अपमान से अफसर बनने की कहानी: शादी में नहीं बुलाया, तो चाय वाले का बेटा UPSC क्रैक कर बन गया फर्स्ट क्लास ऑफिसर
UPSC Success Story of Ankit Mishra: सामाजिक अपमान ने अंकित मिश्रा के मन में ऐसी आग जलाई कि उन्होंने 23 की उम्र में देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक को क्रैक कर दिया. आइए उनके संघर्ष और सफलता की पूरी कहानी जानते हैं.
UPSC Success Story of Ankit Mishra: जिंदगी में कई बार कुछ ऐसे वाकये हो जाते हैं, जो जीवन की परिभाषा और लक्ष्य दोनों को बदल देते हैं. कुछ ऐसा ही सफर अंकित मिश्रा का रहा है, जिन्होंने 23 साल की उम्र में यूपीएससी सीएपीएफ (UPSC CAPF) परीक्षा में सफलता हासिल कर उन सभी को चुपचाप जवाब दे दिया, जो कभी उन्हें गरीब होने के कारण शादी-फंक्शन तक में बुलाना पसंद नहीं करते थे.
कोविड के समय जब अंकित के पिता की नौकरी छूट गई, तो परिवार चलाने के लिए चाय का ठेला लगाना पड़ा. घर की स्थिति ऐसी थी कि रहने के लिए पक्का मकान तक नहीं था, लेकिन अंकित पढ़ाई में मेधावी थे और उन्होंने ठान रखा था कि अपनी गरीबी का मजाक उड़ाने वालों को वे एक दिन अपनी सफलता से जवाब देंगे. आइए अंकित आशीष मिश्रा की सफलता की कहानी जानते हैं.
10वीं जिला टॉपर, 11वीं में 94% अंक
रांची के रहने वाले अंकित आशीष मिश्रा के पिता एक प्राइवेट स्कूल में टीचर थे और कोविड के समय उनकी नौकरी गई थी. वहीं, बात करें अंकित की तो पढ़ाई के मामले में वो बचपन से काफी अच्छे थे. कक्षा 10वीं में उन्हें पूरे जिला में टॉप किया था, लेकिन उनके लिए अंग्रेजी मीडियम स्कूल में खुद को ढलना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था. हालांकि, उन्होंने मेहनत में कमी नहीं आने दी और 11वीं में 94% अंक हासिल किए. उनका नाम हमेशा मेधावी छात्रों में रहता था.
चाय बेचने पर, रिश्तेदारों ने शादी का नहीं दिया न्यौता
जो रिश्तेदार कभी शिक्षक पद होने से अंकित के पिता और उनके घर वालों को पूछा करते थे, जब उन्होंने नौकरी जाने पर चाय की दुकान लगाई जो उन्हें पारिवारिक शादी में बुलाया नहीं गया. घर वालों को न बुलाने के कारण उन्हें ये अपमान इस तरह से दिल पर लगा कि उन्होंने समाज का नजरिया बदलने का ठान लिया था. इस अपमान ने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी.
ट्यूशन पढ़ाकर खुलवाई चाय की दुकान
जब उनके पिता की नौकरी चली गई थी, तब घर की स्थिति ऐसी थी कि उनके पिता के पास चाय का ठेला लगाने तक के लिए पैसे उतने ज्यादा नहीं थे. ऐसे में अंकित की कोशिश काम आई. उन्होंने होम ट्यूशन के जरिए कमाई की, फिर घर का खर्च चलाया और छोटी बचत से चाय का ठेला भी लगाया. उस दौरान उन्हें अपनी पढ़ाई भी जारी रखी. बच्चों को पढ़ाने के अलावा वो अपने पढ़ने का भी समय निकालते थे.
दिल्ली आकर की यूपीएससी की तैयारी
दिल्ली आकर उन्होंने यूपीएससी की तैयारी के लिए पुराने नोट्स और किताबों ली. उनके जरिए पढ़ाई कि और साथ में कॉलेज की पढ़ाई भी जारी रखी. एक स्टडी प्लान बनाकर उन्होंने कॉलेज की पढ़ाई और यूपीएससी की तैयारी के लिए तालमेल बैठाया. पहली बार में अंकित को हार का सामना करना पड़ा. सिर्फ 7 अंक कम आने से वो असफल रहे.
नहीं मानी हार, 23 की उम्र में पाई सफलता
साल 2025 में उन्होंने UPSC CAPF परीक्षा दी और फिर जिंदगी में वो मोड़ आया, जब उन्हें ऐतिहासिक सफलता हासिल हुई. CAPF परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 236वीं रैंक हासिल की, जिसके साथ ही वो महज 23 साल की उम्र में क्लास-1 गैजेटेड ऑफिसर बन गए. उनकी ये संघर्ष की कहानी साबित करती है कि जीवन में चाहे संसाधन कम हों या परिस्थितियां आपके खिलाफ, मेहनत और लगन में कमी नहीं आनी चाहिए. ऐसा करने पर सफलता एक न एक दिन जरूर कदम चूमती है.
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