App

डिग्री है, नौकरी नहीं... तो क्या हुआ? 22 साल के लड़के ने पकड़ी कार और शुरू कर दी नई जिंदगी

B.Com ग्रेजुएट हैमटोर देबबर्मा ने कॉर्पोरेट नौकरी के बजाय Uber Black ड्राइविंग को चुना. जानिए Gen Z के बदलते करियर माइंडसेट और उनकी कमाई की पूरी कहानी.

डिग्री है, नौकरी नहीं... तो क्या हुआ? 22 साल के लड़के ने पकड़ी कार और शुरू कर दी नई जिंदगी

एक दौर था जब कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद नए युवा महीनों तक घर पर बैठे रहना पसंद करते थे, लेकिन ऐसी नौकरी स्वीकार नहीं करना चाहते थे जो उनकी डिग्री के मुताबिक उन्हें ‘वर्थ इट’ न लगती हो. मसलन, अगर कोई B.Com ग्रेजुएट टैक्सी चलाता दिखाई दे, तो इसे लेकर सवाल खड़े हो जाते थे. कोई रिश्तेदार पूछता, “बेटा, आजकल क्या कर रहे हो?” तो शायद ही कोई गर्व से कहता कि वह ड्राइविंग कर रहा है.

छोटे-मोटे काम, ड्राइविंग या वेट्रेस जैसी नौकरियों को अच्छे घरों के बेटे-बेटियों के लिए लंबे समय तक कमतर समझा जाता रहा. इस सोच के लिए हम अक्सर समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं. नौकरी के साथ एक अच्छा पद, ऑफिस और संभव हो तो विजिटिंग कार्ड होना भी कभी स्टेटस का हिस्सा माना जाता था.

लेकिन Gen Z के दौर में यह सोच कुछ बदलती हुई दिखाई दे रही है. Gen Z को कई चीजों के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा है बार-बार नौकरी बदलना, धैर्य की कमी, काम के पुराने तरीकों को स्वीकार न करना और ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी की मांग करना. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में इस पीढ़ी ने एक बात काफी अच्छी तरह समझी है कि कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता.

Gen Z के लिए नौकरी का मतलब सिर्फ किसी बड़े ऑफिस में बैठना नहीं है. अगर कोई काम पैसे देता है, नई चीजें सिखाता है या व्यक्ति को अपने पसंद के करियर की दिशा में आगे बढ़ने की आजादी देता है, तो उसमें शर्मिंदगी जैसी कोई बात नहीं है. सवाल यह है कि वह काम व्यक्ति के लिए कितना मायने रखता है.

शायद इसी बदलती सोच को 22 साल के B.Com ग्रेजुएट हैमटोर देबबर्मा की कहानी भी दिखाती है. वह बेंगलुरु में Uber Black चलाते हैं. साथ ही उन्होंने कंटेंट क्रिएशन शुरू किया है और एंटरप्रेन्योरशिप में भी उनकी दिलचस्पी है. कॉलेज के बाद वह किसी कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी तलाश सकते थे, लेकिन उन्होंने इसके बजाय ड्राइविंग को चुना.

उनकी डेली लाइफ से जुड़े वीडियो को लाखों लोगों ने देखा है. सबसे ज्यादा चर्चा उस स्क्रीनशॉट की हुई जिसमें उन्होंने बताया कि एक हफ्ते में उनकी करीब 46 हजार रुपये की कमाई हुई. हालांकि, देबबर्मा की कहानी सिर्फ इस कमाई के आंकड़े तक सीमित नहीं है. असल दिलचस्पी इस बात में है कि आखिर एक ग्रेजुएट ने ड्राइविंग को अपना काम क्यों चुना?

एक ग्रेजुएट को ड्राइविंग क्यों नहीं करनी चाहिए?

जब देबबर्मा से पूछा गया कि क्या उन्हें इस जॉब प्रोफाइल को अपनाने में किसी तरह की झिझक महसूस हुई, तो उनका जवाब साफ था—नहीं. इंडिया टुडे डिजिटल से बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा प्रोफेशन चुनने में कोई परेशानी नहीं लगती, जिसे वह वास्तव में पसंद करते हैं.

