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Share Market 2026 : शेयर बाजार को ऐसा ग्रहण लगा कि अब ये ऊपर जाने के बजाय नीचे की तरफ बढ़ रहा है. 1 लाख की तरफ जाना तो दूर, सेंसेक्स अब तेजी से 70 हजार की तरफ बढ़ रहा है. आपको जानना चाहिए कि शेयर बाजार किस तरह लोगों के लिए मुनाफे की जगह घाटे का सौदा साबित हो रहा है. बाजार में गिरावट क्यों आ रही है और ये सिलसिला कहां थमेगा? लेकिन उससे पहले आज बाजार के आंकड़ों को जानिए. आज यानी 28 सितंबर को सेंसेक्स 1,124 प्वाइंट गिरकर 72,772 पर बंद हुआ. वैसे तो शेयर बाजार पिछले कई हफ्तों से लगातार गिर रहा है. लेकिन, आज ये 6 महीने के बाद पहली बार 73,000 के नीचे बंद हुआ है यानी जिस वक़्त अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध अपने चरम पर था. इसी तरह निफ्टी भी आज 23,000 के नीचे चला गया.
बाजार में आई इस आंधी की वजह से निवेशकों के करीब साढ़े 7 लाख करोड़ रुपये डूब गए. शुक्रवार को बाजार बंद होते वक्त BSE में लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप 483 लाख करोड़ रुपए के करीब था. ये आज घटकर 475 लाख करोड़ रुपए पर आ गया. एक दिन में निवेशकों का पैसा 7 लाख करोड़ रुपये कम हो गया. ये मौजूदा वर्ष में भारत के बजट खर्च का लगभग 14% है. साथ ही ये देश के रक्षा बजट से थोड़ा सा ही कम है.
पिछले कुछ सालों के दौरान ज्यादातर लोगों के दिमाग में ये बात बैठ गई है कि शेयर बाज़ार जल्दी से पैसा कमाने का सबसे आसान जरिया है. उन्हें ये लगने लगा है कि शेयर बाजार में पैसा लगाकर वो जल्दी अमीर बन जाएंगे. हाल ये है कि लोग बैंक में फिक्स्ड डिपॉज़िट करने के बदले शेयर और म्यूचुअल फंड में पैसा लगाते हैं. आप अपने आस-पास के लोगों पर गौर कीजिएगा. पड़ोस में रहने वाले, दफ्तर में काम करने वाले और आपके दूसरे परिचित. इनमें से ज़्यादातर लोगों के पास डीमैट अकाउंट होगा जो शेयर बाजार में निवेश के लिए जरूरी है. भारत में 2022 तक 9 करोड़ डीमैट खाते थे. ये बढ़कर अब 24 करोड़ हो गए हैं. यानी 4 साल में डीमैट खातों की संख्या में करीब 166% की बढ़ोतरी हुई है.
शेयर बाजार में निवेश करने वाले अपने पास पैसा आते ही इसका एक हिस्सा डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं. वो मेहनत से जो पैसा कमाते हैं, वो शेयर बाजार में लगा देते हैं. इस उम्मीद में कि उन्हें शेयर बाजार से किसी भी दूसरे इन्वेस्टमेंट की तुलना में ज़्यादा मुनाफा मिलेगा. लेकिन, बाजार में ऐसी गिरावट चल रही है कि पैसा बढ़ने के बदले कम हो रहा है. अगर आपको पैसे की सख़्त जरूरत है, तब आपको मजबूरी में घाटा सहकर पैसा निकालना होगा क्योंकि रिटर्न निगेटिव में है. ऐसे इन्वेस्टमेंट का क्या फायदा जिसमें पैसा बढ़ने के बजाय नुक़सान उठाना पड़े. शेयर मार्केट के जानकार बाजार में आज आई गिरावट के लिए सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमत में उछाल बता रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत में क़रीब 4% का उछाल आया है. ब्रेंट का दाम आज 108 डॉलर के पार चला गया. अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण कच्चे तेल का दाम लगातार 100 डॉलर के पार बना हुआ है.
