App

अब सोने में पैसा लगाना हुआ मुश्किल, त्योहारों के मजे पर फिरेगा पानी, जानिए क्यों अचानक बंद करनी पड़ी गोल्ड फंड्स की नई SIP!

पिछले कुछ वर्षों के दौरान सोना न सिर्फ़ आभूषण के लिए बल्कि निवेश का भी एक बड़ा ज़रिया बन गया है. खास तौर पर गोल्ड ETF यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड सोने में इन्वेस्टमेंट का एक पसंदीदा तरीक़ा बन चुका है. लेकिन गोल्ड ETF में म्यूचुअल फंड के ज़रिए निवेश पर फिलहाल ब्रेक लग गया है.

अब सोने में पैसा लगाना हुआ मुश्किल, त्योहारों के मजे पर फिरेगा पानी, जानिए क्यों अचानक बंद करनी पड़ी गोल्ड फंड्स की नई SIP!
Image Credit: गोल्ड फंड्स की नई SIP पर लगा बैन

देश की कई प्रमुख म्यूचुअल फंड कंपनियों ने अपने गोल्ड ETF के फंड ऑफ फंड्स में नए निवेश पर अस्थायी रोक लगा दी है. इसका ये मतलब है कि म्यूचुअल फंड कंपनियों ने गोल्ड फंड ऑफ फंड्स में नया पैसा लेना फिलहाल बंद कर दिया है. यानी वो अब निवेशकों का पैसा गोल्ड ETF में नहीं लगाएंगी. इन कंपनियों में टाटा म्यूचुअल फंड, HDFC, एक्सिस और ICICI प्रूडेंशियल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.

आपको जानना चाहिए कि गोल्ड ETF में पैसा लेने पर ये रोक अचानक क्यों लगानी पड़ी, इसका मक़सद क्या है और इससे सोने की क़ीमत पर क्या प्रभाव पड़ेगा. लेकिन पहले जानिए कि पूरा फैसला क्या है. अलग-अलग म्यूचुअल फंड कंपनियों की तरफ से कहा गया है कि गोल्ड ETF में लोग एकमुश्त निवेश नहीं कर सकेंगे. साथ ही नई SIP का रजिस्ट्रेशन भी नहीं होगा. इसके अलावा मौजूदा SIP में निवेशक टॉप अप यानी एक बार में ज्यादा पैसा नहीं लगा सकेंगे.

क्या पूरी तरह खत्म हो गई है SIP

लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि इसे पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अगर पहले से कोई SIP चल रही है तो वो चलती रहेगी. उसके ज़रिए आप पैसा लगा सकेंगे. साथ ही शेयर बाज़ार में जिन गोल्ड ETF की खरीद-बिक्री होती है, उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है. ETF से पैसा निकालने यानी रिडेम्पशन पर भी कोई रोक नहीं है.

गोल्ड ETF के जरिए सोने में निवेश हर साल लगातार बढ़ता जा रहा है. दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी युद्ध और अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता के बीच लोग सुरक्षित निवेश के लिए सोने में पैसा लगा रहे हैं. सोने में लगने वाले इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा गोल्ड ETF में जा रहा है.

2025 में निवेशकों ने गोल्ड ETF में 42,961 करोड़ रुपये लगाए. वहीं इस साल सितंबर तक 45,925 करोड़ रुपये गोल्ड ETF में लगाए जा चुके हैं. यानी पिछले साल का रिकॉर्ड सितंबर में ही टूट चुका है. निवेश में लगातार बढ़ोतरी और सोने की बढ़ती कीमतों के कारण गोल्ड ETF कंपनियों के पास जमा कुल पैसा सितंबर तक 1,86,310 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. ये 2 साल पहले की तुलना में 4 गुना है.

सेबी के निर्देशों पर लिया गया फैसला

गोल्ड ETF में निवेश को लेकर ये फैसला दशहरा और दिवाली से ठीक पहले लिया गया है. त्योहारों के दौरान आमतौर पर सोने की मांग बढ़ जाती है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ गोल्ड ETF में निवेश पर रोक का फ़ैसला सेबी के निर्देशों के तहत लिया गया है. लेकिन इसकी कोई वजह नहीं बताई गई है. माना जा रहा है कि ये रुपये को संभालने की कोशिश है.

ईरान संकट का फिलहाल कोई समाधान नहीं निकल रहा है. ऊपर से सऊदी अरब-हूती के बीच एक नया मोर्चा खुल गया है. इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमत पर पड़ा है. महंगा कच्चा तेल देश के आयात बिल को बढ़ाता है. महंगे दाम पर तेल ख़रीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करना पड़ता है. इससे रुपये पर दबाव बढ़ता है.

ऐसे में अगर सोना खरीदने के लिए भी डॉलर खर्च करना होगा तो रुपया और कमजोर होगा. भारत सोने के लिए काफी हद तक विदेशों से आयात पर निर्भर है. गोल्ड ETF में पैसा लगाने पर उतनी ही कीमत का गोल्ड आयात करना पड़ता है. यानी इस पर विदेशी मुद्रा खर्च करना पड़ता है.

सोने के आयात पर देश करता है भारी खर्च

2025-26 में भारत ने सोने के आयात पर करीब 72 अरब डॉलर यानी 6 लाख 80 हजार करोड़ के आसपास खर्च किया था. युद्ध की अनिश्चितता के बीच सोने के आयात पर इतना ज़्यादा खर्च भारत के व्यापार घाटे को बढ़ा रहा था. यही वजह है कि कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री ने भी लोगों से सोना नहीं ख़रीदने की अपील की थी. सरकार ने सोने के आयात को कम करने के लिए उस पर आयात टैक्स भी ढाई गुना कर दिया था. इसका असर भी देखा गया है.

मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में भारत में सोने के आयात में 27% की कमी आई है. सितंबर महीने में तो सोने के आयात में एक साल पहले की तुलना में 81% की कमी आई है. पिछले साल अप्रैल से सितंबर के बीच सोने के आयात पर 27 अरब डॉलर यानी ढाई लाख करोड़ रुपये के क़रीब खर्च हुए थे. वहीं इस साल अप्रैल से सितंबर के बीच ये घटकर 19 अरब डॉलर यानी लगभग 1 लाख 80 हज़ार करोड़ रुपये रह गया है.

विदेशी मुद्रा बचाने के लिए कवायद

यानी महंगे दाम की वजह से लोगों ने सोना खरीदना कम कर दिया है. माना जा रहा है कि गोल्ड ETF पर अस्थायी रोक लगाने के बाद सोने के आयात में और भी कमी आएगी. त्योहारों के दौरान गोल्ड ETF में पैसा नहीं लगाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी. हालांकि कुछ जानकारों का ये भी कहना है कि इस फ़ैसले के बाद लोग ETF में पैसा लगाने के बदले फिज़िकल गोल्ड खरीदेंगे. इससे सोने का आयात कम नहीं होगा. लेकिन इसका असर कितना बड़ा होगा, इसके लिए कुछ हफ़्तों का इंतज़ार करना होगा.
 

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:

About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
Read More