JNU में दीवारों पर 'Free Umar Khalid' और 'Long Live Naxalbari' के नारे, ABVP ने उठाए सवाल
JNU परिसर की दीवारों पर 'Free Umar Khalid' और 'Long Live Naxalbari' जैसे नारे लिखे जाने और वीर सावरकर की तस्वीर पर आपत्तिजनक लेखन के आरोपों के बाद ABVP ने विरोध जताते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन से जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है.
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में वामपंथी छात्र संगठनों द्वारा विश्वविद्यालय के शांतिपूर्ण एवं शैक्षणिक वातावरण को बिगाड़ने के प्रयास लगातार सामने आ रहे हैं. हालिया घटनाओं में परिसर की दीवारों और सार्वजनिक स्थानों पर आपत्तिजनक एवं भड़काऊ राजनीतिक लेखन किया गया है. सामने आई तस्वीरों में AISA के कैडर द्वारा वीर सावरकर के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन और परिसर की दीवारों पर 'FREE UMAR KHALID', 'LONG LIVE NAXALBARI' जैसे नारे लिखे हुए दिखाई दे रहे हैं.
इन घटनाओं ने विश्वविद्यालय में वैचारिक असहमति को स्वस्थ लोकतांत्रिक बहस के बजाय उकसावे और टकराव की दिशा में ले जाने को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं. AISA के राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा द्वारा खुलेआम बड़े बड़े मंचों पर उमर खालिद के समर्थन में लगाए गए नारे का ही परिणाम है कि उनके कार्यकर्ता उनसे ही प्रेरणा लेकर JNU कैंपस के दीवारों पर इस तरह के नारे लिख रहे हैं और अलोकतांत्रिक कृत्यों को बढ़ावा दे रहे हैं.
ABVP JNU इकाई ने वामपंथी छात्र संगठनों और वामपंथी नेतृत्व वाले JNUSU की राजनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि छात्र हितों से जुड़े वास्तविक मुद्दों को उठाने के बजाय परिसर में 'फ्री उमर खालिद' और 'लॉन्ग लिव नक्सल' जैसे नारों को बढ़ावा देना दुर्भाग्यपूर्ण है. विदित हो कि उमर खालिद वर्ष 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े राष्ट्र विरोधी षड्यंत्र के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायिक हिरासत में हैं. ऐसे विवादित चेहरों को विश्वविद्यालय की दीवारों पर राजनीतिक प्रदर्शन का माध्यम बनाना और सावरकर जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व के चित्र का अपमान करना परिसर के स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण के विरुद्ध और भारतीय संविधान के खिलाफ.
JNU विचारों और विमर्श का विश्वविद्यालय है, जहां अलग-अलग राजनीतिक एवं वैचारिक मतों के लिए स्थान होना चाहिए. मगर सार्वजनिक संपत्ति को विकृत करने, राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के चित्रों पर आपत्तिजनक लेखन करने अथवा हिंसक और उग्र राजनीतिक प्रतीकों का महिमामंडन करने के रूप में नहीं दिया जा सकता. ऐसी गतिविधियां विश्वविद्यालय की अकादमिक संस्कृति और विद्यार्थियों के शांतिपूर्ण अध्ययन के अधिकार को सीधे प्रभावित करती हैं.
ABVP JNU अध्यक्ष मयंक पंचाल ने कहा कि JNU में विचारों की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी भी विचारधारा को दूसरे विचारों और राष्ट्रीय व्यक्तित्वों के प्रति अपमानजनक व्यवहार करने की छूट मिल जाए. वीर सावरकर जैसे स्वतंत्रता सेनानी के चित्र के साथ आपत्तिजनक लेखन और परिसर की दीवारों पर उग्र राजनीतिक नारे लिखना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के वातावरण को दूषित करने का प्रयास है. JNU का छात्र समाज ऐसी अराजक और विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेगा. हम विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग करते हैं कि ऐसी घटनाओं को संज्ञान में लेकर जिम्मेदार लोगों की पहचान की जाए और JNU के शैक्षणिक वातावरण की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए.
ABVP JNU मंत्री प्रवीण पीयूष ने कहा कि वामपंथी संगठनों द्वारा विश्वविद्यालय का माहौल बिगाड़ने का प्रयास किया जा रहा है, विश्वविद्यालय किसी एक विचारधारा की जागीर नहीं है. असहमति का अधिकार सभी को है, मगर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, राष्ट्रीय नायकों का अपमान करना और उग्र राजनीतिक नारों के माध्यम से परिसर में तनाव पैदा करना छात्रहित में नहीं है.
(नीरज गौड़ की रिपोर्ट)