SOCIAL MEDIA

Newsletter

PARTNER SITES
Select language

चीन को घेरने का महाप्लान: भारत में मिसाइल टेस्ट करेगा जापान! DNA में जानिए SHIELD सिस्टम की पूरी ABCD

चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरों के बीच जापान अपने अत्याधुनिक हथियारों (Type-25 एंटी-शिप मिसाइल और SHIELD ड्रोन सिस्टम) का परीक्षण भारत की ओडिशा स्थित चांदीपुर रेंज में करने की योजना बना रहा है. DNA के जरिए समझिए पूरा मामला क्या है और जापान ऐसा क्यों कर रहा है?

Written By Bhoopendra Rai
Published: Oct 29, 2026, 10:39 PM IST | Updated: Oct 29, 2026, 10:58 PM IST
Image Credit: भारत में मिसाइल टेस्ट करेगा जापान
Join

विपक्ष देश में आंदोलन से अपनी खोई जमीन तलाश रहा है. वहीं, जापान भी इन दिनों भारत में जमीन तलाश रहा है. लेकिन इसकी वजह अलग है. जिस दौर में दुनिया के देश अपनी संवेदनशील तकनीकें एक-दूसरे से छिपाने की हर मुमकिन कोशिश करते हैं, उस दौर में जापान अपने आधुनिक हथियारों का परीक्षण भारत में करने की तैयारी कर रहा है. यह जानकारी खुद जापान के थल सेना प्रमुख जनरल मासायोशी अराई ने दी है. जापान जिन हथियारों का परीक्षण भारत में करना चाहता है, उनमें से ज्यादातर वह चीन के खिलाफ अपनी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विकसित कर रहा है.

आज आपको जानना चाहिए कि चीन के खिलाफ अपनी तैयारियों को जापान भारत में ही क्यों परखना चाहता है? वे कौन-कौन से जापानी हथियार हैं, जिनका परीक्षण भारत में किए जाने की तैयारी की जा रही है? और अगर भारत अपनी टेस्टिंग रेंज जापान को मुहैया करवा रहा है, तो इससे भारत-जापान के पहले से मजबूत रणनीतिक संबंध कैसे और ज्यादा मजबूत हो जाएंगे?

जापान की तैयारी और उत्तर कोरिया का मिसाइल अटैक

जिस वक्त जापान अपनी सुरक्षा के लिए तैयार किए जा रहे हथियारों का परीक्षण भारत में करने की तैयारी कर रहा है, उसी वक्त उत्तर कोरिया ने 10 से ज्यादा मिसाइलें जापान सागर के पास लॉन्च की हैं. इससे जापान की प्रधानमंत्री को इमरजेंसी अलर्ट जारी करना पड़ गया. आज आपको यह भी समझना चाहिए कि कुछ दिन पहले चीन से लौटकर आए किम जोंग जापान के पास मिसाइलें क्यों दाग रहे हैं. लेकिन पहले आपके लिए जानना जरूरी है कि जापानी हथियारों की भारत में टेस्टिंग की पूरी योजना क्या है.

चांदीपुर टेस्ट रेंज पर जापानी सेना की नजर

जापान भविष्य में अपनी सुरक्षा के लिए सबसे अहम हथियारों का परीक्षण भारत में करने के लिए रेंज तलाश रहा है. जापान के थल सेना प्रमुख जनरल मासायोशी अराई के मुताबिक, इसके लिए जापानी अधिकारियों की एक टीम इसी महीने भारत आई थी. जापानी अधिकारियों ने भारत में करीब एक सप्ताह तक कई संभावित टेस्टिंग रेंज का निरीक्षण किया है. फिलहाल भारत में ओडिशा के चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज को जापान के लिए अच्छा विकल्प माना जा रहा है.

तटीय सुरक्षा के लिए हाई-टेक SHIELD सिस्टम

जापान, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों से सुरक्षा के लिए एक हाई-टेक तटीय सुरक्षा प्रणाली तैयार कर रहा है, जो इन देशों की तरफ से आने वाले खतरों को काउंटर कर सके. SHIELD नाम की सुरक्षा प्रणाली में जापान सैनिकों की जगह सस्ते लेकिन सटीक ड्रोन्स को बहुत बड़ी संख्या में तैनात करना चाहता है. इसके अलावा जापान ने चीन की नेवी से संभावित खतरे को देखते हुए स्टेल्थ एंटी-शिप मिसाइलें भी विकसित की हैं. जापान अपने इन्हीं हथियारों की टेस्टिंग भारत में करना चाहता है. जापान के अधिकारियों ने अपने दौरे में टेस्टिंग के लिए जरूरी सुविधाओं और जगह को करीब से देखा है.

