दिल्ली BJP के प्रभारी बने विनय सहस्रबुद्धे, हरियाणा का प्रभार संभालेंगी स्मृति ईरानी; जानें सह-प्रभारी कौन
BJP ने कई राज्यों के लिए अपने प्रभारियों और सह प्रभारियों की लिस्ट जारी की है. ऐसे में दिल्ली और हरियाणा के लिए नई जिम्मेदारी किसे सौंपी गई है जानें.
Delhi News: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बुधवार को विभिन्न राज्यों के लिए अपने प्रभारियों और सह प्रभारियों की लिस्ट जारी की है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की ओर से जारी लिस्ट में कई वरिष्ठ नेताओं को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं. ऐसे में पार्टी की ओर से जारी लिस्ट में दिल्ली और हरियाणा के लिए भी नई जिम्मेदारियां तय की गई हैं.
BJP ने दिल्ली में डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी है. वहीं, जामयांग त्सेरिंग नामग्याल और दर्शनाबेन जरदोश को दिल्ली का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है.
वहीं, हरियाणा के लिए स्मृति ईरानी को प्रदेश प्रभारी बनाया गया है. उनके साथ डॉ. भोला सिंह को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. ऐसे में चंडीगढ़ से महेंद्र पांडे को प्रभारी बनाया गया है. पार्टी की नई नियुक्तियों को आगामी संगठनात्मक गतिविधियों और राज्य स्तर पर पार्टी के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
कौन हैं दिल्ली के नए प्रभारी विनय सहस्रबुद्धे?
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक वरिष्ट, प्रभावशालीनेता, विचारक और रणनीतिकार डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को हाल ही में BJP की दिल्ली का नया इंचार्ज बनाया गया है. पार्टी हाईकमान ने उन्हें संगठन को मजबूत करने और भविष्य की रणनीतियों को बेहतर बनाने के लिए यह अहम जिम्मेदारी सौंपी.
वह महाराष्ट्र से पूर्व राज्यसभा सांसद (2016–2022) रहे हैं. उन्होंने BJP के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और पार्टी के गुड गवर्नेंस डिपार्टमेंट के हेड के तौर पर भी काम किया है. उन्होंने मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों में BJP के चुनाव इंचार्ज के तौर पर भी काम किया है.
डॉ. विनय सहस्रबुद्धे को BJP के थिंक-टैंक का एक अहम हिस्सा माना जाता है. उन्होंने पॉलिटिकल साइंस में PhD की है. वह नई दिल्ली में पब्लिक पॉलिसी रिसर्च सेंटर (PPRC) के ऑनरेरी डायरेक्टर और रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी के उपाध्यक्ष हैं, जो चुने हुए प्रतिनिधियों और सोशल एक्टिविस्ट को ट्रेनिंग देने वाली एक मशहूर एकेडमी है.
इंडियन काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशंस (ICCR) के प्रेसिडेंट के तौर पर उन्होंने देश की कल्चरल पहचान को दुनियाभर में बढ़ावा देने के लिए भी काम किया है. वह एक लेखक भी हैं और उन्होंने "बियॉन्ड ए बिलियन बैलट्स" जैसी किताबें लिखी हैं, जो गवर्नेंस और डेमोक्रेसी पर फोकस करती हैं.
दिल्ली के नए इंचार्ज बनने से पहले भी वह दिल्ली के मामलों में एक्टिव रहे हैं. वह "अपनी दिल्ली अपनी बात" नाम का एक पॉडकास्ट भी चलाते हैं, जिसके जरिए वह दिल्ली के विकास, क्रिएटिव काम और लोकल मुद्दों पर बात करते हैं.
स्मृति ईरानी का टीवी से राजनीति तक का सफर
स्मृति ईरानी ने अपना करियर एंटरटेनमेंट की दुनिया से शुरू किया और बाद में राजनीति में अपनी जगह बनाई. वह टीवा सीरियल "क्योंकि सास भी कभी बहू थी" में तुलसी के रोल से घर-घर में मशहूर हुईं. इस शो ने उन्हें सबसे पॉपुलर टेलीविजन एक्ट्रेस में से एक बना दिया.
टेलीविजन की दुनिया में अपनी जगह बनाने के बाद, स्मृति ईरानी ने पॉलिटिक्स का रुख किया. 2003 ने स्मृति ईरानी ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुई और पार्टी के संगठनात्मक कामों में एक्टिव रोल निभाने लगीं. इसके बाद, उन्होंने पार्टी में कई जिम्मेदारियां संभालीं और नेशनल लेवल पर एक्टिव हो गईं.
इसके बाद स्मृति ईरानी ने 2004 लोकसभा चुनाव में चांदनी चौक से चुनाव लड़ा, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा. 2010 में, स्मृति ईरानी को BJP का नेशनल सेक्रेटरी बनाया गया, जिससे उन्हें संगठनात्मक तौर पर एक बड़ी जिम्मेदारी मिली. इस दौरान, उन्होंने पार्टी की महिला विंग के अध्यक्ष के तौर पर भी काम किया. अगले साल, 2011 में वह गुजरात से राज्यसभा के लिए चुनी गईं. इसके बाद वह 2017 में फिर से चुनी गईं.
स्मृति ईरानी ने 2014 का लोकसभा चुनाव अमेठी, उत्तर प्रदेश से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा. हालांकि वह चुनाव हार गईं, लेकिन अमेठी में उनकी लगातार एक्टिविटी और चुनावी मुकाबले ने उन्हें नेशनल पॉलिटिक्स में एक अहम हस्ती बना दिया.
2014 में नरेंद्र मोदी की लीडरशिप वाली सरकार में स्मृति ईरानी को ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट मिनिस्ट्री की जिम्मेदारी दी गई थी. इसके बाद, उन्होंने टेक्सटाइल मिनिस्ट्री समेत कई जरूरी केंद्रीय विभाग संभाले. 2017 में उन्हें इन्फॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्ट्री का एडिशनल चार्ज दिया गया.
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने दोबारा अमेठी से राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ा और इस बार उन्होंने जीत हासिल की. मोदी सरकार के दूसरे टर्म में उन्हें महिला और बाल विकास मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी.
हालांकि, वह अमेठी से 2024 का लोकसभा चुनाव हार गईं. इसके बाद, वह केंद्रीय कैबिनेट का हिस्सा नहीं रहीं. अभी, वह BJP की एक वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री के तौर पर जानी जाती हैं.