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ट्रंप की हार की बौखलाहट: ईरान को लेकर दी खुली चेतावनी, तेल कारोबार में मदद के आरोप में भारतीय कंपनियों पर बैन!

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में शिकस्त झेलने के बाद भी डॉनल्ड ट्रंप के आक्रामक तेवरों में कोई कमी नहीं आई है. एक तरफ ट्रंप और उनकी टीम मान रही है कि ईरान से जंग, बढ़ती महंगाई और तेल की कीमतों ने उन्हें सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया, तो दूसरी तरफ वे दोबारा मौका मिलने पर फिर से ईरान पर बमबारी की खुली चेतावनी दे रहे हैं.

Written By Bhoopendra Rai
Published: Nov 05, 2026, 10:16 PM IST | Updated: Nov 05, 2026, 10:21 PM IST
Image Credit: ट्रंप की हार की बौखलाहट
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मिडटर्म चुनाव हारने के बाद ट्रंप जिस तरह के संकेत दे रहे हैं, उससे यही लगता है कि वो हारकर भी दुनिया को चैन से जीने नहीं देंगे. एक तरफ डॉनल्ड ट्रंप मान रहे हैं कि उनकी हार के लिए ईरान वॉर ही जिम्मेदार है, दूसरी तरफ उन्होंने संकेत दिए हैं कि ईरान पर खतरा कम नहीं हुआ है. अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक दिन पहले ही ईरान वॉर को हार का कारण बताया था. जब मीडिया ने इस पर ट्रंप से प्रतिक्रिया मांगी तो ट्रंप ने क्या जवाब दिया, ये आपको बहुत ध्यान से सुनना चाहिए.

ट्रंप एक तरफ मान रहे हैं कि ईरान वॉर की वजह से महंगाई बढ़ी, तेल के दाम बढ़े और वो चुनाव हार गए, लेकिन दूसरी तरफ कह रहे हैं कि दोबारा मौका मिला, तो भी ईरान पर हमले का फैसला लेंगे. मतलब ट्रंप नहीं सुधरेंगे. इसके अलावा ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने परमाणु हथियार हासिल कर लिए तो भविष्य में दुनिया के मौजूदा हालात और अस्तित्व पर ही खतरा पैदा हो सकता है. यानी ट्रंप ने संकेत दे दिया है कि ईरान से परमाणु बम बनाने से जुड़ी कोई सूचना मिली तो ईरान पर फिर हमला शुरू हो सकता है. फिलहाल मिडिल ईस्ट से ईरानी परमाणु बम से जुड़ी दो खबरें आ रही हैं.

मस्जिदों से एटम बम की मांग और पिकैक्स माउंटेन पर हलचल

एक तरफ ईरान की मस्जिदों में कट्टरपंथियों ने परमाणु बम बनाने की मांग शुरू कर दी है. दूसरी तरफ इजरायल से अमेरिका को खुफिया सूचना दी जा रही है कि ईरान ने पिकैक्स माउंटेन पर फिर से यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू कर दिया है और इन खबरों के साथ जब दुनिया ट्रंप के बयान को जोड़कर देखती है तो ट्रंप की हार के बाद दिख रहे अच्छे दिन कुछ पलों के मेहमान नजर आते हैं. आज आपको जानना चाहिए कि ईरान की मस्जिदों से वो कौन सी मांग हो रही है, जिससे ट्रंप भड़क सकते हैं.

फातवे के खिलाफ आवाजें और नए सुप्रीम लीडर की चुप्पी

ईरान की मस्जिदों और धार्मिक आयोजनों में अब खुलकर यह मांग उठने लगी है कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनाने चाहिए. पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने परमाणु हथियार बनाने पर फतवे के जरिए प्रतिबंध लगाया था, लेकिन अब देश में इसके खिलाफ आवाजें उठने लगी हैं. अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग और अमेरिकी हमलों में अली खामेनेई की मौत के बाद जनता और नेताओं की सोच में बड़ा बदलाव आया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो अमेरिका उन पर बमबारी करने से पहले कई बार सोचता. इस बयान ने ईरान में परमाणु बम की बहस को और हवा दी. ईरान के कई नेता और सुरक्षा अधिकारी अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार संधि से बाहर निकलने की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने परमाणु बम पर अपना रुख अभी स्पष्ट नहीं किया है.

