DNA: धनतेरस से पहले सोना ₹14 हजार और चांदी ₹47 हजार सस्ती, दिवाली पर क्यों उलटी चाल चल रहे दाम?
दिवाली और धनतेरस से पहले लोग सोना-चांदी खरीदने के लिए इसे सबसे शुभ अवसर के रूप में देखते हैं. सोने-चांदी की भारी खरीदारी का ये असर होता है कि धनतेरस से पहले के हफ्तों में अचानक सोने-चांदी की कीमत बढ़ जाती है. लेकिन, ये साल इस मायने में सबसे अलग है.
DNA: सोने-चांदी की कीमत हर साल दिवाली से पहले रॉकेट की तरह भागती है, वो इस साल बढ़ना तो दूर, बल्कि नीचे आ रही है. गिरावट का ये सिलसिला आज करवाचौथ के दिन भी जारी रहा. सोचिए, धनतेरस में अब केवल 8 दिन बचे हैं. लेकिन सोना-चांदी तब भी सस्ते हो रहे हैं.
सोने-चांदी के दाम में कितनी गिरावट आई है?
आपको जानना चाहिए कि धनतेरस से पहले एक महीने के दौरान सोने-चांदी के दाम में कितनी गिरावट आई है? इससे पहले धनतेरस के दौरान क़ीमत कितनी बढ़ती थी और सोने-चांदी की कीमतको लेकर जानकारों का क्या कहना है? लेकिन उससे पहले आपको पता होना चाहिए कि दिवाली और धनतेरस के मौक़े पर इन धातुओं की कितनी बिक्री होती है.
पिछले साल के आंकड़ों की बात करें तो धनतेरस पर कुल 1 लाख करोड़ रुपये का व्यापार हुआ. इसमें से 60 हज़ार करोड़ रुपये की ख़रीदारी सिर्फ़ सोने-चांदी की हुई. अकेले राजधानी दिल्ली में 10 हज़ार करोड़ रुपये के सोने-चांदी की बिक्री हुई थी. पिछले साल 25 टन सोना और 1,000 टन चांदी की बिक्री का अनुमान लगाया गया.
इसी भारी बिक्री का असर है कि धनतेरस से पहले सोने-चांदी की क़ीमत अपने-आप बढ़ने लगती है. इतना ही नहीं, धनतेरस के कुछ दिनों बाद देश में शादियों का सीजन भी शुरू हो जाता है. इससे सर्राफा बाज़ारों में खरीदारी और बढ़ जाती है.लेकिन, उससे पहले जान लीजिए कि इस साल धनतेरस से 8 दिन पहले सोने-चांदी की क़ीमत में कितनी गिरावट आई है.
क्या कहता है 3 महीनों का आंकड़ा?
इसके लिए पिछले 3 महीनों का आंकड़ा देख लीजिए. इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के मुताबिक 31 अगस्त को 10 ग्राम सोने की क़ीमत 1,55,835 रुपये थी. एक महीने बाद यानी 30 सितंबर को सोने की क़ीमत 1,48,379 रुपये पर पहुंच गई. और अब अक्टूबर ख़त्म होते समय सोने का भाव 1,42,144 रुपये है यानी 2 महीनों के दौरान सोना क़रीब 14 हज़ार रुपये यानी लगभग 9% सस्ता हुआ है.
वहीं, सिर्फ़ 1 महीने के दौरान सोने के दाम में 6 हज़ार रुपये यानी 4% सस्ता हुआ है और ये सस्ता भी तब हुआ है, जब दिवाली आने वाली है. सस्ता तब हुआ है, जब सरकार ने सोने पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है. सोचिए, अगर आयात शुल्क में बढ़ोतरी नहीं हुई होती तो आज के समय में दाम और कितना कम हो गया होता.
सोने से भी ज़्यादा गिरावट चांदी की क़ीमत में आई है. 31 अगस्त को 1 किलो चांदी का दाम 2,37,199 रुपये था. 30 सितंबर को ये गिरकर 2,22,273 रुपये पर पहुंच गया. वहीं अब चांदी की क़ीमत 1,90,497 रुपये है.
इस तरह 2 महीनों के दौरान चांदी क़रीब 47 हज़ार रुपये सस्ती हुई है. यानी लगभग 20%. वहीं पिछले 1 महीने में चांदी का दाम क़रीब 32 हज़ार रुपये कम हुआ है. यानी लगभग 14%. जब सोने-चांदी की ऑलटाइम क़ीमत से तुलना करेंगे तो ये गिरावट और भी ज़्यादा है. इस साल 29 जनवरी को 10 ग्राम सोने का भाव 1 लाख 76 हज़ार के पार चला गया था. उस समय से सोना 34 हज़ार रुपये यानी 19% सस्ता है.
चांदी की कीमत तो आधी से भी कम
वहीं, चांदी की क़ीमत तो आधी से भी कम रह गई है. जो चांदी 4 लाख 5 हज़ार रुपये तक जा चुकी है, वो अब 2 लाख 15 हज़ार रुपये यानी 53% के क़रीब सस्ती है. आम बोल-चाल में लोग कहते हैं कि क़ीमत लाखों बढ़ गई है लेकिन चांदी की क़ीमत लाखों में घट गई है.