Type-25 एंटी-शिप मिसाइल की मारक क्षमता

जो प्रणाली जापान, चीन जैसी मजबूत नेवी रखने वाले देश से निपटने के लिए तैयार कर रहा है, उसकी तकनीक कितनी संवेदनशील होगी, इसे समझा जा सकता है. लेकिन जापान इसकी टेस्टिंग अपने भरोसेमंद साझेदार भारत की जमीन पर क्यों करना चाहता है, यह जानने से पहले आप उन हथियारों के बारे में जानिए, जिन्हें जापान चीन से मुकाबले के लिए तैयार कर रहा है और जिनकी टेस्टिंग भारत में करने की योजना है.

इसमें सबसे प्रमुख हथियार है जापान की एंटी-शिप मिसाइल Type-25, जिसे भविष्य में चीन के खिलाफ जापान का सबसे खतरनाक हथियार माना जा रहा है. जापान की इस एंटी-शिप मिसाइल की रेंज 1000 किलोमीटर है. जापान की यह मिसाइल जमीन से मोबाइल लॉन्चर के जरिए फायर की जाती है और समंदर में मौजूद शिप पर सटीक निशाना लगाती है. जापान की पुरानी Type-12 मिसाइल की रेंज सिर्फ 100 से 200 किलोमीटर थी, लेकिन इसका उन्नत संस्करण Type-25 कई गुना अधिक दूरी तक वार करता है.

स्टेल्थ तकनीक और इन-फ्लाइट री-टारगेटिंग

जापान की यह मिसाइल स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जिससे यह आसानी से दुश्मन के रडार की पकड़ में नहीं आती और चुपचाप अपने लक्ष्य तक पहुंच सकती है. एक बार इसे लॉन्च करने के बाद अगर दुश्मन का जहाज समंदर में अपनी जगह बदल भी लेता है, तो जापान की Type-25 मिसाइल को चलते हुए रास्ते में नया टारगेट दिया जा सकता है. यानी इससे बचना बहुत मुश्किल है और चीन भी इसकी तैनाती पर नाराजगी जता चुका है. जापान ने इसी साल इसे कुमामोटो क्षेत्र में तैनात किया है. यह इलाका दक्षिण-पश्चिमी चीन और ताइवान के पास के समुद्री क्षेत्रों पर नजर रखने के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है.

भारत में ऑपरेशनल ट्रेनिंग की योजना

जापान की योजना इस मिसाइल को चीन के खिलाफ इतनी बड़ी संख्या में तैनात करने की है, जिससे दुश्मन अपने नुकसान के बारे में सोचकर हमला करने की हिम्मत ही न कर पाए. आप सोच रहे होंगे कि अगर जापान ने इस मिसाइल को मोर्चे पर तैनात ही कर दिया है, तो भारत में वह किस चीज का टेस्ट करना चाहता है? आज आपको यह बात भी समझनी चाहिए.

जापान भारत में अपने सैनिकों को इस मिसाइल की ऑपरेशनल ट्रेनिंग देना चाहता है. मतलब इस सिस्टम का पूरी क्षमता के साथ कैसे इस्तेमाल करना है, जापान इसका अभ्यास भारत में करना चाहता है. जापान के सैनिक भारत की टेस्टिंग रेंज में इस मिसाइल को फायर करेंगे, इसकी स्टेल्थ क्षमता को जांचेंगे. इस मिसाइल की रेंज को परखेंगे और उड़ान के दौरान टारगेट को चेंज करके भी देखेंगे. जापान असली युद्ध की तरह यह भी परखेगा कि मिसाइल अपने तय लक्ष्य को कितनी सटीकता से खत्म कर पा रही है. ऐसे टेस्ट के लिए भारत के पूर्वी तट यानी बंगाल की खाड़ी पर लंबे, कम आबादी वाले और नियंत्रित समुद्री फायरिंग जोन उपलब्ध हैं.

