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CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने की दिल्ली पुलिस के खिलाफ FIR की मांग, अवैध तरीके से हिरासत में लेने का आरोप; कोर्ट में दी अर्जी

CJP की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है कि 10 अक्टूबर को CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में जाते समय पुलिस ने उन्हें अवैध तरीके से रोका. जिसके बाद उन्होंने साकेत कोर्ट में FIR दर्ज करने और स्टेटस रिपोर्ट मांगने की अर्जी दाखिल की.

Written By Renu Akarniya
Published: Oct 10, 2026, 04:11 PM IST | Updated: Oct 10, 2026, 04:20 PM IST
Image Credit: CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने की दिल्ली पुलिस के खिलाफ FIR की मांग ( X )
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Delhi News: कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल पैरिटी (Campaign for Judicial Parity- CJP) की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने दिल्ली की एक कोर्ट में पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. उनका आरोप है कि 10 अक्टूबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रोटेस्ट में उन्हें गलत तरीके से रोका गया और शामिल होने से रोका गया.

साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे के सामने फाइल की गई एक अर्जी में रत्ना सिंह ने कथित घटना के संबंध में पुलिस से FIR दर्ज करने और स्टेटस रिपोर्ट के लिए निर्देश मांगे हैं.

एप्लीकेशन के अनुसार, प्रैक्टिसिंग एडवोकेट रत्ना सिंह CEC के खिलाफ वकीलों के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही थीं और उनके साथ दो साथी एडवोकेट भी थे. याचिका में आरोप लगाया गया है कि अपने घर के बाहर के एरिया में लौटने के बाद रत्ना सिंह एडवोकेट तारा नरूला के साथ एक कार में बैठी थीं, जब उन्हें कथित तौर पर आगे बढ़ने से रोका गया. इसमें दावा किया गया है कि दो कारों ने उनकी गाड़ी को आगे और पीछे से ब्लॉक कर दिया, जबकि पुलिसवाले कार के बाहर खड़े रहे.

 रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें गलत तरीके से रोका गया और पुलिसवालों ने उनके कहने के बावजूद कथित रोक का कानूनी आधार नहीं बताया.

एप्लीकेशन में आगे कहा गया है कि घटना के सिलसिले में पुलिस को कॉल किया गया था और कॉल की डिटेल्स का जिक्र किया गया है. इसमें उन्होंने की आजादी और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई और आरोप लगाया गया कि हालात ऐसे थे कि कोर्ट को तुरंत दखल देना चाहिए.

यह अर्जी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी बिरादरी के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बीच आई है. प्रस्तावित प्रदर्शन ने वकीलों के इकट्ठा होने और अपनी बात कहने के अधिकार के साथ-साथ विरोध प्रदर्शनों को रेगुलेट करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर ध्यान खींचा है.

रत्ना सिंह ने न्यायिक दखल की मांग करते हुए कहा है कि कथित रोक की जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए. उनकी एप्लीकेशन में कोर्ट से दोबारा जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई है.

ये भी पढ़ें: Protest के बीच दिल्ली में बाजार बंद होने से कितना हुआ नुकसान? व्यापारियों ने बताई अपनी परेशानी

(Input: ANI)

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About the Author

रेनू अकर्णिया, वर्तमान में Zee News में सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं और दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की लेटेस्ट, ट्रेंडिंग कंटेंट, यूटिलिटी जुड़ी खबरों पर काम कर रहे हैं. रेनू पिछले 3 सालों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं. पत्रकारिता में ग्रेजुएशन करने के बाद उन्होंने 2022 में Zee News से करियर की शुरुआत की.  लोकल चैनल समाचार प्लस में इंटर्न से शुरुआत की और कारवां बढ़ता हुआ जी न्यूज पहुंचा.
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