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इस साल धनतेरस से पहले सोने-चांदी की क़ीमत में गिरावट का ट्रेंड है. लेकिन ऐसे बहुत कम मौक़े आते हैं, जब ये होता है. आज आपको पिछले 10 सालों के दौरान सोने-चांदी की क़ीमत का ट्रेंड भी जानना चाहिए. तभी आपको पता चलेगा कि इस बार का दाम घटना कितना असामान्य है.
2016 में धनतेरस पर सोने की क़ीमत एक साल पहले की तुलना में क़रीब 19% बढ़ गई. 2017 में सोना क़रीब 2 प्रतिशत सस्ता हुआ था. 2018 में दाम 8% बढ़ गया. 2019 में 19% की भारी बढ़ोतरी हुई. 2020 में तो 32% की बढ़ोतरी हुई.
2021 में कोविड की वजह से दाम 5% गिरा
लेकिन 2022 में सोना क़रीब 3% महंगा हो गया. 2023 में सोने के दाम में 18% का उछाल आया. वहीं 2024 में 45% की बढ़ोतरी हुई और 2025 में तो सोने की क़ीमत ने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए. ये क़रीब 59% महंगा हुआ. सोचिए, 10 सालों के दौरान केवल 2 बार क़ीमत में कमी आई और वो भी बेहद मामूली. जबकि उछाल 59% तक दर्ज किया गया. और इस साल धनतेरस से पहले सोना 2 महीनों के दौरान 9% तक टूट गया है.
सोने-चांदी की कीमत में आई बढ़ोतरी के बारे में भी जानना चाहिए
2023 में सोना 5% के क़रीब महंगा हुआ जबकि चांदी ढाई प्रतिशत. 2024 में सोने का दाम 4% बढ़ा जबकि चांदी 7% महंगी हुई.2025 में सोने का दाम 18% बढ़ा जबकि चांदी के दाम में 33% इजाफा हुआ. इस साल धनतेरस में कुछ दिन बाकी हैं लेकिन पिछले एक महीने के दौरान सोना 4% सस्ता हुआ है जबकि चांदी 14%. दाम में इस गिरावट का ही असर है कि सर्राफा बाज़ार में थोड़ी ख़रीदारी लौटी है.
भारत के लोगों में सदियों से सोने को लेकर एक विशेष आकर्षण रहा है. भारत के लोगों और सोने के बीच निवेश का रिश्ता तो है ही, इसके अलावा सांस्कृतिक, धार्मिक और भावनात्मक संबंध भी है. भारतीय समाज में सोने को केवल एक क़ीमती धातु नहीं, बल्कि सुख-समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है. भारत में सोना विदेशों से आयात करना पड़ता है. इसके बावजूद सोने की ख़रीदारी कम नहीं होती.
इस खरीदारी का नतीजा ये निकला है कि भारतीय परिवारों और मंदिरों के पास 25,000 टन से लेकर 35,000 टन सोना है. इनकी कुल मार्केट वैल्यू 4 ट्रिलियन डॉलर यानी 380 लाख करोड़ रुपये के क़रीब आंकी गई है. सोचिए, भारत की जितनी बड़ी अर्थव्यवस्था है, उतनी क़ीमत का सोना भारत के लोगों के पास मौजूद है.
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सोने की ख़रीदारी का सबसे बड़ा कारण साल दर साल इसकी बढ़ती क़ीमत है. लेकिन अगर दाम में कमी आती है तो भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की क़ीमत में भी कमी आएगी. वहीं इसका दूसरा पहलू ये है कि जो लोग अभी और सोना ख़रीदना चाहते हैं, उनकी जेब पर भार कम होगा. आज आपको ये भी जानना चाहिए कि सोने का भाव क्यों गिर रहा है.
फेडरल रिजर्व का आक्रामक रुख
इसका सबसे बड़ा कारण है अमेरिका के सेंट्रल बैंक यानी फेडरल रिज़र्व का आक्रामक रुख. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों को ऊंचे स्तर पर बरकरार रखा है. जब अमेरिकी सरकार के बॉन्ड से लगभग 5% की कमाई होती है तो बड़े निवेशक सोने से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड में लगाने लगते हैं. इससे सोने की डिमांड घट जाती है.दूसरा कारण है अमेरिकी डॉलर का मज़बूत होना.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है. डॉलर मज़बूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना ख़रीदना महंगा हो जाता है जिससे दुनिया में सोने की मांग कम होती है. तीसरा बड़ा कारण है कच्चे तेल की कीमत में उछाल. कच्चा तेल महंगा होने से दुनिया भर में महंगाई बढ़ी है. इसी डर से अलग-अलग देशों में ब्याज दर में कटौती की संभावना लगभग ख़त्म हो गई है. इससे सोने की क़ीमत पर दबाव बन रहा है.
यानी आप तीनों बड़े कारण देखें तो ये अमेरिका से जुड़ा हुआ है. अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में सोने की क़ीमत का असर भारत पर भी हो रहा है. ये सभी कारण ईरान युद्ध से प्रभावित हैं. इसलिए जब तक ईरान युद्ध को लेकर अनिश्चितता ख़त्म नहीं होती, तब तक सोने के भाव में तेज़ी की उम्मीद नहीं है. युद्ध की शुरुआत से ही यही ट्रेंड बना हुआ है. देखना होगा कि धनतेरस पर सोने-चांदी की गिरती क़ीमत का असर लोगों की ख़रीदारी पर कितना होता है.