Delhi सरकार की नई सोलर पॉलिसी में क्या बदला? जानें किसे मिलेगा फायदा, कितनी होगी बचत और कैसे लगवाएं
Delhi Solar Policy: दिल्ली की संशोधित सोलर पॉलिसी 2026 में 400 यूनिट तक खपत वाले घरों के लिए 3 KW रूफटॉप सोलर का बड़ा ऐलान हुआ है. जानें सब्सिडी, बचत, पात्रता और आवेदन की पूरी जानकारी.
Delhi Solar Policy 2026: दिल्ली सरकार ने राजधानी में रूफटॉप सोलर को बढ़ावा देने के लिए बदली हुई दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी को मंजूरी दे दी है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में इस पॉलिसी को मंजूरी दी गई. नई पॉलिसी का सबसे बड़ा आकर्षण घरेलू बिजली कंज्यूमर्स के लिए है, जिनका महीने का बिजली कंज्यूमर 400 यूनिट या उसके आसपास है. सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक दिल्ली के लगभग 2,30,000 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाना है.
नई पॉलिसी न केवल सोलर पावर बनाने पर फोकस करती है, बल्कि सोलर पैनल लगाने की शुरुआती लागत को कम करने पर भी फोकस करती है, जो कंज्यूमर्स के सामने एक बड़ी चुनौती है. सरकार का कहना है कि इस बदलाव से उन परिवारों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले शुरुआती लागत के कारण रूफटॉप सोलर पैनल लगाने में मुश्किल होती थी.
सोलर एनर्जी पॉलिसी में सबसे बड़ा बदलाव क्या है?
नई पॉलिसी में 400 यूनिट तक महीने की बिजली खपत वाले घरेलू कंज्यूमर्स के लिए 3 किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम बिना किसी शुरुआती पेमेंट के देने का प्रावधान है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र और दिल्ली सरकार की सब्सिडी को मिलाकर सिस्टम की लागत को कवर करने के लिए एक मॉडल बनाया गया है.
इसका मतलब है कि एलिजिबल परिवारों को सोलर सिस्टम लगाने का पूरा खर्च अपनी जेब से नहीं उठाना पड़ेगा. हालांकि, स्कीम के तहत कौन सा सिस्टम किस कंज्यूमर को मिलेगा, इसके लिए एलिजिबिलिटी, इंस्टॉलेशन प्रोसेस और डिटेल्ड इम्प्लीमेंटेशन रूल्स सरकार द्वारा जारी किए जाने के बाद ही फाइनल किए जाएंगे.
किसे फायदा होगा?
नई पॉलिसी का सबसे सीधा फायदा घरेलू बिजली कंज्यूमर्स को मिलेगा. सरकार ने खास तौर पर उन परिवारों को टारगेट किया है जिनका महीने का कंजम्पशन 400 यूनिट तक है. इस स्कीम का मकसद उन घरों को रूफटॉप सोलर उपलब्ध कराना है जो बिजली बचाने के लिए सोलर पैनल लगाना चाहते हैं, लेकिन शुरुआती खर्च ज्यादा होने की वजह से ऐसा नहीं कर पा रहे हैं. सरकार ने मार्च 2027 तक दिल्ली में लगभग 230,000 घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने का टारगेट रखा है.
क्या 400 यूनिट से ज्यादा बिजली कंज्यूम करने वालों को फायदा नहीं होगा?
यहां एक जरूरी फर्क समझना जरूरी है. नई घोषणा 400 यूनिट तक कंज्यूम करने वाले घरेलू कंज्यूमर्स को फ्री/बिना शुरुआती खर्च के 3 kW सिस्टम देती है. दूसरी तरफ, दिल्ली की मौजूदा सोलर पॉलिसी और केंद्र सरकार की PM सूर्य घर स्कीम के तहत, दूसरे एलिजिबल कंज्यूमर भी सब्सिडी के जरिए रूफटॉप सोलर पैनल लगवा सकते हैं.
इसलिए, 400 यूनिट से ज्यादा खर्च करने वाले हर कंज्यूमर को स्कीम से बाहर करना गलत होगा. उनके लिए मिलने वाली सब्सिडी और दूसरे मॉडल अलग-अलग हो सकते हैं.
3 kW सोलर पैनल क्यों जरूरी है?
सरकार ने जिस सिस्टम पर खास तौर पर जोर दिया है, वह 3 kW रूफटॉप सोलर सिस्टम है. केंद्र सरकार की PM सूर्य घर स्कीम के तहत, मौजूदा सेंट्रल सब्सिडी स्ट्रक्चर पहले 2 kW के लिए ₹30,000 प्रति kW और एक्स्ट्रा 1 kW के लिए ₹18,000 देता है. इससे 3 kW सिस्टम के लिए मैक्सिमम सेंट्रल सब्सिडी ₹78,000 हो जाती है. यही सेंट्रल सब्सिडी स्ट्रक्चर दिल्ली सोलर पोर्टल पर भी दिया गया है.
