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माइथोलॉजी का बढ़ता क्रेज: ‘रामायण’ से क्यों बंधी हैं इंडस्ट्री की उम्मीदें? क्या रणबीर कपूर की फिल्म बदल सकती है बॉक्स ऑफिस का खेल

Ranbir Kapoor Ramayana Movie: भारतीय सिनेमा में अब सिर्फ रोमांस या एक्शन नहीं, बल्कि हमारी पुरानी लोककथाओं और अध्यात्म का डंका बज रहा है. ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्म जबरदस्त कमाई कर रही है. इसी बीच नितेश तिवारी की महागाथा ‘रामायण’ भी दिवाली पर रिलीज होने जा रही है, जिसे लेकर ट्रेड एनालिस्ट का दावा है कि ये फिल्म 30 साल से थियेटर न जाने वालों को भी खींच लाएगी.

Written ByVandana Saini
Published: Sep 26, 2026, 10:26 AM IST|Updated: Sep 26, 2026, 12:27 PM IST
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माइथोलॉजी का बढ़ता क्रेज: ‘रामायण’ से क्यों बंधी हैं इंडस्ट्री की उम्मीदें? क्या रणबीर कपूर की फिल्म बदल सकती है बॉक्स ऑफिस का खेल
Image Credit: रणबीर कपूर की ‘रामायण’ को लेकर क्या कहते हैं एक्सपर्ट (स्क्रीनग्रैब AI)

About the Author

Vandana Saini

Vandana Saini

वंदना सैनी जी न्यूज में सब ए़डिटर हैं और पिछले 11 साल से डिजिटल मीडिया में काम कर रही हैं. कुछ समय तक उन्होंने नेशनल, इंटरनेशनल और पॉलिटिकल बीट पर काम किया. इसके बाद 2018 में उन्होंने इंडिया न्यूज में एंटरटेनमेंट बीट पर काम करना शुरू किया और पिछले 8 साल से लगातार में एंटरटेनमेंट बीट पर काम कर रही हैं. इस दौरान उन्होंने स्मार्ट हिंदुस्तान, पत्रिका और न्यूज 24 जैसे संस्थान के साथ काम किया और पिछले 2 साल से जी न्यूज के साथ काम कर रही हैं. उन्होंने दिल्ली से पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन करने के बाद IGNOU से हिंदी में मास्टर्स किया. उन्हें पत्रकारिता के साथ कहानियां लिखने का भी शौक है. आप Vandana.saini@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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आजकल हमारे सिनेमा में एक बहुत बड़ा और बेहद खूबसूरत बदलाव देखने को मिल रहा है. वो दौर पीछे छूट रहा है, जब थियेटर में सिर्फ घिसा-पिटा रोमांस, बेमतलब का एक्शन या जबरदस्ती की कॉमेडी ही बिकती थी. अब हमारी अपनी मिट्टी की खुशबू, लोककथाएं, अध्यात्म और भारतीय संस्कृति बड़े पर्दे पर राज कर रही हैं. सबसे पते की बात ये है कि इन कहानियों को देखने सिर्फ बुजुर्ग या पूजा-पाठ करने वाले लोग नहीं जा रहे. आज की युवा पीढ़ी, जो मार्वल और डीसी की फिल्में देखकर बड़ी हुई है, वो भी थियेटर में सबसे आगे बैठकर सीटी बजा रहा है.

उसे अपनी मिट्टी से जुड़ी कहानियां देखने में मजा आ रहा है, बशर्ते उन्हें हॉलीवुड लेवल की तकनीक और शानदार विजुअल्स के साथ दिखाया जाए. पिछले कुछ सालों का हिसाब-किताब उठाकर देख लीजिए. ‘कांतारा’, ‘कार्तिकेय 2’, ‘हनु-मान’, ‘कल्कि 2898 एडी’ और पिछले महीनेभर से लगातार कमाई कर रही ‘हनुमान अंश’ जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस के सारे समीकरण पलट कर रख दिए. इन फिल्मों ने साबित कर दिया कि जब आप अपनी संस्कृति को सही विजुअल इफेक्ट्स के साथ पेश करते हैं, तो लोग अपनी जेब ढीली करने में जरा भी कंजूसी नहीं करते.

