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DNA : 2000 रुपये से ज्यादा के लेन-देन पर दुकानदारों से चार्ज वसूलने वाला नियम अभी लागू नहीं हुआ है. लेकिन, दुकानों पर NO UPI के बोर्ड अभी से दिखने शुरू हो गए हैं. कई पेट्रोल पंप और CNG स्टेशन पर NO UPI के बोर्ड लगे हैं. दुकानदार कह रहे हैं कि 2000 रुपये से ज्यादा का UPI नहीं चलेगा. 2000 रुपये से अधिक का पेट्रोल-डीजल या CNG लेना है तो फिर कैश में पेमेंट करना होगा यानी आपको अपनी गाड़ी की टंकी फ्यूल से फुल करानी है तो फिर से बैंक के ATM में जाना होगा, कैश लेकर आना होगा.
₹2,000 से ऊपर के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत का शुल्क 15 अक्टूबर से लागू होने वाला है. दुकानदारों का तर्क है कि 2 हजार से ऊपर के पेमेंट पर जो चार्ज कटने वाला है उसका बोझ वो क्यों उठाएं? ऐसे में बोझ एक बार फिर आम आदमी पर आ गया है. आम आदमी के सामने एक बार फिर एटीएम मशीनों तक जाने एटीएम की लाइनों में लगने का संकट पैदा हो गया है. आम आदमी के लिए ये समस्या कितनी बड़ी है. इसे समझने से पहले आपको ये देखना चाहिए कि पिछले 10 सालों में UPI कैसे देशवासियों की आदतों में शुमार हो गया है.
मध्यप्रदेश के ग्वालियर में पेट्रोल पंप पर बोर्ड लगा दिया गया है कि दो हजार से ज्यादा का UPI पेमेंट नहीं लेंगे. एमपी के ग्वालियर से भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आ रही हैं. 2 हजार से ऊपर का तेल भरवाने पर ग्राहकों से कैश मांगा जा रहा है. पेट्रोल पंपों पर लगे ये बोर्ड अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं यानी अब मध्यप्रदेश में दो हजार से ज्यादा का पेट्रोल-डीजल भरवाना है तो कैश, डेबिट कार्ड या क्रेडिट कार्ड साथ में लेकर जाना है. ये स्थिति एमपी के इक्का दुक्का पेट्रोल पंपों की नहीं है बल्कि राज्य के करीब पांच हजार पेट्रोल पंपों पर या तो ये निमय लागू कर दिया गया है या फिर लागू होने वाला है.
मध्यप्रदेश में पेट्रोल पंप के मालिकों ने 2000 से ऊपर के यूपीआई पेमेंट लेने से इनकार कर दिया है, तो वहीं बिहार की राजधानी पटना में भी कारोबरियों ने क्यूआर कोड हटाना शुरू कर दिया है. पटना के बेली रोड में जूते और कपड़ों के शोरूम्स में UPI मशीनें पर काउंटर पर नहीं दिखाई दे रही हैं. देश के अलग-अलग शहरों से आ रही इन तस्वीरें ने आम आदमी की परेशानी बढ़ा दी है. लोगों को ये डर सता रहा है कि क्या उन्हें UPI वाली अपनी आदत बदलनी पड़ेगी. ये सवाल उठ रहा है कि क्या अगर कैश नहीं हुआ तो दुकानदार को ज्यादा पैसे चुकाने होंगे.
साल 2026 में यानी इसी साल लोगों के भुगतान के पसंदीदा तरीके को लेकर एक सर्वे किया गया. जिसमें ये पाया गया कि 57 प्रतिशत लोग UPI को प्रेफर करते हैं. 38 प्रतिशत लोग कैश से पेमेंट करना पसंद करते हैं और 5 प्रतिशत लोग अन्य पेमेंट मोड से पेमेंट करते हैं. हमारे देश में सिर्फ आम लोगों को ही कैशलेस पेमेंट की आदत नहीं लगी है. बल्कि पिछले 10 सालों में दुकानदारों ने भी इसे पूरी तरह से अपना लिया है.
लोकसभा में बताए गए आंकड़ों के मुताबिक देशभर में करीब 57 करोड़ UPI QR कोड जारी किए गए हैं. देश में करीब साढ़े 6 करोड़ ऐसे दुकानदार और व्यापारी हैं जो UPI का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, जब इन्हीं दुकानदारों से UPI पेमेंट पर लगने वाले चार्ज को लेकर सवाल किया गया तो 41% ने कहा वो अपनी जेब से ये चार्ज यानी 0.4 प्रतिशत का शुल्क नहीं भरना चाहते हैं. सर्वे में सिर्फ 17 प्रतिशत दुकानदारों ने कहा कि वो ये शुल्क चुका सकते हैं. इस सर्वे का रुझान दिखना शुरू भी हो गया है. कहीं QR कोड गायब हो गए हैं तो कहीं गायब करने की तैयारी चल रही है. ऐसे में UPI पेमेंट पर निर्भर देश की 57 प्रतिशत आबादी के लिए भविष्य में बहुत बड़ी समस्या खड़ी होने वाली है.
UPI का इस्तेमाल करने वाले लगभग 99 प्रतिशत लोग अब जेब में छुट्टा यानी एक-दो रुपये के सिक्के नहीं रखते होंगे. जेब से सिक्कों की खनक लगभग गायब हो गई है. देश में ज्यादातर लोगों ने कैश रखना या तो पूर तरह से बंद कर दिया है या फिर बहुत कम कर दिया है. अगर लोगों से ये पूछा जाए कि आखिरी बार ATM कब गए थे तो शायद वो सोच में पड़ जाएंगे.
देश में UPI इस्तेमाल करने वाले लोगों पर किए गए एक सर्वे में पता चला है कि
पिछले 10 सालों में UPI पर निर्भरता भी इतनी बढ़ गई है कि देश में ATM का नेटवर्क भी मानो स्थिर हो गया है. RBI के आंकड़े बताते हैं कि 2024 से 2026 के बीच देश में 9 हजार ATM बंद हो गए. इसी अवधि में ATM से पैसे निकालने में भी 20 प्रतिशत की गिरावट आई है. लेकिन, 15 अक्टूबर को लागू होने वाले नियम का जो रुझान अभी दिख रहा है. उससे ये संकेत मिल रहे हैं कि इस बार भी परेशानी आम आदमी को ही भुगतनी पड़ेगी. ऐसे में अगर सरकार और रिजर्व बैंक ने तुरंत QR कोड से जुड़े इस रोष को नहीं रोका, तो भारत का आम आदमी एक बार फिर उसी दौर में लौट जाएगा, जहां पेमेंट करने से पहले उसे मोबाइल नहीं, बल्कि आस-पास कोई चालू एटीएम खोजना पड़ता था.