दिल्ली सरकार की सोलर पॉलिसी राज्य से अलग कैपिटल सब्सिडी भी देती है. अभी के सरकारी पोर्टल पर यह ₹10,000 प्रति kW है, और घर के कंज्यूमर के लिए यह ज़्यादा से ज़्यादा ₹30,000 है.
इसका मतलब है कि 3 kW सिस्टम के लिए मिलने वाली कुल फाइनेंशियल मदद, जिसमें केंद्र और दिल्ली सरकार की मदद भी शामिल है, ₹1.08 लाख तक हो सकती है. हालांकि, नई बदली हुई पॉलिसी में सरकार इस सब्सिडी को पूरी इंस्टॉलेशन कॉस्ट से जोड़कर एलिजिबल परिवारों के लिए कैसे लागू करेगी, इसका फाइनल ऑपरेशनल फ्रेमवर्क अभी देखना बाकी है.
सोलर पैनल लगाने के बाद आपका बिजली का बिल कितना कम हो जाएगा?
सोलर पैनल का सबसे बड़ा फायदा यह है कि दिन में घर में इस्तेमाल होने वाली बिजली का एक हिस्सा रूफटॉप सिस्टम से बनाया जा सकता है. इससे ग्रिड से खरीदी जाने वाली बिजली की मात्रा कम हो जाती है.
अगर सिस्टम घर की खपत के हिसाब से सही कैपेसिटी के साथ लगाया जाए तो बिजली का बिल काफ़ी कम हो सकता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि हर घर का बिल हर महीने जीरो होगा.
एनर्जी की खपत के अलावा, बिजली के बिल में कुछ फिक्स्ड चार्ज और दूसरी फ़ीस भी शामिल हो सकती हैं. इसलिए, सोलर पैनल लगाने के बाद बिल की असली रकम घर की खपत, सिस्टम की कैपेसिटी, मौसम, बिजली उत्पादन और लागू बिलिंग नियमों पर निर्भर करेगी.
नेट मीटरिंग से कैसे बचत होगी?
अगर दिन में रूफटॉप सोलर सिस्टम से बनी बिजली का घर पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पाता है तो ज्यादा बिजली ग्रिड को भेजी जा सकती है. नेट मीटरिंग इंपोर्टेड और एक्सपोर्टेड बिजली का हिसाब रखती है और उसी हिसाब से बिल को एडजस्ट करती है.
दिल्ली की सोलर पॉलिसी में नेट मीटरिंग को कंज्यूमर्स के लिए एक खास फायदे के तौर पर शामिल किया गया है. पॉलिसी में बाद के बिलिंग साइकिल में ज्यादा एनर्जी को एडजस्ट करने का भी इंतजाम है. इसका मतलब है कि दिन में सोलर पैनल से बनी ज्यादा बिजली बर्बाद होने के बजाय ग्रिड में भेजी जा सकती है और इसका फायदा बिजली बिल में देखा जा सकता है.
सोलर पैनल लगाने में कितना खर्च आता है?
सोलर पैनल की कुल लागत सिर्फ पैनल पर ही निर्भर नहीं करती है. इसमें इन्वर्टर, माउंटिंग स्ट्रक्चर, वायरिंग, इंस्टॉलेशन, मीटर और दूसरे इक्विपमेंट की लागत भी शामिल हो सकती है. इस वजह से, सभी घरों के लिए एक ही कीमत तय करना सही नहीं होगा. कीमत सिस्टम की कैपेसिटी, वेंडर, छत की कंडीशन और इंस्टॉलेशन की जरूरतों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है.
नई दिल्ली सरकार की पॉलिसी का महत्व ठीक इसी पहलू में है, क्योंकि सरकार एलिजिबल परिवारों के लिए शुरुआती लागत को कम करने या खत्म करने की कोशिश कर रही है.
क्या किराए के घरों में रहने वाले लोग सोलर पैनल लगवा सकते हैं?
यह एक जरूरी सवाल है. आमतौर पर, छत पर सोलर लगाने के लिए छत इस्तेमाल करने का अधिकार और बिजली कनेक्शन से जुड़ी जरूरी परमिशन की जरूरत होती है. अगर कोई व्यक्ति किराए के घर में रहता है तो उसे मकान मालिक या संबंधित अथॉरिटी से परमिशन की जरूरत हो सकती है. नई रिवाइज्ड पॉलिसी की फाइनल इम्प्लीमेंटेशन गाइडलाइंस तब साफ होंगी जब किराएदारों, RWAs और ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों के लिए प्रोविजन साफ हो जाएंगे.
