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BRICS Summit से जेवर को मिली ग्लोबल पहचान, रूस के विमानों की लैंडिंग क्यों है खास?

BRICS Summit 2026: BRICS Summit 2026 के बीच जेवर एयरपोर्ट भी चर्चा में आ गया है. सम्मेलन से पहले रूस के तीन सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उतरे. बताया गया कि इन विमानों से रूस की एडवांस टीम और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भारत पहुंचे हैं.

Written By Akanchha Singh
Published: Sep 13, 2026, 10:16 AM IST | Updated: Sep 13, 2026, 10:23 AM IST
Image Credit: Jewar_Airport
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Delhi News: BRICS Summit 2026 ने दिल्ली के साथ-साथ जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी चर्चा में ला दिया है. रूस के तीन सैन्य ट्रांसपोर्ट विमान सम्मेलन से पहले जेवर एयरपोर्ट पर पहुंचे हैं. इस विमानों के जरिए रूस की एडवांस टीम और सुरक्षा से जुड़े अधिकारी भारत आए थे. रिपोर्ट के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट पर किसी विदेशी विमान की ये पहली लैंडिंग थी. जेवर एयरपोर्ट पर अभी पैसेंजर फ्लाइट का संचालन शुरू हुए कुछ ही समय हुआ है. ऐसे में इतने कम समय में एयरपोर्ट ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन से जुड़ी विशेष और सुरक्षा वाली उड़ानों को संभाला है. अभी जेवर एयरपोर्ट से कमर्शियल इंटरनेशनल पैसेंजर फ्लाइट शुरू होना बाकी है.

मास्टर प्लान में क्या है? 
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है. वहीं इसके मास्टर प्लान में एयरपोर्ट को अलग-अलग चरणों में विकसित करने की प्लानिंग है. आने वाले समय में यात्रियों को संख्या बढ़ने के साथ टर्मिनल का विस्तार और एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाने की व्यवस्था की गई है.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरू में यात्री क्षमता सालाना लगभग 1.2 करोड़ यात्रियों का बताया गया है. इस समय एयरपोर्ट से घरेलू उड़ानों का संचालन हो रहा है. ऐसे में रूस के सैन्य विमानों का पहुंचना जेवर के लिए एक तरह का अंतरराष्ट्रीय ऑपरेशनल टेस्ट माना जा सकता है.        

BRICS और जेवर का कनेक्शन क्या है?
BRICS में दुनिया की कई बड़ी और केजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं. भारत की अध्यक्षता में हो रहे BRICS Summit 2026 में व्यापार, सप्लाई चेन, तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग और दवा जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट की भूमिका सिर्फ यात्रियों को हवाई सफर देने तक सीमित नहीं है. एयरपोर्ट के आसपास बड़े औद्योगिक क्षेत्र को विकसित किया जा रहा है. यहां कार्गो, इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, मेडिकल डिवाइस और एविएशन सेक्टर से जुड़ी परियोजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसका मकसद एयरपोर्ट के आसपास ऐसा इकोसिस्टम तैयार करना है, जहां पर उद्योगों को उत्पादन से लेकर देश और विदेश में सामान भेजने तक की सुविधा आसानी से मिल सके.      

22 हजार वर्ग मीटर का वेयरहाउस
जेवर एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल को भी आगे होने वाले कारोबारों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है. यहां पर लगभग 22 हजार वर्ग मीटर का वेयरहाउस है. इसकी शरुआती क्षमता हर साल लगभग 2 लाख टन माल संभालने की बताई गई है.

कार्गो क्षमता बढ़ने से आने वाले समय में जेवर से कई तरह के हाई-वैल्यू उत्पादों को दूसरे शहरों और देशों तक भेजना आसान हो सकता है. इसमें इलेक्ट्रॉनिक सामान, चिप्स, मेडिकल उपकरण से लेकर मशीनरी के कलपुर्जे और दूसरे महंगे उत्पाद शामिल हो सकते हैं. यानी आने वाले समय में जेवर एयरपोर्ट की पहचान केवल पैसेंजर एयरपोर्ट के रूप में नहीं, बल्कि एक बड़े कार्गो और लॉजिस्टिक्स सेंटर के तौर पर भी बन सकती है.      

