Delhi News: कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल पैरिटी (Campaign for Judicial Parity- CJP) की लीगल अफेयर्स हेड रत्ना सिंह ने दिल्ली की एक कोर्ट में पुलिसवालों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की है. उनका आरोप है कि 10 अक्टूबर को चीफ इलेक्शन कमिश्नर (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एक प्रोटेस्ट में उन्हें गलत तरीके से रोका गया और शामिल होने से रोका गया.
साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में चीफ मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट अभिनव पांडे के सामने फाइल की गई एक अर्जी में रत्ना सिंह ने कथित घटना के संबंध में पुलिस से FIR दर्ज करने और स्टेटस रिपोर्ट के लिए निर्देश मांगे हैं.
एप्लीकेशन के अनुसार, प्रैक्टिसिंग एडवोकेट रत्ना सिंह CEC के खिलाफ वकीलों के प्रोटेस्ट में हिस्सा लेने के लिए सुप्रीम कोर्ट जा रही थीं और उनके साथ दो साथी एडवोकेट भी थे. याचिका में आरोप लगाया गया है कि अपने घर के बाहर के एरिया में लौटने के बाद रत्ना सिंह एडवोकेट तारा नरूला के साथ एक कार में बैठी थीं, जब उन्हें कथित तौर पर आगे बढ़ने से रोका गया. इसमें दावा किया गया है कि दो कारों ने उनकी गाड़ी को आगे और पीछे से ब्लॉक कर दिया, जबकि पुलिसवाले कार के बाहर खड़े रहे.
CJP Legal Team Head Ratna Singh has reportedly been detained along with three other lawyers. She is being kept inside a car surrounded by over 25 police personnel, with no grounds for detention disclosed so far. https://t.co/Vh3Wxn5TLR
— Neha Boraa (@NehaAisa) October 10, 2026
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया है कि उन्हें गलत तरीके से रोका गया और पुलिसवालों ने उनके कहने के बावजूद कथित रोक का कानूनी आधार नहीं बताया.
एप्लीकेशन में आगे कहा गया है कि घटना के सिलसिले में पुलिस को कॉल किया गया था और कॉल की डिटेल्स का जिक्र किया गया है. इसमें उन्होंने की आजादी और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई और आरोप लगाया गया कि हालात ऐसे थे कि कोर्ट को तुरंत दखल देना चाहिए.
यह अर्जी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कानूनी बिरादरी के सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बीच आई है. प्रस्तावित प्रदर्शन ने वकीलों के इकट्ठा होने और अपनी बात कहने के अधिकार के साथ-साथ विरोध प्रदर्शनों को रेगुलेट करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर ध्यान खींचा है.
रत्ना सिंह ने न्यायिक दखल की मांग करते हुए कहा है कि कथित रोक की जांच सक्षम अधिकारियों द्वारा की जानी चाहिए. उनकी एप्लीकेशन में कोर्ट से दोबारा जांच करने का निर्देश देने की मांग की गई है.
(Input: ANI)