देबबर्मा को बचपन से ही कारों और ड्राइविंग में रुचि रही है. जब उन्हें Uber Black चलाने का मौका मिला, तो वह इसे अनुभव करना चाहते थे. उनके फैसले के पीछे न तो नौकरी की कमी थी और न ही कॉर्पोरेट दुनिया से किसी तरह की नाराजगी. वह सिर्फ उस चीज को आजमाना चाहते थे, जिसमें उनकी दिलचस्पी थी.

शायद यही उनकी कहानी का सबसे अहम हिस्सा है. अक्सर समाज में यह धारणा बनी रहती है कि अगर किसी के पास डिग्री है, तो उसे उसी डिग्री से जुड़ी नौकरी करनी चाहिए. ऐसे में सवाल उठता है कि “डिग्री होने के बावजूद वह गाड़ी क्यों चला रहा है?”

देबबर्मा ने भी ऐसे सवाल सुने हैं. उनका कहना है कि ज्यादातर लोग मानते हैं कि कॉलेज की पढ़ाई पूरी होते ही किसी कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी शुरू कर देनी चाहिए. लेकिन वह मानते हैं कि हर व्यक्ति के लिए एक ही करियर रास्ता सही नहीं हो सकता.

उनसे अक्सर पूछा जाता है कि डिग्री हासिल करने के बाद भी वह ड्राइविंग क्यों कर रहे हैं. वह इसे नकारात्मक नजरिए से नहीं देखते. उनके लिए यह जिंदगी का ऐसा दौर है, जिसमें वह नए लोगों से मिल सकते हैं, खुद को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं और यह जान सकते हैं कि भविष्य में वास्तव में क्या करना चाहते हैं. वह अपने मौजूदा फैसलों से संतुष्ट हैं.

देबबर्मा का ऑफिस चार पहियों पर है?

देबबर्मा की रोजमर्रा की जिंदगी किसी ग्लैमरस ऑफिस लाइफ जैसी नहीं है. वह काम के लिए तैयार होते हैं और बाकी लोगों की तरह सड़क पर निकल जाते हैं. इसके बाद शुरू होती है हर दिन की एक नई कहानी.

एक राइड बेहद छोटी और शांत हो सकती है, जबकि अगली राइड में उनकी मुलाकात किसी बड़े कारोबारी या एंटरप्रेन्योर से हो सकती है. हर सफर अलग होता है और यही चीज उन्हें इस काम में पसंद आती है.

उनके मुताबिक, दिन की शुरुआत इस अनिश्चितता के साथ होती है कि आज किस तरह के व्यक्ति से मुलाकात होगी. लगातार बदलता वर्कस्पेस उन्हें अलग-अलग लोगों से मिलने और उनसे सीखने का अवसर देता है.

देबबर्मा को यात्रियों से बातचीत करना और उनकी कहानियों से कुछ नया सीखना पसंद है. यानी उनके लिए ड्राइविंग केवल कमाई का जरिया नहीं है, बल्कि लोगों को समझने और अनुभव हासिल करने का माध्यम भी है.

राइड खत्म करने के बाद वह अपने दिन के दूसरे हिस्से में कंटेंट क्रिएशन और अपनी दूसरी रुचियों पर काम करते हैं. उनके लिए दिन का मतलब सिर्फ गाड़ी चलाना, पैसे कमाना और घर लौटना नहीं है. इसमें लोगों से मिलना, कुछ नया सीखना और अपनी दिशा को समझना भी शामिल है.

क्या 46 हजार रुपये की कमाई ही पूरी कहानी है?

देबबर्मा का वायरल वीडियो जिस वजह से चर्चा में आया, उसमें उनकी करीब 46 हजार रुपये की साप्ताहिक कमाई भी शामिल थी. 22 साल की उम्र में Uber Black ड्राइवर के तौर पर इतनी कमाई का आंकड़ा स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान खींचता है.

हालांकि, देबबर्मा खुद अपनी कहानी को सिर्फ कमाई के आंकड़े से जोड़कर नहीं देखते. उनकी आय इस बात पर निर्भर करती है कि वह किस तरह की और कितनी लंबी राइड करते हैं. उनके लिए कमाई के साथ-साथ फ्लेक्सिबिलिटी, नए लोगों से मुलाकात और नए अनुभव भी महत्वपूर्ण हैं.

