारण बताओ नोटिस या जवाब देने का अवसर दिए जारी किया गया है और देश छोड़ने के लिए दिए गए 14 दिन सुनवाई का विकल्प नहीं हैं.
उन्होंने आगे कहा कि सभाओं पर प्रतिबंध स्थानीय पुलिस के आदेश द्वारा लगाया गया था, न कि आव्रजन और विदेशी अधिनियम, 2025 के तहत किसी आदेश द्वारा. साथ ही, यह स्थान केंद्र सरकार द्वारा उस अधिनियम के तहत संरक्षित या निषिद्ध स्थान घोषित नहीं था, इसलिए ओसीआई स्थिति की किसी भी शर्त का उल्लंघन नहीं हुआ.
याचिका में दावा किया गया कि अभिनेता ने बैरिकेड वाले क्षेत्र में प्रवेश करने का प्रयास भी नहीं किया और पुलिस द्वारा वहां से जाने के लिए कहे जाने पर वह अपनी कार की ओर लौट रहे थे. पुलिस ने उन्हें तभी गिरफ्तार किया जब मीडियाकर्मियों ने उन्हें घेर लिया और उनसे बयान मांगा.
बता दें कि इमरान खान से जुड़ा यह मामला 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए एक विरोध प्रदर्शन के बाद चर्चा में आया था. 'कॉकरोच जनता पार्टी' (सीजेपी) द्वारा इस प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही थी. इमरान खान भी इसमें शामिल हुए थे. प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने अभिनेता समेत कई लोगों को हिरासत में लिया था लेकिन बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था.
इस घटना के बाद इमरान की नागरिकता और भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर सवाल उठे. जानकारी के मुताबिक, इमरान खान भारतीय नागरिक नहीं हैं. उनके पास अमेरिकी नागरिकता और अमेरिकी पासपोर्ट है. साथ ही, उनके पास भारत का ओवरसीज सिटिजन ऑफ इंडिया (ओसीआई) कार्ड भी है. इसी वजह से उनके प्रदर्शन में शामिल होने को लेकर कानूनी सवाल उठाए गए.
इस मामले में भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने भी शिकायत की थी. उन्होंने पुलिस और संबंधित अधिकारियों से यह जांच करने की मांग की थी कि क्या अमेरिकी नागरिक होने के बावजूद इमरान खान को भारत में इस तरह के राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल होने की अनुमति है. सोमैया ने अभिनेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए केंद्रीय गृह मंत्रालय और इमिग्रेशन अधिकारियों को भी पत्र लिखा था. उन्होंने इमरान के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी करने की मांग भी की थी.
(आईएएनएस इनपुट के साथ)