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ढाई साल में बाद ऐसी दिखेगी यमुना की तस्वीर! जानें सफाई से लेकर बाढ़ रोकने तक दिल्ली सरकार का पूरा प्लान

छठ महापर्व से पहले दिल्ली में यमुना की सफाई और घाटों के सौंदर्यीकरण का काम तेज किया गया है. वहीं बाढ़ और जलभराव से निपटने के लिए 622 करोड़ रुपये की परियोजनाओं के तहत 4.7 किलोमीटर लंबी कंक्रीट की दीवार और नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी है.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 27, 2026, 04:45 PM IST | Updated: Oct 27, 2026, 05:00 PM IST
Image Credit: AI IMAGE
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छठ महापर्व को देखते हुए दिल्ली में यमुना की सफाई का काम चल रहा है. इसके साथ-साथ यमुना में बाढ़ को किस तरह रोका जा सके, इस पर भी काम किया जा रहा है. दिल्ली में बाढ़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए सरकार ने 622 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को मंजूरी दी है. यमुना किनारे 4.7 किलोमीटर लंबी आरसीसी दीवार बनाई जाएगी,

यमुना किनारे बनेगी एक कंक्रीट की दीवार
हाल ही में फ्लड एंड इरिगेशन डिपार्टमेंट की बैठक में यह निर्णय लिया गया है कि यमुना पर एक कंक्रीट की दीवार खड़ी की जाएगी, जिससे जब पानी का स्तर बढ़ जाए तो वह पानी घरों में न घुसे. पिछले कई सालों के दौरान हमने देखा है कि जब बारिश ज्यादा होती है और यमुना का स्तर बढ़ जाता है तो उसके बाद पानी निचले इलाकों और घरों में घुस जाता है. अभी ओ-जोन क्षेत्रों में रह रहे लोगों से भी सरकार ने घर खाली कराए थे, ताकि बाढ़ से बचाया जा सके. बाढ़ से बचने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि 99 करोड़ रुपये की लागत से इस दीवार को बनाया जाएगा, जो ओल्ड रेलवे ब्रिज के पास से पूरी यमुना के किनारे खड़ी की जाएगी.

यमुना की सफाई के लिए लगाए जा रहे नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट
इसी के साथ-साथ यमुना में सफाई का काम भी लगातार जारी है. सरकार द्वारा नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाए जा रहे हैं, ताकि नालों से आने वाले पानी को यमुना में जाने से पहले ट्रीट किया जा सके. नालों की सफाई के बाद जो गाद निकाली जा रही है, उसकी भी बायोमाइनिंग की जाएगी.

बायोमाइनिंग क्या होती है? 
यमुना में बायोमाइनिंग (Biomining) मुख्य रूप से नदी में गिरने वाले नालों की गाद के वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल निस्तारण के लिए उपयोग की जाने वाली एक आधुनिक तकनीक है. हाल ही में दिल्ली सरकार ने बाढ़ नियंत्रण और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए ₹622 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें नालों से निकलने वाली गाद की सफाई और उसके उचित प्रबंधन के लिए तीन बड़ी बायोमाइनिंग परियोजनाएं शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, यमुना किनारे की प्रमुख डंप साइट्स (जैसे भलस्वा, गाजीपुर और ओखला) पर भी कचरे के पहाड़ों को खत्म करने के लिए बड़े पैमाने पर बायोमाइनिंग का कार्य किया जा रहा है.

छठ से पहले यमुना घाटों का हो रहा सौंदर्यीकरण  
यमुना में लगातार सफाई का कार्य चल रहा है. यमुना के तट पर भी सरकार द्वारा सफाई अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें छात्र और कई सारे लोग मिलकर यमुना तट की सफाई कर रहे हैं. छठ का त्योहार भी आने वाला है. इसके लिए यमुना पर घाट तैयार किए जा रहे हैं और वहां सौंदर्यीकरण का काम चल रहा है. लोगों के कपड़े बदलने के लिए कमरे बनाए जा रहे हैं. पीने के पानी की व्यवस्था रहेगी और रात भर लोगों के वहां रहने के लिए भी व्यवस्था की जाएगी.

ढाई साल में बदलेगी यमुना की तस्वीर 
सरकार का कहना है कि काम किया जा रहा है और अगले दो से ढाई साल के बाद यमुना की तस्वीर बदलने लगेगी. हम यमुना को साफ कर पाएंगे.

ये भी पढ़ें: यमुना नदी का बुरा हाल, कालिंदी कुंज में फिर तैरती दिखी सफेद झाग की परत

(तान्या चूग की रिपोर्ट)

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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