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किचन सेट से फाइटर जेट तक... पंजाब के स्कूलों में बच्चों को कैसे सिखाई जा रही लैंगिक समानता?

पंजाब के सरकारी स्कूलों के पाठ्यक्रम में जेंडर सेंसिटाइजेशन को शामिल कर बच्चों में लैंगिक भेदभाव और रूढ़ियों को कम करने की कोशिश की जा रही है. जानिए कक्षा 6 से 12 तक की किताबों में क्या बदलाव हुए?

Written By Shivam Tiwari
Published: Sep 06, 2026, 08:55 AM IST | Updated: Sep 06, 2026, 01:56 PM IST
Image Credit: क्या किचन सेट से शुरू हुई कहानी सोच बदल सकती है?
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पंजाब के सरकारी स्कूलों में बच्चों को लैंगिक समानता और जेंडर रोल्स समझाने के लिए पाठ्यक्रम में कई नए बदलाव किए गए हैं. इसका एक दिलचस्प उदाहरण कक्षा 7 की कहानी ‘A Gift for Sidhak’ है. कहानी में सिधक किचन सेट चाहती है क्योंकि उसकी सहेलियों के पास भी ऐसा सेट है. उसके दादाजी उसे गणतंत्र दिवस की परेड देखने को कहते हैं. परेड में जब वह एक महिला फाइटर पायलट को तिरंगे को सलाम करते देखती है तो उसका नजरिया बदल जाता है. वह पूछती है कि क्या वह भी फाइटर जेट उड़ा सकती है. दादाजी उसे किचन सेट की जगह छोटा फाइटर जेट गिफ्ट करते हैं.

दरअसल, यह कहानी पंजाब के सरकारी स्कूलों में कक्षा 7 के पाठ्यक्रम का हिस्सा है. पंजाब शिक्षा विभाग ने 2021 में NGO ब्रेकथ्रू और द अब्दुल लतीफ़ जमील पॉवर्टी एक्शन लैब साउथ एशिया (J-PAL) के साथ मिलकर नियमित पाठ्यक्रम में जेंडर सेंसिटाइजेशन को शामिल किया था.

इसका मकसद बच्चों को छोटी उम्र से ही लैंगिक भेदभाव को समझने, सवाल उठाने और रूढ़ियों को चुनौती देने के लिए तैयार करना है. किताबों में यह समझाने की कोशिश की गई है कि लड़कियों को किचन सेट और लड़कों को कार या हवाई जहाज जैसे खिलौने देने से भी बच्चों के मन में तय जेंडर रोल बन सकते हैं. बदलाव खास तौर पर कक्षा 6 से 8 की किताबों में दिखाई देता है.

क्या लड़कियों की पढ़ाई और करियर पर भी जोर है?

कक्षा 6 की अंग्रेजी किताब में ‘A Forgotten Wish’ नाम की कहानी है. इसमें बताया गया है कि शादी के बाद भी बेटियां अपने माता-पिता की देखभाल कर सकती हैं. कहानी की ख्वाहिश अपनी मां की मदद करना चाहती है, लेकिन मां मानती है कि शादी के बाद लड़की का घर पति का होता है. जब मां बीमार पड़ती है और उसका बेटा विदेश से नहीं आ पाता, तब ख्वाहिश आगे बढ़कर मां की आंखों की सर्जरी करवाती है और उसकी देखभाल करती है. इसी तरह कक्षा 8 में ‘Smashing the Glass Ceiling’ कहानी महिलाओं के करियर में सामाजिक पाबंदियों को दिखाती है. इसमें परमजीत अपना कंप्यूटर कारोबार चलाती है, जबकि पढ़ी-लिखी गीत परिवार के दबाव के कारण नौकरी नहीं कर पाती.

इतिहास की महिलाओं को नए नजरिए से क्यों पढ़ाया जा रहा है?

पाठ्यक्रम में बदलाव केवल रोजमर्रा की जिंदगी तक सीमित नहीं है. इतिहास में महिलाओं की भूमिका को भी नए नजरिए से समझाने की कोशिश की गई है. किताबों में रजिया सुल्तान और नूरजहां जैसी महिलाओं को केवल किसी पुरुष की बेटी या पत्नी के रूप में देखने के बजाय उनकी अपनी पहचान और उपलब्धियों पर जोर दिया गया है. रजिया सुल्तान को दिल्ली सल्तनत की पहली और एकमात्र महिला मुस्लिम शासक के तौर पर पढ़ाया गया है.

वहीं नूरजहां को मुगल शासन में प्रभावशाली भूमिका निभाने वाली महिला के रूप में बताया गया है. किताबों में बच्चों से सवाल भी पूछे जाते हैं कि रजिया को किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा और आज के दौर में उनके सामने कौन-सी मुश्किलें होतीं.

क्या बदलाव सिर्फ लड़कियों के लिए है?

पंजाब शिक्षा विभाग के मुताबिक जेंडर सेंसिटाइजेशन का उद्देश्य केवल लड़कियों की सोच बदलना नहीं, बल्कि लड़कों को भी समानता समझाना है. विभाग की अधिकारी सुनीता प्रभाकर के अनुसार, सिर्फ किताबें बदलने से बदलाव नहीं आएगा, इसलिए शिक्षकों को भी प्रशिक्षण दिया गया है कि वे इन विषयों को कक्षा में किस तरह समझाएं.

पाठ्यक्रम में परिवारों की ओर से महिलाओं के करियर को समर्थन देने और पुरुषों के घरेलू काम में भाग लेने जैसे मुद्दे भी शामिल किए गए हैं. NGO Breakthrough की राज्य प्रमुख रश्मि द्विवेदी का कहना है कि प्रयास बच्चों की आकांक्षाएं बदलने का है, ताकि शादी, नौकरी और परिवार को लेकर पुराने सामाजिक नियम उनकी संभावनाओं को सीमित न करें.

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About the Author

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
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