Ramayana: Part 1 2026

माइथोलॉजी से जुड़ा नया विजन

इस नए दौर की सबसे खास बात ये है कि हमारे फिल्ममेकर्स अब माइथोलॉजी को पुराने ढर्रे के धार्मिक धारावाहिक की तरह नहीं बना रहे. अब इसे बिल्कुल नए और मॉडर्न चश्मे से देखा जा रहा है. कहीं इसे आज के सुपरहीरो की शक्ल दी जा रही है, तो कहीं भविष्य की साइंस-फिक्शन दुनिया से जोड़ा जा रहा है. उदाहरण के लिए 2024 में आई प्रशांत वर्मा की ‘हनु-मान’ को ही ले लीजिए. 

उन्होंने भगवान हनुमान से जुड़ी आस्था को आज के सुपरहीरो स्टाइल में इतनी खूबसूरती से पेश किया कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक फिल्म के दीवाने हो गए और उसे देखने सिनेमाघरों तक पहुंचे. वहीं, नाग अश्विन की ‘कल्कि 2898 एडी’ ने तो कमाल ही कर दिया. महाभारत के किरदारों और भगवान विष्णु के दसवें अवतार की बात को उन्होंने 6000 साल बाद की भविष्य की बंजर दुनिया से जोड़ दिया. 

बिजनेस की बात करें तो ‘कल्कि 2898 एडी’ ने दुनियाभर में करीब ₹1,100 करोड़ की बंपर कमाई की थी. इस आंकड़े ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री की आंखें खोल दीं. इसी साल रिलीज हुई ‘हनुमान अंश’ भी इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो 2 करोड़ के बजट में पिछले एक महीने से छप्परफाड़ कमाई कर रही है, जो साबित करती हैं कि अगर हमारी अपनी कहानियों को सही कैनवास पेश किया जाए, तो उसका मार्केट पूरी दुनिया में फैल सकता है. 

रोंगटे खड़े कर देगा नया ट्विस्ट: 7 साल बाद सिनेमाघरों में फिर लौटी 3 घंटे 5 मिनट की ब्लॉकबस्टर, पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर छाई; की धांसू कमाई 

छोटे बजट वाली फिल्मों का बड़ा करिश्मा

ऐसा बिल्कुल नहीं है कि सिर्फ 500 या 600 करोड़ रुपये फूंककर ही ऐसी फिल्में बनाई जा सकती हैं. असली जादू तो छोटे बजट की उन फिल्मों ने दिखाया, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर भारी-भरकम मुनाफा कमाया. ट्रेड रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रशांत वर्मा की ‘हनु-मान’ सिर्फ ₹40 करोड़ के आसपास के बजट में बनी थी. इस फिल्म ने दुनियाभर से लगभग ₹295 करोड़ पीट लिए. 

वहीं, ऋषभ शेट्टी की ‘कांतारा’ तो महज ₹16 करोड़ की लागत से तैयार हुई थी, लेकिन जब उसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन सामने आया, तो सब दंग रह गए करीब ₹407 करोड़. निखिल सिद्धार्थ की ‘कार्तिकेय 2’ को भी मत भूलिए. लगभग ₹15 करोड़ में सिमटकर बनी इस फिल्म ने वर्ल्डवाइड करीब ₹117.87 करोड़ का धुआंधार बिजनेस किया. ऐसा ही कुछ पिछले महीने रिलीज हुई विशाल चतुर्वेदी की ‘हनुमान अंश’ का बजट भी सिर्फ 2 करोड़ था. 

ये फिल्म 50 दिनों से बॉक्स ऑफिस पर लगातार कमाई कर रही है, जिसने दुनियाभर में 381.35 करोड़ की कमाई कर ली है और अभी लगातार कमाई करती जा रही है. आंकड़ों में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है, लेकिन मैसेज शीशे की तरह साफ है. अगर कहानी दिल को छू जाए, तो कम बजट में भी ऐसा रिटर्न मिल सकता है, जिसकी किसी कॉर्पोरेट ने कल्पना भी नहीं की होगी.