तीन स्तरों वाला मानवरहित सुरक्षा कवच

जापान एक और अहम टेस्ट भारत में करना चाहता है, यह है SHIELD सिस्टम के ड्रोन. आज आपको तटों की सुरक्षा के लिए बनाए जा रहे जापान के SHIELD सिस्टम की ताकत और जरूरत को भी समझना चाहिए. 'SHIELD' जापान द्वारा बनाई जा रही एक ड्रोन-आधारित आधुनिक और हाई-टेक तटीय सुरक्षा प्रणाली है. सीधे शब्दों में कहें तो, यह जापान के समुद्र तटों की सुरक्षा के लिए एक डिजिटल और मानवरहित 'सुरक्षा कवच' है.

इस प्रणाली में जापान सैनिकों की जगह ड्रोन्स का इस्तेमाल करेगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम कम होगा और कम खर्च में बड़ी सुरक्षा मिलेगी. यह सिस्टम सिर्फ हवा या जमीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें तीन स्तरों पर काम करने वाले ड्रोन शामिल होंगे: पहले, हवा में उड़ने वाले ड्रोन जो सुसाइड अटैक और निगरानी का काम करेंगे. दूसरे, समुद्र की सतह पर चलने वाले ड्रोन जो सीधे टक्कर मारकर दुश्मन के शिप को खत्म करेंगे. तीसरे, पानी के अंदर पनडुब्बी की तरह चलने वाले अंडरवाटर ड्रोन जो निगरानी के साथ-साथ हमला भी करेंगे.

नेटवर्क इंटीग्रेशन और त्वरित एक्शन

जापान अपने SHIELD सिस्टम में इन सभी ड्रोन्स को सेंसर और नेटवर्क से जोड़ रहा है. यानी निगरानी करने वाले ड्रोन्स खतरे का सिग्नल भेजेंगे, फिर जरूरत के हिसाब से टारगेट को खत्म करने के लिए ड्रोन या मिसाइल को भेजा जाएगा. जापान भविष्य में अपनी सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण SHIELD सिस्टम को भी भारत में परखना चाहता है. इसका सबसे बड़ा कारण चीन है, जो भारत और जापान के लिए साझा खतरा है. इसके अलावा जापान के लिए भारत में हथियारों का परीक्षण चीन से तकनीक छिपाने में भी मददगार होगा.

चीनी जासूसी जहाजों से सुरक्षित दूरी

चीन के करीब होने की वजह से जापान के घरेलू परीक्षणों की आसानी से निगरानी की जा सकती है. चीन से जापान की समुद्री सीमा सिर्फ 409 किलोमीटर दूर है. चीन, जापान के आसपास नियमित रूप से अपने उन्नत रिसर्च जहाज भेजता है, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस की क्षमता होती है. जापान की निगरानी के लिए लगाए गए चीन के ये जहाज पूर्वी चीन सागर में सक्रिय रहते हैं. लेकिन भारत के पूर्वी तट तक चीन के जासूसी जहाज आसानी से नहीं पहुंच सकते. इससे टेस्ट की जाने वाली जापानी मिसाइल की वास्तविक रेंज, इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर और दूसरे संवेदनशील डेटा की करीबी निगरानी मुश्किल हो जाती है.

चांदीपुर रेंज और रणनीतिक सुरक्षा

भारत की चांदीपुर जैसी रेंज में पहले से ट्रैकिंग और सुरक्षा ढांचा मौजूद है. परीक्षण भारत के नियंत्रण वाले क्षेत्र में होने से जापान को ज्यादा ऑपरेशनल सिक्योरिटी मिल सकती है. इसके अलावा घनी आबादी वाले जापान में इतनी लंबी दूरी के टेस्टिंग रेंज मौजूद नहीं हैं, जिसमें चीन से छिपकर सुरक्षित ऑपरेशनल परीक्षण किए जा सकें. इसीलिए जापान के अधिकारी भारत में हथियारों का परीक्षण करने की योजना पर काम कर रहे हैं. क्योंकि जिस चीन के खिलाफ जापान यह पूरी तैयारी कर रहा है, अगर उसे ही जापानी हथियारों की पूरी जानकारी मिल गई तो चीन इसका जवाब तैयार रखेगा. आज आपको समझना चाहिए कि भारत और जापान एक-दूसरे पर इतना भरोसा क्यों करते हैं, कि इतनी महत्वपूर्ण तकनीक एक-दूसरे से साझा करने में दोनों देशों को कोई संकोच नहीं है.