दूसरी तरफ विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से लगातार पैसा निकाल रहे हैं. विदेशी पूंजी बाहर जाने से घरेलू बाजार का सेंटिमेंट कमजोर हुआ है. साल 2026 की शुरुआत से लेकर विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से 2 लाख 45 हजार करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. बीच में जुलाई और अगस्त के महीनों में विदेशी निवेशकों ने बाजार में वापसी जरूर की थी. लेकिन, सितंबर में उन्होंने फिर पैसा निकालना शुरू कर दिया. अमेरिका में बॉन्ड पर कमाई बढ़ने से भी विदेशी निवेशक भारत से अपना पैसा निकालकर अमेरिका में लगा रहे हैं. पिछले 7 महीने से ईरान युद्ध की वजह से शेयर बाजार गिर रहा है. लेकिन, उससे पहले भी बाजार की स्थिति कुछ अच्छी नहीं थी. गिरावट का ये सिलसिला पिछले करीब दो साल से चल रहा है. दो वर्षों से शेयर बाजार में पैसे लगाने वाले अधिकतर निवेशक अपनी पूंजी गंवाने के कगार पर खड़े है.
2 साल पहले 27 सितंबर 2024 को सेंसेक्स 85,572 पर बंद हुआ था. 1 साल पहले 26 सितंबर 2025 को सेंसेक्स 80,426 पर आ गया और आज ये 72,772 पर है. यानी 2 साल में शेयर बाजार 12,800 प्वाइंट टूट गया है. इसमें 15% की गिरावट आई है. पिछले 2 साल के दौरान अगर शेयर बाजार अपनी सामान्य रफ़्तार से चलता तो सेंसेक्स 1 लाख को छू लेता या उसके क़रीब होता. लेकिन, अलग-अलग फैक्टर की वजह से बाज़ार आगे बढ़ने के बदले पीछे जा रहा है. लगातार गिरावट से अब निवेशकों का धैर्य जवाब देने लगा है. बाज़ार में पैसे लगाने वाले निवेशक परेशान हैं. चाहे वो सीधे शेयर में पैसे लगाने वाले हों या म्यूचूअल फंड खरीदने वाले. जिन लोगों ने म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश किया है, उनको भी नुकसान उठाना पड़ रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. तेल की कीमत कम नहीं हो रही और ये सेंटिमेंट पर चलने वाले शेयर बाजार को घाटे का सौदा बना रहा है.
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक सर्राफा बाजार में आज 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 4,000 रुपये से ज्यादा गिरी. अब सोने का भाव 1 लाख 48 हजार के नीचे आ गया है. वहीं, एक किलो चांदी 9,297 रुपए सस्ती होकर 2 लाख 23 हजार रुपये पर आ गई है. सितंबर में अब तक 28 दिनों में सोना करीब 8 हजार और चांदी 14 हज़ार सस्ती रुपए हुई है. वायदा बाजार में भी सोने-चांदी की कीमतों का यही हाल है.अभी तक का यही ट्रेंड रहा है कि सोने-चांदी का भाव गिरता नहीं है. सोने-चांदी को सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट माना जाता है. साल दर साल लगातार सोने-चांदी की कीमत बढ़ती रही है. 2025 में तो सोने-चांदी की कीमत ने बढ़ोतरी के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए.
सर्राफा बाजार के आंकड़ों के अनुसार 2025 में सोने की कीमतों में करीब 74% की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. वहीं चांदी का दाम 160% से अधिक उछला था. इस साल जनवरी के आखिर में सोने-चांदी का भाव अपने रिकॉर्ड लेवल पर चला गया था. 29 जनवरी को 24 कैरेट सोना 1 लाख 83 हजार प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. वहीं, चांदी की कीमत 4 लाख के पार चली गई थी. जिस रफ्तार से चांदी का दाम बढ़ रहा था, उसमें बाजार के जानकार ये अनुमान लगा रहे थे कि जल्द ही चांदी का भाव 10 लाख के पार चला जाएगा. लेकिन उस समय से अब तक सोने-चांदी के दाम में भी शेयर बाजार की तरह गिरावट आई है. सोना जनवरी की तुलना में 19% सस्ता हो गया है जबकि चांदी के दाम में करीब 45 प्रतिशत की गिरावट आई है यानी शेयर बाजार हो या सोना-चांदी- कहीं भी पैसा सुरक्षित नहीं है. आप ये मानकर नहीं चल सकते कि आपका पैसा बढ़ेगा. जानकारों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच जब तक युद्ध के हालात हैं, तब तक इस अनिश्चितता से छुटकारा नहीं मिलेगा. ऐसे में आपको मेहनत से कमाया अपना पैसा बाजार या सोना-चांदी में लगाते समय बेहद सावधान रहना चाहिए.