Ramayana 2026

थियेटरों को मिल गया एक नया और वफादार दर्शक

अब बॉलीवुड हो या साउथ, कोई भी फिल्म इंडस्ट्री माइथोलॉजी को हल्के में लेने की भूल नहीं कर सकती. इसे अब कोई खास तबके की फिल्म नहीं कह सकता. यहां दो तरह का दर्शक एक साथ थियेटर पहुंच रहा है. पहला वो दर्शक, जिसे ये कहानियां बचपन से जुबानी याद हैं. उसने ‘रामायण’, ‘महाभारत’ या स्थानीय कथाएं दादी-नानी से सुनी हैं, लेकिन वे इन्हें बड़े पर्दे के मैजिकल एक्सपीरियंस में फिर से जीना चाहता है. 

दूसरा, हमारा नया युवा दर्शक है, जिसने इन बातों को सिर्फ किताबों या टीवी पर देखा था. उसे अब इंटरनेशनल स्केल के VFX और साउंड डिजाइन में अपनी संस्कृति को देखना गर्व का अहसास कराता है. यही वजह है कि आने वाले कुछ सालों में ये जॉनर भारतीय सिनेमा की सबसे बड़ी रीढ़ बनने जा रहा है. हाल की सफलताओं ने ये पक्का कर दिया है कि अगर कंटेंट सच्चा है, तो सिनेमाघर कभी खाली नहीं रहेंगे.

अब ‘रामायण’ पर टिकी पूरी दुनिया की निगाहें

इसी जबरदस्त माहौल के बीच अब तक का सबसे बड़ा सिनेमाई दांव खेला जा रहा है. ‘दंगल’ जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बनाने वाले डायरेक्टर नितेश तिवारी अब ‘रामायण: पार्ट 1’ लेकर आ रहे हैं. ये फिल्म सीधे वाल्मीकि रामायण से इंस्पायर है और इसे दो बड़े पार्ट्स में तैयार किया जा रहा है. फिल्म का पहला पार्ट नवंबर 2026 में रिलीज के लिए तैयार है, जबकि दूसरा पार्ट 2027 में रिलीज होगा. 

हालिया, खबरों और फिल्म डेटाबेस के मुताबिक, 6 नवंबर 2026 की तारीख इंटरनेशनल लेवल पर तय मानी जा रही है, जबकि प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ने भारत के लिए दिवाली का शुभ समय चुना है. कास्टिंग की बात करें तो इसमें देश के सबसे बेहतरीन कलाकारों की टोली जुटी है. रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभा रहे हैं और उनके साथ माता सीता के किरदार में बेहद सादगी भरी साई पल्लवी नजर आएंगी. 

‘केजीएफ’ फेम सुपरस्टार यश लंकापति रावण बन रहे हैं, टीवी के चहेते रवि दुबे लक्ष्मण के किरदार में नजर आएंगे और सनी देओल महाबली हनुमान के किरदार में लंका दहन करते नजर आएंगे. इतना ही नहीं, अरुण गोविल, लारा दत्ता, रकुल प्रीत सिंह, काजल अग्रवाल और इंदिरा कृष्णन जैसे कई मंझे हुए कलाकार भी इस फिल्म का अहम हिस्सा होंगे. 

संगीत के मामले में तो इतिहास रचा जा रहा है. हॉलीवुड के ऑस्कर विनर हैंस जिमर और हमारे अपने ए आर रहमान मिलकर इस महागाथा की धुनें तैयार कर रहे हैं.