उन्होंने एक यादगार अनुभव भी साझा किया. एक बार उनकी मुलाकात एक पादरी थॉमस से हुई, जिन्होंने गाड़ी से उतरने से पहले उनके भविष्य के लिए प्रार्थना की. देबबर्मा के लिए यह एक छोटा-सा पल था, लेकिन वह आज भी उसे याद करते हैं.

अब तक उनका Uber Black चलाने का अनुभव भी ज्यादातर अच्छा रहा है. कुछ दिन थकाने वाले होते हैं और कुछ राइड्स उम्मीद के मुताबिक नहीं जातीं, लेकिन फिलहाल उन्हें अपने फैसले पर पछतावा नहीं है.

क्या यह सिर्फ 22 साल के एक युवक की कहानी है?

देबबर्मा अकेले ऐसे युवा नहीं हैं जिन्होंने करियर के पारंपरिक रास्ते से अलग जाकर ड्राइविंग को चुना है. 22 साल के रुद्र के पास BCA की डिग्री है और वह नोएडा में फाइनेंस कंसल्टेंट के रूप में काम कर चुके हैं. लेकिन रोजाना 10 से 12 घंटे काम करने के बावजूद उन्हें मिलने वाली सैलरी दिल्ली-NCR में रहने के खर्च के हिसाब से पर्याप्त नहीं लगती थी. इसके बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी.

शुरुआत में उन्होंने अपने परिवार को भी नहीं बताया कि उन्होंने ड्राइविंग शुरू कर दी है. अब उनका रोज करीब 5 हजार रुपये कमाने का लक्ष्य रहता है और उनका कहना है कि समय के साथ परिवार भी उनके फैसले को समझने और सपोर्ट करने लगा है.

फिर कहानी में भावना आती हैं, जो दो साल से ज्यादा समय से कैब चला रही हैं. उन्होंने शुरुआत में सिर्फ इसलिए ड्राइविंग सीखी थी क्योंकि वह यह स्किल सीखना चाहती थीं. पहली बार सड़क पर निकलते समय वह नर्वस थीं और उनमें आत्मविश्वास की कमी थी.

उनके पति, बच्चों और भरोसेमंद लोगों ने उन्हें इसे आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया. आज वह कहती हैं कि प्रोफेशनल ड्राइविंग को लेकर उन्हें किसी तरह की झिझक नहीं है. बल्कि इस काम ने उनका आत्मविश्वास और बढ़ाया है.

शायद पुरानी कही गई बात आज भी उतनी ही मायने रखती है कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता, फर्क इंसान की सोच में होता है. यह बात भारतीय समाज में लंबे समय से कही जाती रही है. लेकिन बदलते समय में जरूरत सिर्फ इसे कहने की नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी में अपनाने की भी है.

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Shivam Tiwari

Shivam Tiwari

शिवम तिवारी, जी न्यूज में डिजिटल कंटेंट राइटर हैं और पत्रकारिता में करीब 2 साल से अधिक का अनुभव रखते हैं. यूपी के प्रयागराज के रहने वाले शिवम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन किया है. खबरों की नब्ज पकड़कर उन्हें आसान और साफ भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. शिवम शिक्षा और रोजगार से जुड़े विषयों पर खास फोकस रखते हैं. इनमें स्कूल-कॉलेज एडमिशन, बोर्ड परीक्षाएं, प्रवेश परीक्षाएं, सरकारी नौकरियां, रिजल्ट, कॉम्पिटिटिव एग्जाम, करियर टिप्स, करेंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज जैसे टॉपिक्स शामिल हैं.इसके अलावा शिवम, टीचर्स, प्रोफेसर्स, एक्सपर्ट्स और करियर काउंसलर्स की सलाह के आधार पर कंटेंट तैयार करते हैं. ये IIT-JEE, NEET, GATE, CLAT और CUET जैसे नेशनल लेवल एंट्रेंस एग्जाम से जुड़े विषयों पर गहराई से काम करते हैं और छात्रों के लिए उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराते हैं. शिवम तिवारीर से संपर्क करने के लिए आप उन्हें shivam.tiwari@india.com पर ईमेल कर सकते हैं.
Read More