पेजेश्कियान का शांति का दावा और नए हमले की आशंका

मोजतबा का रुख साफ नहीं है, लेकिन ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान अब तक यही दोहराते आए हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए ही सीमित रहेगा. दूसरी तरफ विशेषज्ञ राय जाहिर कर रहे हैं कि कट्टरपंथियों का दबाव बढ़ा तो ईरान की इस नीति में बदलाव हो सकता है और इसीलिए अमेरिका में नई कांग्रेस के काम संभालने से पहले ईरान पर बड़े हमले की आशंका कम नहीं हुई है. एक तरफ ट्रंप हार के लिए ईरान वॉर को जिम्मेदार बता रहे हैं, दूसरी तरफ उनका प्रशासन भारत समेत कुछ दूसरे देशों की कंपनियों को ईरान की मदद करने का आरोप लगाकर प्रतिबंधित कर रहा है.

ईरानी तेल कारोबार में मदद के आरोप में भारत पर एक्शन

चुनाव में हार के बाद बौखलाए ट्रंप प्रशासन ने भारत और तुर्किए की कंपनियों पर कार्रवाई की है. अमेरिका की तरफ से कहा गया कि जिन कंपनियों पर कार्रवाई की गई उन्होंने तेल कारोबार में ईरान की मदद की. यानी ईरान की मदद के आरोप में अमेरिका ने भारत और तुर्किए की कंपनियों पर एक्शन लिया है.

चंडीगढ़ के कारोबारी और 9 संस्थाओं पर कसा शिकंजा

अमेरिका ने ईरान की मदद का आरोप लगाकर भारत के चार नागरिकों और उनसे जुड़ी 9 संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं. इनमें चंडीगढ़ के कारोबारी सुनील कुमार शर्मा और उनकी पत्नी जसप्रीत प्रीति शामिल हैं. इसके अलावा दो भारतीय नागरिक अश्वनी कुमार धीमान और इशविंदर सिंह हैं, जो सुनील शर्मा से जुड़ी इन कंपनियों के प्रमुख बताए गए हैं.

फर्जी रजिस्ट्रेशन का खेल और तुर्किये की कंपनी पर गाज

अमेरिका का आरोप है कि इस नेटवर्क ने गुयाना और लाओस जैसे देशों के नाम पर फर्जी जहाज रजिस्ट्रेशन और प्रमाणपत्र जारी किए. इससे ईरानी तेल ले जाने वाले प्रतिबंधित जहाज अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचकर अपना कारोबार जारी रख सके. भारत के अलावा तुर्किये की फुगो ग्राउंड सर्विसेज कंपनी पर भी ईरान की प्रतिबंधित एयरलाइंस को सेवाएं देने के आरोप में कार्रवाई हुई है. फिलहाल ये अमेरिका के आरोप हैं. इस पर भारत सरकार या कंपनी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन इसे ट्रंप की हार की बौखलाहट से जोड़कर देखा जा रहा है.

ये भी पढ़ें: 'जंग की वजह से हारे, यह बात अपने बॉस को क्यों नहीं बताते...' वेंस को गालिबाफ की दो टूक, बोले- ट्रंप तो फिर हमले की तैयारी में हैं
 

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पत्रकारिता में 9 साल से सक्रिय भूपेंद्र कुमार राय Zee News में सीनियर सब एडिटर के तौर पर न्यूज टीम का हिस्सा हैं, देश विदेशी की खबरें कवर करते हैं. 2017 में ETV Bharat (हैदराबाद) से करियर की शुरुआत करने के बाद वे 2020 में Zee News पहुंचे, जहां 2022 तक काम किया. 2023 में News24 की स्पोर्ट्स टीम को लीड करने का मौका मिला. इसके बाद India Daily Live में बतौर चीफ सब एडिटर स्पोर्ट्स टीम के साथ जुड़े. 2024 में दोबारा News24 लौटे और नई स्पोर्ट्स वेबसाइट लॉन्चिंग का अहम हिस्सा रहे. अक्टूबर 2025 में News24 से अलविदा लेकर एक बार फिर Zee News पहुंचे हैं. खेलों में गहरी रुचि रखते हैं और क्रिकेट वर्ल्ड कप, एशियन गेम्स, ओलंपिक गेम्स, हॉकी वर्ल्ड कप समेत बड़े खेल इवेंट को कवर करने का अनुभव है. ब्रेकिंग न्यूज, क्रिकेट एनालिसिस और किस्से-कहानियों पर अच्छी पकड़ है. जी न्यूज में खेल से जुड़ी खबरों के बाद अब न्यूज टीम के साथ रियलटाइम न्यूज पर काम कर रहे हैं. एक्सप्लेनर और किसी भी मुद्दे पर रिसर्च के साथ उसे आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचा रहे हैं. आप Bhoopendra.Rai@zeemedia.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facebook से जुड़ सकते हैं.
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