जानी-पहचानी कहानी, फिर भी सबसे बड़ी चुनौती

इस पहले पार्ट की कहानी भगवान राम के बाल्यकाल, ऋषि विश्वामित्र के साथ उनकी यात्रा, सीता स्वयंवर, विवाह और फिर 14 साल के कठिन वनवास के इर्द-गिर्द घूमेगी. यानी मेकर्स के पास कोई सस्पेंस छिपाने की गुंजाइश नहीं है. भारत का बच्चा-बच्चा जानता है कि आगे क्या होने वाला है. ऐसे में असली परीक्षा इस बात की होगी कि उस जानी-पहचानी कहानी को पर्दे पर इतने नए, भव्य और इमोशनली तरीके से कैसे उतारा जाए कि दर्शक पलक झपकाना भूल जाएं.

जब कहानी का अंत सबको पता हो, तो जीत सिर्फ भावनाओं, किरदारों की गहराई, बेहतरीन अभिनय, बैकग्राउंड म्यूजिक और आंखों को सुकून देने वाले विजुअल्स से ही मिल सकती है. दर्शक स्क्रीन पर सिर्फ देखने नहीं, बल्कि उस दौर को महसूस करने आएगा.

Ramayana Movie Budget

4,000 करोड़ का दांव और ग्लोबल बाजार का सपना

‘रामायण’ का स्केल इतना बड़ा है कि सुनकर ही होश उड़ जाएं. मीडिया रिपोर्ट्स और इंडस्ट्री के जानकारों की मानें तो दोनों पार्ट्स और वर्ल्डवाइड मार्केटिंग को मिलाकर करीब ₹4,000 करोड़ तक का भारी-भरकम अनुमान लगाया जा रहा है. हालांकि, ये कोई आखिर ऑफिशियल आंकड़ा नहीं है, लेकिन इससे फिल्म के बड़े आकार का अंदाजा जरूर लग जाता है.

नमित मल्होत्रा की ‘प्राइम फोकस स्टूडियोज’ और यश की ‘मॉन्स्टर माइंड क्रिएशंस’ मिलकर इसे बना रही हैं. प्राइम फोकस ने हॉलीवुड की बड़ी-बड़ी फिल्मों में VFX का लोहा मनवाया है, इसलिए वो इस फिल्म को सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रखना चाहते.

नमित मल्होत्रा का साफ कहना है कि विदेशों में फिल्में शुक्रवार को बड़े पैमाने पर रिलीज होती हैं, इसलिए इंटरनेशनल मार्केट में इसे 6 नवंबर को उतारा जाएगा और भारत में दिवाली के जश्न के साथ जोड़ा जाएगा. इस पूरी प्लानिंग का मकसद साफ है कि हॉलीवुड, अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप के दर्शकों को भी इस भारतीय महाकाव्य से रूबरू कराना.

ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा का बड़ा दावा

रणबीर कपूर और नितेश तिवारी की इस मेगा बजट फिल्म को लेकर इंडस्ट्री में क्या माहौल है, इसे मशहूर ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा के एनालिसिस से समझने की कोशिश करते हैं. कोमल नाहटा का मानना है कि ‘रामायण’ को सिर्फ 3 घंटे की एक आम फिल्म समझना बहुत बड़ी भूल होगी. ये असल में एक बहुत बड़ा सांस्कृतिक आंदोलन बनने जा रही है.

जी न्यूज से बात करते हुए नाहटा जी का कहना है कि ये फिल्म सिनेमाघरों का पूरा नक्शा और बिजनेस का तरीका बदल कर रख देगी. उनका दावा है कि ऐसे करोड़ों लोग, जिन्होंने पिछले 20 या 30 सालों से मल्टीप्लेक्स की सीढ़ियां नहीं चढ़ी हैं, वे भी इस फिल्म को देखने थियेटर पहुंचेंगे. हमारे घरों के बुजुर्ग, जो भीड़भाड़ से दूर रहते हैं, वे भी पूरे परिवार को लेकर हॉल में जाएंगे.

वहीं दूसरी तरफ, कॉलेज जाने वाली आज की नौजवान पीढ़ी भी इसे देखने सबसे पहले दौड़ेगी. उन्हें अपनी संस्कृति, अपने भगवान और अपने नायकों को दुनिया के सबसे बेहतरीन वीएफएक्स और हॉलीवुड स्तर के विजुअल्स के साथ देखने का रोमांच खींच लाएगा.

