UPSC Success Story of Sharan Kamble: जरा सोचिए, जिस बच्चे ने स्कूली शिक्षा हासिल करने के लिए रोजाना 12 किलोमीटर का सफर तय किया हो, बिजली न होने के कारण लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की हो और अपनी मां-बाप को दिन-रात कड़ी मेहनत करते देखा हो, उसे जब बड़े होने के बाद लाखों रुपये के पैकेज वाली नौकरी मिले तो कैसा महसूस होगा? शायद वो रकम उस परिवार की उम्मीदों से भी कहीं ज्यादा थी, लेकिन अगर कोई उस नौकरी को ठुकराकर देश और समाज की सेवा का रास्ता चुने, तो ऐसे इंसान के बारे में आप क्या कहेंगे?
कुछ ऐसा ही महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के ताड़वाले गांव के रहने वाले शरण कांबले ने कर दिखाया है. एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखने वाले शरण का बचपन बेहद तंगहाली में बीता, लेकिन जब एक मल्टीनेशनल कंपनी ने उन्हें 20 लाख रुपये के सालाना पैकेज की नौकरी ऑफर की, तो उन्होंने उसे बिना झिझके ठुकरा दिया और यूपीएससी की तैयारी में जुट गए.
शरण कांबले के लिए आईपीएस अफसर बनने का सफर उतना आसान नहीं था, जितना उनकी सफलता की कहानी सुनकर लगता है. दरअसल, उन्होंने बचपन से ही गरीबी और पैसों की तंगी को करीब से देखा था. उनके माता-पिता ने दिन-रात एक करके उन्हें पढ़ाया, मां सब्जियां बेचती थीं और पिता मजदूरी करते थे.
शरण ने अपनी शुरुआती पढ़ाई तो गांव के स्कूल से की, लेकिन 10वीं के बाद उन्हें आगे की पढ़ाई के लिए रोजाना 12 किलोमीटर का सफर तय करके जाना पड़ता था. घर में बिजली न होने के कारण वो रोजाना लालटेन की रोशनी में बैठकर पढ़ाई करते थे.
माता-पिता का संघर्ष जारी रहा और कई मुश्किलों का सामना करने के बाद भी उन्होंने अपने बेटे शरण को पढ़ाया. सांगली के वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से उन्होंने बीटेग डिग्री हासिल की. इसके बाद पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए उन्होंने प्रतिष्ठित संस्थान IISc में एडमिशन लिया. कॉलेज की पढ़ाई के साथ उन्होंने यूपीएससी की भी तैयारी शुरू कर दी.
महाराष्ट्र सरकार की स्कॉलरशिप के जरिए उनके लिए पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी करना थोड़ा आसान रहा. करीब 8 महीने तक उन्हें प्रत्येक माह 12000 रुपये की स्कॉलरशिप मिली. ऐसे में उन्होंने दिल्ली जाकर सिविल सेवा की तैयारी शुरू की. एक तरफ कॉलेज की पढ़ाई और दूसरी तरफ यूपीएससी की भी तैयारी जारी थी.
इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद कैंपस से उन्हें एक कंपनी ने हायर किया और सालाना 20 लाख रुपये का पैकेज भी ऑफर किया लेकिन उन्होंने उससे इनकार कर दिया. इसके बाद वो पूरी तरह से यूपीएससी की परीक्षा की तैयारी में जुट गए. दिन-रात की मेहनत का नतीजा ये रहा कि उन्होंने लगातार 3 यूपीएससी के एग्जाम को क्रैक किया.
साल 2019 में उन्होंने UPSC CAPF परीक्षा दी, जिसमें ऑल इंडिया 8वीं रैंक हासिल कर बड़ी सफलता दर्ज की. इसके बाद साल 2020 की यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में उन्हें 542वीं रैंक मिली औरवो आईपीएस के लिए चुने गए, लेकिन उन्होंने यहीं रुकने के बजाय साल 2021 में एक बार फिर परीक्षा दी और ऑल इंडिया 127वीं रैंक प्राप्त की. इस बार वो भारतीय विदेश सेवा (IFS) के लिए चुने गए, लेकिन उनका असली सपना खाकी वर्दी यानी IPS बनना ही था, इसलिए उन्होंने आईपीएस पद को ही चुना.
आज शरण कांबले की सफलता की ये कहानी हर युवा के लिए एक मिसाल बन चुकी है. उन्होंने ये साबित कर दिखाया कि सीमित साधनों के बावजूद अगर खुद पर विश्वास और कड़ी मेहनत करने का जज्बा हो, तो बड़ी से बड़ी मंजिल भी हासिल की जा सकती है.