दिल्ली की यमुना में फिर दिखा जहरीला झाग, मानसून में कम पानी ने बढ़ाई परेशानी
Delhi Yamuna River: दिल्ली में मानसून की पूरी तरह विदाई से पहले यमुना में प्रदूषण बढ़ने लगा है. कालिंदी कुंज इलाके में नदी की सतह पर जहरीला झाग दिखाई दे रहा है. इस बार मानसून के दौरान यमुना में पानी का बहाव कम रहने को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है.
Delhi News: दिल्ली में मानसून अभी पूरी तरह से नहीं गया है, लेकिन यमुना नदीं में प्रदूषण का लेवल बढ़ने लगा है. कालिंदी कुंज इलाके में यमुना की सतह पर जहरीला झाग दिखाई देने लगा है. इस बार मानसून के समय यमुना में पानी का प्रवाह कम रहने के कारण प्रदूषण की परेशानी बढ़ रही है. पानी का बहाव कम होने से नालों और औद्योगिक इकाइयों से आने वाला गंदा पानी नदी में ज्यादा असर डालता है.
इस बार यमुना में कम आया पानी
मानसून के दौरान हर साल हथनी कुंड बैराज से यमुना में बड़ी मात्रा में पानी छोड़ा जाता है. कई बार को पानी की ये मात्रा एक लाख से तीन लाख क्यूसेक तक पहुंच जाती है. ऐसा करने से नदी का जलस्तर को बढ़ता ही है. साथ ही पानी का तेज बहाव प्रदूषकों को आगे ले जाने में मदद करता है. हालांकि, इस साल स्थिति थोड़ी अलग रही. अगस्त महाने में हथनी कुंड से करीब 63 हजार क्यूसेक पानी ही छोड़ा गया और वो भी केवल एक-दो दिनों के लिए. साल 2014 के बाद से इस बार मानसून में यमुना में इतना कम पानी छोड़ा गया है. उन्होंने इसके पीछे हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कम बारिश को भी एक कारण बताया है.
कम पानी से क्यों बढ़ता है प्रदूषण?
यमुना में पानी प्रवाह कम होने पर नालों और औद्योगिक इकाइयों से आने वाला प्रदूषित पानी ज्यादा प्रभाव डालता है. यमुना नदी में डिटर्जेंट में मौजूद न झाग बनने की वजह हैं. इसी वजह से कालिंदी कुंज के पास यमुना की सतह पर सफेद झाग दिखाई देता है. जल बोर्ड अधिकारियों के अनुसार, गंदे पानी को यमुना में गिरने से रोकने के लिए पुराने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) को अपग्रेड किया जा रहा है. इसके साथ ही नए STP और DSTP लगाने का काम भी चल रहा है
बैराज की संरचना में होगा बदलाव
अधिकारियों ने बताया कि कालिंदी कुंज में झाग बनने की समस्या फिलहाल एक क्षेत्र में दिखाई देती है. इसका एक कारण ओखला बैराज की संरचना और पानी के बहाव को भी माना जा रहा है. बैराज से पानी नीचे गिरने के दौरान होने वाली हलचल नदी की इंप्योरिटीज को झाग के रूप में सतह पर ला देती है. इस परेशानी को कम करने के लिए IIT रुड़की की मदद से बैराज की संरचना में बदलाव करने की योजना है. ऐसे में पानी को कम ऊंचाई से नदी में गिराने की व्यवस्था की जाएगी.
धोबी घाट भी होंगे शिफ्ट
इसके अलाव डिटर्जेंट से निकलने वाले रसायनों को कम करने के लिए नदी किनारे मौजूद धोबी घाटों को दूसरी जगह ट्रांसफर करने की भी प्लानिंग चल रही है. इसके साथ ही दिल्ली और आसपास के राज्यों में चल रही अवैध डाइंग और औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है.