जब पूरा परिवार एक साथ हॉल में पहुंचेगा

किसी भी फिल्म की असली ताकत ये नहीं होती कि उसने पहले से फिल्म देखने वाले नियमित युवाओं को टिकट बेच दिया. असली क्रांति तब होती है जब वो लोग थियेटर की तरफ कदम बढ़ाते हैं जो सालों से घर पर बैठे थे. ‘रामायण’ की सांस्कृतिक पहुंच सदियों पुरानी है. अगर ये फिल्म हर उम्र के लोगों को एक साथ थिएटर की कुर्सियों पर बैठाने में कामयाब रही, तो बॉक्स ऑफिस पर जो आंधी आएगी, उसे संभालना मुश्किल होगा. ये किसी एक स्टार के दम पर चलने वाली फिल्म नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था और पहचान से जुड़ा मामला है.

Ranbir Kapoor Ramayana

क्या टूट जाएंगे कमाई के सारे रिकॉर्ड?

कोमल नाहटा के विश्लेषण का सीधा मतलब यही है कि अगर ये फिल्म दर्शकों की कसौटी पर खरी उतर गई, तो ये भारतीय सिनेमा के इतिहास में कमाई के ऐसे रिकॉर्ड बनाएगी, जिन्हें तोड़ पाना नामुमकिन जैसा होगा, लेकिन इस पूरे समीकरण में सबसे बड़ा शब्द है ‘अगर’. भारी बजट, बड़े-बड़े स्टार्स और करोड़ों का प्रमोशन पहले वीकेंड में भीड़ तो जुटा सकते हैं.

लेकिन फिल्म को हफ्तों तक चलाता है, सिर्फ जनता का प्यार यानी वर्ड ऑफ माउथ. ‘कांतारा’, ‘हनु-मान’ और ‘हनुमान अंश’ जैसी कम बजट वाली फिल्मों ने भी हमें यही सिखाया है कि जनता बजट देखकर ताली नहीं बजाती. जनता ताली बजाती है जब फिल्म सीधे दिल में उतर जाती है.

AI तकनीक: हमारी प्राचीन गाथाओं का नया रूप

आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वर्चुअल प्रोडक्शन और हाई-एंड विजुअल इफेक्ट्स ने उन सीन्स को दिखाना मुमकिन बना दिया है, जो पहले सिर्फ कल्पनाओं में थे. हवा में उड़ते पर्वत, आकाश से बरसते दिव्य अस्त्र, सोने की लंका, प्राचीन भव्य अयोध्या नगरी और भयानक युद्ध के मैदान—इन सबको आज की तकनीक से एकदम असली जैसा दिखाया जा सकता है. 

‘कल्कि 2898 एडी’ ने दिखा दिया था कि हमारी पौराणिक बातों को अगर मॉर्डन विजुअल भाषा में ढाला जाए, तो वो कितनी कमाल लगती हैं.

कोमल नाहटा ने इस मामले में एक बहुत ही सटीक तुलना की है. जी न्यूज से बात करते हुए उनका कहना है कि हमारे पौराणिक नायक और किरदार हॉलीवुड के मार्वल या डीसी के सुपरहीरो से कहीं ज्यादा शक्तिशाली, चमत्कारी और ह्यूमन वैल्यूज से भरे हुए हैं.

हॉलीवुड के हल्क, थॉर या सुपरमैन के पास सिर्फ शारीरिक ताकत या तकनीकी गैजेट्स हैं, लेकिन हमारे भगवान राम, हनुमान या भगवान कृष्ण के पास असीम शक्ति के साथ-साथ मर्यादा, दर्शन, त्याग, प्रेम और भक्ति का भी अद्भुत संगम है. यही वो खूबी है जो हमारी कहानियों को दुनिया में सबसे अनोखा बनाती है.

कोमल नाहटा की चेतावनी: सिर्फ VFX से नहीं चलेगी गाड़ी

तकनीक की तारीफ करने के साथ-साथ कोमल नाहटा ने एक बहुत जरूरी चेतावनी भी दी है. उनका साफ कहना है कि सिर्फ AI और VFX भर देने से कोई फिल्म सुपरहिट नहीं हो जाती.

