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Karnataka KPSC Chairman Arrested: सोचिए, जिस आयोग पर सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी हो, अगर वही भ्रष्टाचार के केंद्र में आ जाए तो पूरे सिस्टम पर सवाल उठना तय है. कुछ ऐसा ही कर्नाटक पब्लिक सर्विस कमीशन (KPSC) के बहुचर्चित भर्ती घोटाले में देखने को मिला है, जिससे सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के भरोसे को गहरा झटका लगा था. इस मामले में अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी ED ने कर्नाटक लोक सेवा आयोग के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार और आयोग की सदस्य बी.वी. गीता को गिरफ्तार कर लिया है.
ये कार्रवाई KPSC द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई धांधली, रिश्वतखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के सिलसिले में की गई है. आइए KPSC भर्ती घोटाले के पूरे मामले, कौन हैं गिरफ्तार हुए चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार और गीता के बारे में जानते हैं.
कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) के निलंबित अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. साहूकार मूल रूप से कर्नाटक के रायचूर जिले के रहने वाले हैं. बाद में वो कलबुर्गी (गुलबर्गा) में बस गए. उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा रायचूर स्थित कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग से पूरी की, जहां से उन्होंने एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग यानी बी.एससी की डिग्री हासिल की.
KPSC अध्यक्ष बनने से पहले वो किसी भी प्रशासनिक सेवा में नहीं रहे थे. दरअसल, राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष पद के लिए कोई यूपीएससी परीक्षा पास करना या नौकरशाह होना अनिवार्य नहीं है. उनकी नियुक्ति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के तहत की गई थी, जिसके अंतर्गत राज्य सरकार की सिफारिश पर राज्यपाल लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को नियुक्त करते हैं.
शिवशंकरप्पा साहूकार को 3 सितंबर 2019 को कर्नाटक लोक सेवा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था. इसके बाद 3 अप्रैल 2021 को उन्हें आयोग के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सौंपी गई. पूर्व IAS अधिकारी शदाक्षरी स्वामी के रिटायर्ड होने के बाद तत्कालीन राज्यपाल वजुभाई वाला ने उन्हें इस पद पर नियुक्त किया था. केपीएससी अध्यक्ष बनने के बाद राज्य की तमाम महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सिविल सेवा भर्ती परीक्षाओं के संचालन और निगरानी की मुख्य जिम्मेदारी उन्हीं के पास थी.
केपीएससी के निलंबित चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार पर लगे आरोप के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है. दरअसल, उन पर आरोप लगा है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग करते हुए अपनी दोनों बेटियों का चयन कराया और इस दौरान भर्ती प्रक्रिया से दूरी नहीं बनाई. राज्यपाल सचिवालय की जांच के अनुसार, उनकी एक बेटी ने सिर्फ 40 हजार रुपये की फर्जी वार्षिक आय दिखाकर OBC नॉन-क्रीमी लेयर का आरक्षण हासिल किया.
इसके अलावा उन्होंने कर्नाटक सरकार के 30 मार्च 2002 के उस स्पष्ट आदेश का भी उल्लंघन किया, जिसके तहत लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष के बच्चों को राज्य के पिछड़ा वर्ग आरक्षण का फायदा पाने से प्रतिबंधित किया गया है.
कर्नाटक लोक सेवा आयोग की सदस्य के रूप में बी.वी. गीता कार्यरत रही हैं. इस संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने राज्य की महत्वपूर्ण प्रशासनिक और सिविल सेवा भर्ती परीक्षाओं, इंटरव्यू और चयन प्रक्रियाओं की निगरानी की जिम्मेदारी संभाली थी. सरकारी भर्ती परीक्षाओं के आयोजन में हुई भारी अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया है.