सेमीकंडक्टर से मेडटेक तक बड़े प्रोजेक्ट
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के आसपास YEIDA क्षेत्र में कई औद्योगिक परियोजनाओं को विकसित किया जा रहा है. इनमें सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर पर खास फोकस रखा गया है. HCL-Foxconn का करीब 3,700 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट भी इसी क्षेत्र से जुड़ा है. इस प्रोजेक्ट के तहत डिस्प्ले ड्राइवर चिप के निर्माण की दिशा में काम किया जा रहा है. ऐसे प्रोजेक्ट आने वाले समय में इस इलाके को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के बड़े केंद्र में बदल सकते हैं.

इतना ही नहीं एयरपोर्ट के पास करीब 350 एकड़ क्षेत्र में मेडटेक हब विकसित करने की योजना है. यहां मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इससे हेल्थ टेक्नोलॉजी से जुड़े कारोबार और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं.

एविएशन सेक्टर को भी मिलेगा फायदा
इसके अलावा जोवर आसपास एविएशन सेक्टर से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की भी प्लानिंग है. इसमें  MRO यानी Maintenance, Repair and Overhaul सुविधाएं शामिल हैं. MRO के माध्यम से विमानों की सर्विसिंग, मरम्मत और रखरखाव का काम किया जाता है. अगर जेवर में ये इकोसिस्टम मजबूत होता है, तो एयरपोर्ट के साथ-साथ एविएशन इंडस्ट्री को भी फायदा मिल सकता है. इस तरह के आसपास धीरे-धीरे एयरपोर्ट, कार्गो, मैन्युफैक्चरिंग, मेडिकल टेक्नोलॉजी और एविएशन को जोड़ने वाला औद्योगिक नेटवर्क तैयार किया जा रहा है.

कनेक्टिविटी बनी सबसे बड़ी चुनौती
जेवर के सामने सबसे बड़ी चुनौती कनेक्टिविटी है. दिल्ली के कई इलाकों से जेवर पहुंचने में IGI एयरपोर्ट की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है. ऐसे में एयरपोर्ट को दिल्ली-NCR के मेन इलाकों से तेज और आसान तरीके से जोड़ना जरूरी है. एयरपोर्ट की सफलता केवल रनवे और टर्मिनल पर निर्भर नहीं करेगी. यात्रियों के लिए सड़क, एक्सप्रेसवे और सार्वजनिक परिवहन की बेहतर सुविधा भी उतनी ही जरूरी होगी. कोर्गो कारोबार के लिए तेज सड़क कनेक्टिविटी जरूरी माना जा रहा है.      

3,630 करोड़ के ग्रीनफील्ड कॉरिडोर से उम्मीद
जेवर की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए लगभग 3,630 करोड़ रुपये की लागत वाले ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को मंजूरी दे दी गई है. ये कॉरिडोर 31 किलोमीटर लंबा ये कॉरिडोर जेवर एयरपोर्ट को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण परियोजना है. इससे  यरपोर्ट को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, यमुना एक्सप्रेसवे और डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर जैसे बड़े परिवहन नेटवर्क से बेहतर कनेक्शन मिल सकता है. अगर कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाती है, तो जेवर की पहुंच सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी. ये पूरे दिल्ली-NCR के लिए एक बड़े एयर ट्रांसपोर्ट और कार्गो हब के रूप में उभर सकता है.

 

भारत की सप्लाई चेन का बड़ा केंद्र बन सकता है जेवर
जेवर एयरपोर्ट की एक नए एयरपोर्ट तक सीमित नहीं है. इसके आसपास ऐसा औद्योगिक नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही है, जहां एयर कनेक्टिविटी के साथ मैन्युफैक्चरिंग, कार्गो, लॉजिस्टिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर एक-दूसरे से जुड़े हों.

अगर एयरपोर्ट के साथ उद्योग और कनेक्टिविटी की योजनाएं तय रफ्तार से जमीन पर उतरती हैं, तो आने वाले साल में जेवर उत्तर भारत की सप्लाई चेन का एक बड़ा केंद्र बन सकता है. BRICS Summit के दौरान रूसी विमानों की लैंडिंग को इस लंबे सफर की शुरुआती झलक के तौर पर देखा जा सकता है.

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जी-न्यूज में ट्रेनी सब एडिटर. वर्तमान में दिल्ली-एनसीआर हरियाणा डिजिटल टीम में दिल्ली-एनसीआर-हरियाणा की राजनीति, हाइपर लोकल, क्राइम की खबरों पर नजर. यूटिलीटी की खबरों में दिलचस्पी है. 2023 में संस्थान से जुड़े. माखन लाल चतुर्वेदी भोपाल से पत्रकारिता में डिग्री हासिल की.
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