अगर फिल्म के अंदर आत्मा नहीं है, तो कंप्यूटर पर बने ग्राफिक्स सिर्फ बेजान प्लास्टिक के खिलौने जैसे लगते हैं. अगर कहानी कमजोर हुई, स्क्रीनप्ले ने बोर किया और दर्शक किरदारों के दुख-दर्द से नहीं जुड़ा, तो 500 करोड़ का VFX भी फिल्म को फ्लॉप होने से नहीं बचा पाएगा.

ये बात 100 टका सच है. दर्शक भव्य विजुअल देखकर थियेटर में आ तो सकता है, लेकिन अगर उसने दिल से महसूस नहीं किया, तो वो बाहर निकलकर दूसरों को मना कर देगा. ‘रामायण’ के मेकर्स को ये बात गांठ बांधकर रखनी होगी. उन्हें तकनीक का तड़का तो लगाना है, लेकिन कहानी की पवित्रता और भावनाओं की गरिमा से कोई समझौता नहीं करना है.

Ramayana Ranbir Kapoor as Lord Rama

भावनाओं का संतुलन ही बनेगा जीत की चाबी

कोमल नाहटा का कहना है कि आज का दर्शक बहुत समझदार हो चुका है. वो आंख मूंदकर किसी भी फिल्म को सिर्फ इसलिए हिट नहीं कराएगा, क्योंकि उसमें किसी भगवान का नाम है या किसी बड़े स्टार का चेहरा है. उसे दोनों चीजें चाहिए—आंखों के लिए शानदार विजुअल्स और दिल के लिए सच्ची भावनाएं.

धार्मिक और पौराणिक कहानियों में जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है. यहां दर्शकों की गहरी आस्था जुड़ी होती है. एक छोटी सी चूक या बनावटीपन पूरी मेहनत पर पानी फेर सकता है. ‘रामायण’ सिर्फ एक एंटरटेनमेंट का जरिया नहीं है, ये करोड़ों भारतीयों की पहचान है.

इसलिए डायरेक्टर नितेश तिवारी के कंधों पर बहुत भारी जिम्मेदारी है. उन्हें भगवान राम की मर्यादा, माता सीता का आत्मसम्मान और त्याग, लक्ष्मण का निस्वार्थ समर्पण और पवनपुत्र हनुमान की अटूट भक्ति को उस सादगी के साथ पेश करना होगा जो सीधे रूह को छू जाए.

आखिर फैसला जनता के हाथ में

साल 2026 की ‘रामायण’ सिर्फ रणबीर कपूर, यश या नितेश तिवारी की फिल्म नहीं है. ये पूरे भारतीय सिनेमा का एक बहुत बड़ा इम्तिहान है. ये वो कसौटी है जहां ये तय होगा कि क्या हम अपनी गौरवशाली विरासत को दुनिया के सबसे बड़े मंच पर सीना ठोककर रख सकते हैं या नहीं?

कोमल नाहटा की बात का पूरा निचोड़ यही है कि तकनीक मंच सजा सकती है, बड़े-बड़े नाम सुर्खियां बटोर सकते हैं और बजट की चर्चा से माहौल गर्म हो सकता है, लेकिन आखिरकार जीत उसी की होगी जो थियेटर के अंधेरे में बैठे दर्शक की आंखों में आंसू और चेहरे पर गर्व का भाव ला सके.

अब बड़ा सवाल ये नहीं बचा है कि फिल्म 1000 करोड़ कमाएगी या 2000 करोड़. बड़ा सवाल ये है कि क्या ये फिल्म दुनिया को दिखा पाएगी कि हमारी भारतीय संस्कृति के आगे हॉलीवुड के सारे सुपरहीरो पानी भरते नजर आते हैं. इस सवाल का फैसला 6 नवंबर 2026 से दुनिया भर के सिनेमाघरों में शुरू हो जाएगा.

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