दिल्ली की सोलर पॉलिसी में कम्युनिटी सोलर, ग्रुप नेट मीटरिंग और हाइब्रिड RESCO जैसे मॉडल भी दिए गए हैं. इनका मकसद उन कंज्यूमर्स को सोलर का फायदा पहुंचाना है जिनके पास अपनी छतों पर सिस्टम लगाने के लिए काफी जगह नहीं है.
अगर छत न हो तो क्या होगा?
दिल्ली की सोलर पॉलिसी की एक जरूरी बात यह है कि सोलर के फायदे सिर्फ अलग घरों तक ही सीमित नहीं हैं. ग्रुप हाउसिंग सोसाइटियों/RWAs में कॉमन फ़ैसिलिटीज़ के लिए सोलर लगाने का प्रोविजन है. सरकारी पोर्टल के मुताबिक, कॉमन फैसिलिटीज और EV चार्जिंग जैसी जरूरतों के लिए भी सेंट्रल मदद दी जाती है. इसके अलावा, कम्युनिटी सोलर और ग्रुप नेट मीटरिंग जैसे ऑप्शन उन कंज्यूमर्स के लिए काम आ सकते हैं जिनके पास अपनी छत नहीं है.
सोलर पैनल लगवाने के लिए अप्लाई कैसे करें?
दिल्ली में रूफटॉप सोलर के लिए अभी का एप्लीकेशन प्रोसेस PM सूर्य घर नेशनल पोर्टल से जुड़ा है. दिल्ली सोलर पोर्टल नेशनल पोर्टल पर ऑनलाइन रेजिडेंशियल सब्सिडी एप्लीकेशन की जानकारी भी देता है.
1. नेशनल पोर्टल पर अप्लाई करें.
2. अपना बिजली कनेक्शन और कंज्यूमर की जानकारी डालें.
3. कोई उपलब्ध रजिस्टर्ड वेंडर चुनें.
4. रूफटॉप सोलर सिस्टम इंस्टॉल करें.
5. DISCOM जरूरी इंस्पेक्शन और मीटर से जुड़े प्रोसेस पूरे करेगा.
6. सिस्टम चालू होने के बाद, एलिजिबल सब्सिडी प्रोसेस आगे बढ़ेगा.
400 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले घरों के लिए नई दिल्ली पॉलिसी के तहत जीरो-अपफ्रंट मॉडल लागू करने का डिटेल्ड प्रोसेस आने वाली ऑपरेशनल गाइडलाइंस में साफ हो सकता है.
दिल्ली की पुरानी सोलर पॉलिसी में क्या था?
दिल्ली सरकार ने मार्च 2024 में दिल्ली सोलर एनर्जी पॉलिसी 2023 को नोटिफाई किया. इसका मकसद दिल्ली में रूफटॉप सोलर कैपेसिटी को 750 MW तक बढ़ाना और बाहर से यूटिलिटी-स्केल सोलर कैपेसिटी हासिल करना था. बाद में जुलाई 2025 में इसे रिवाइज किया गया. दिल्ली के इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक, स्टेट कैपिटल सब्सिडी को बढ़ाकर ₹10,000 प्रति kW कर दिया गया, जो हर कंज्यूमर के लिए मैक्सिमम ₹30,000 तक था और सब्सिडी सीधे कंज्यूमर को DBT के जरिए ट्रांसफर की गई.
सितंबर 2026 में अप्रूव हुई रिवाइज पॉलिसी, खासतौर पर शुरुआती इंस्टॉलेशन कॉस्ट को कम करने और बड़े पैमाने पर घरों में रूफटॉप सोलर अपनाने को बढ़ावा देने पर फोकस करती है.
सरकार का बड़ा मकसद क्या है?
दिल्ली सरकार ने मार्च 2027 तक लगभग 2,30,000 घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने का टारगेट रखा है. सरकार इसे अपनी ग्रीन दिल्ली इनिशिएटिव से भी जोड़ रही है.
मकसद सिर्फ घरों के बिजली बिल कम करना नहीं है. रूफटॉप सोलर बिजली बनाने में रिन्यूएबल एनर्जी का हिस्सा बढ़ाने, पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने और लंबे समय में दिल्ली के एनर्जी मिक्स को साफ-सुथरा बनाने की भी एक कोशिश है.
किन बातों का ध्यान रखें?
सोलर पैनल लगाने से पहले सिर्फ सब्सिडी के आधार पर कोई फैसला नहीं लेना चाहिए. घर की औसत महीने की बिजली की खपत, छत पर उपलब्ध जगह, धूप की स्थिति, मंजूर लोड, सिस्टम की क्षमता और नेट-मीटरिंग पर विचार करना जरूरी है.
खासतौर पर 3 kW का सिस्टम तभी बेहतर नतीजे देगा जब वह घर की असल बिजली की जरूरतों से मेल खाएगा. बहुत छोटा सिस्टम लगाने से उम्मीद के मुताबिक बचत नहीं होगी और जरूरत से बड़ा सिस्टम लगाने से शुरुआती लागत बढ़ सकती है.