App

Delhi Riots 2020: कड़कड़डूमा कोर्ट ने 5 को दोषी माना, पेट्रोल पंप और गाड़ियां जलाने के आरोप क्यों नहीं टिके?

Delhi News: दिल्ली दंगों से जुड़े 2020 के भजनपुरा मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है. मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, आरिफ, तनवीर अली और हुनैन को गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा बनने, पुलिस वालों पर हमला करने और सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी से रोकने समेत चार अपराधों में दोषी माना गया है.

Delhi Riots 2020: कड़कड़डूमा कोर्ट ने 5 को दोषी माना, पेट्रोल पंप और गाड़ियां जलाने के आरोप क्यों नहीं टिके?
Image Credit: Delhi_Riots

Delhi News: दिल्ली में साल 2020 में एक हुए दंगों से जुड़े एक मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने 5 लोगों को दोषी करार दिया है. ये मामला भजनपुरा इलाके में पुलिस वालों पर हमला करने, सरकारी कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से रोकने और गैर-कानूनी भीड़ का हिस्सा बनने से जुड़ा हुआ है. कोर्ट ने मोहम्मद खालिद, अब्दुल सत्तार, आरिफ,  तनवीर अली और हुनैन को 4 अपराधों में दोषी माना है.

ये फैसला एडिशनल सेशन जज परवीन सिंह ने सुनाया. अब कोर्ट 16 सितंबर को दोषियों को कितनी सजा दी जाए, इसे लेकर दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी. पांचों को जिस धारा के तहत दोषी ठहराया गया है, उसमें अधिकतम तीन साल तक की सजा का प्रावधान है.  

क्या है पूरा मामला?
ये मामला 24 फरवरी 2020 का है. उस समय उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में हिंसा भड़क गई थी. इस दौरान भजनपुरा पेट्रोल पंप के पास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे.  अभियोजन पक्ष के अनुसार, ये इकट्ठा हुए लोग नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर यानी NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रही थी.

इन पर आरोप था कि भीड़ ने सड़क का डिवाइडर पार किया और पुलिस वालों पर हमला शुरू कर दिया. इसके बाद ही इलाके में तोड़फोड़ और हिंसा होने लगी. अभियोजन पक्ष ने ये भी आरोप लगाया है कि भीड़ ने पेट्रोल पंप और आसपास खड़ी गाड़ियों को भी अपना निशाना बनाया. साथ ही इसमें आग लगा दी.      

अभियोजन पक्ष ने क्या कहा?
जब मामले की सुनवाई हो रही थी, उस दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 26 गवाहों से पूछताछ की. सरकारी वकील ने आदालत के सामने दलील दी कि कुछ घायल गवाहों ने उस दिन हुई हिंसा की पुष्टी की है. अभियोजन पक्ष के अनुसार, पुलिस और दूसरे गवाहों के बयान से ये साबित होता है कि पांचो आरोपी उस भीड़ का हिस्सा थे.

उनके अनुसार, भीड़ ने पुलिस वालों पर हमला किया. साथ ही सरकारी कर्मचारियों को अपना काम करने से रोक दिया. कोर्ट ने सबूतों का आकलान करने के बाद माना की घटना वाली जगह पर करीब 100 से 150 लोगों की भीड़ मौजूद थी. कोर्ट ने कहा कि भीड़ का उस समय व्यवहार ऐसी था कि उसके हिंसक इरादे का पता चलता हो.          

पांचों आरोपियों की मौजूदगी कैसे साबित हुई?
कोर्ट ने पांचों गवाहों के बयान को जरूरी माना है. साथ ही कोर्ट ने कहा कि इन गवाहों की गवाही से ये साबित हुआ है कि  तनवीर, हुनैन, आरिफ मलिक, मोहम्मद खालिद और अब्दुल सत्तार उस गैर-कानूनी भीड़ में मौजूद थे. कोर्ट ने ये भी माना कि अभियोजन पक्ष आरोपियों की भीड़ में मौजूदगी और उनके द्वारा पुलिस के काम में बाधा डालने से जुड़े आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा.

इस आधार पर पांचों को दंगा करने, दंगा रोकने की कोशिश कर रहे सरकारी कर्मचारी पर हमला या बाधा डालने और सरकारी कर्मचारी को उसकी ड्यूटी से रोकने के लिए आपराधिक बल का इस्तेमाल करने से संबंधित अपराधों में दोषी ठहराया गया.

आरोप क्यों नहीं साबित हुए?
मामले का एक पहलू ये है कि कोर्ट ने पांचों को पेट्रोल पंप में आग लगाने और गाड़ियों को जलाने जैसे गंभीर आरोपों से बरी कर दिया है. कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि दिल्ली फायर सर्विस की रिपोर्ट से से ये साफ साबित नहीं होता कि जिस समय का आरोप लगाया गया है, उसी समय ही पेट्रोल पंप पर आग लगी थी. जब जांच हो रहा था उस समय आगे से जुड़ी एक दूसरी रिपोर्ट भी मिली थी, लेकिन उसे अदालत में सबूत के तौर पर साबित नहीं किया गया.

इसी कारण से जज ने पेट्रोल पंप में दोपहर करीब 2 बजे आग लगाए जाने के आरोप पर गंभीर संदेह जताया. अदालत ने यह संभावना भी मानी कि हिंसा और आगजनी का माहौल देखकर कुछ गवाहों को लगा हो कि भीड़ ने ही पेट्रोल पंप में आग लगाई थी.    

गाड़ियों में आग लगाने का आरोप भी नहीं टिका
कोर्ट ने गाड़ियों में आग लगाने वाले आरोप को भी अभियोजन पक्ष के सबूतों को पर्याप्त नहीं माना था. गवाहों ने गाड़ियों को जलाए जाने की बात कही थी. वहीं जांच अधिकारी ये पता लगाने में सफल नहीं हो सके कि कौन सी गाड़ी क्षतिग्रस्त हुई थीं और उनके मालिक कौन थे. कोर्ट ने जांच में इस कमी को गंभीर माना है. कोर्ट के अनुसार, गाड़ियों की पहचान और उनके मालिकों से पूछताछ नहीं होने के कारण आग से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप साबित नहीं किया जा सका.      

कोर्ट के फैसला
कोर्ट ने इस मामले में आरोपों को अलग-अलग देखकर फैसला सुनाया है. पांचों आरोपियों के खिलाफ गैर-कानूनी भीड़ में शामिल होने, पुलिस वालों के काम में बाधा डालने और उनसे मारपीट या आपराधिक बल प्रयोग से जुड़े आरोप पर्याप्त सबूतों के आधार पर साबित हुए.

वहीं, पेट्रोल पंप और गाड़ियों में आग लगाने जैसे गंभीर आरोपों के लिए कोर्ट को पर्याप्त और भरोसेमंद सबूत नहीं मिले. इसलिए इन आरोपों में पांचों को बरी कर दिया गया. अब मामले में अगली सुनवाई 16 सितंबर को होगी. इस दौरान अदालत ये तय करने से पहले दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी कि दोषी पाए गए पांचों लोगों को कितनी सजा दी जानी चाहिए.
 

Add Zee News as a Preferred Source

About the Author

Akanchha Singh

Akanchha Singh

जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
Read More