फिलीपींस में रक्षा मंत्रियों की अहम बैठक

फिलीपींस के सेबू में 13वें ASEAN देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक थी. इसके साइडलाइन में भारत और जापान के रक्षा मंत्री जिस गर्मजोशी और दोस्ताना माहौल में मिले, उसे देखकर समझना मुश्किल नहीं कि जापान और भारत एक-दूसरे पर इतना भरोसा क्यों करते हैं. यह मुलाकात सिर्फ औपचारिकता नहीं थी. इस मुलाकात में दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत करने पर चर्चा हुई.

मेक इन इंडिया और यूनिकॉर्न एंटीना तकनीक

फिलहाल समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए जापान की अत्याधुनिक तकनीक और भारत की विशाल उत्पादन क्षमता मिलकर काम कर रही हैं. जापान अपनी उन्नत 'यूनिकॉर्न' एंटीना तकनीक भारत को ट्रांसफर कर रहा है. हाल ही में 'वीर गार्जियन 26' युद्धाभ्यास के तहत इतिहास में पहली बार जापानी फाइटर जेट भारत आए. भारत सरकार की 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत दोनों देश मिलकर रक्षा उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं. चीन के बढ़ते दखल के बीच, दोनों देश 'क्वाड' देशों के साथ मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र को पूरी तरह सुरक्षित और खुला रखने की जोरदार वकालत करते हैं. जापान ने अपने आधिकारिक रक्षा दस्तावेज में भारत को एक अत्यंत महत्वपूर्ण देश बताया है.

JAI की तिकड़ी और उत्तर कोरिया की हलचल

फिलीपींस के सेबू में इस दोस्ती का तीसरा सिरा भी दिखा. जिस क्वाड को चीन अपने खिलाफ बनाया गया समूह समझता है, उसमें भारत और जापान के सहयोगी ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस भी अपने भारतीय और जापानी समकक्षों से मिले. इनकी केमिस्ट्री देखकर ऐसा लगा जैसे तीन पक्के दोस्त कई दिनों बाद मिले हों. इस मुलाकात की फोटो शेयर करते हुए भारतीय रक्षा मंत्री ने “JAI यानी Japan, Australia, India” की मजबूत दोस्ती का संदेश दिया.

एक तरफ फिलीपींस में भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया की दोस्ती मजबूत हो रही थी, दूसरी तरफ उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग जापान सागर में मिसाइलों की बारिश कर रहे थे. उत्तर कोरिया ने आज जापान की तरफ 10 से ज्यादा शॉर्ट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. वॉनसॉन इलाके से लॉन्च हुईं ये मिसाइलें लगभग 250 किलोमीटर उड़ीं. जापान कोस्ट गार्ड ने जहाजों को सतर्क रहने को कहा और जापानी प्रधानमंत्री ने इसे इमरजेंसी बताया. यह उत्तर कोरिया का इस साल का 17वां लॉन्च था.

जापान का कड़ा राजनयिक विरोध

जापान के कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा: "इन बैलिस्टिक मिसाइलों का लॉन्च जापानी नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है. इस मिसाइल प्रक्षेपण के जवाब में जापान ने बीजिंग में राजनयिक माध्यमों के जरिए उत्तर कोरिया के समक्ष कड़ा विरोध दर्ज कराया है."

जापान भी इस वक्त बड़े खतरों से जूझ रहा है. उसके सामने चीन और उत्तर कोरिया जैसे दुश्मन हैं. इसीलिए उसे भारत जैसा भरोसेमंद साझेदार चाहिए. आज भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के रक्षा मंत्रियों ने फिलीपींस में जो एकजुटता दिखाई है, उस पर भी दुनिया की नजर गई होगी. भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस दौरान 'जय' का संदेश दिया. इस संदेश का मतलब क्या है और किसके लिए है, हमारे विश्लेषण को देखने के बाद आप समझ गए होंगे.

ये भी पढ़ें: डिजिटल अरेस्ट से ठगी पर SC की कड़ी फटकार: अब बैंक और WhatsApp लेंगे जिम्मेदारी? पीड़ितों को मिलेगा मुआवजा!

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
Read More

ZEENEWS TRENDING STORIES