दिल्ली की हवा ने फिर डराया.. AQI 400 के करीब, बारिश से मिली राहत खत्म!
दिल्ली में कुछ दिन पहले तक बारिश और तेज हवाओं ने दिल्ली-NCR के लोगों को प्रदूषण से राहत दी थी, लेकिन नवंबर शुरू होते ही हालात फिर बिगड़ने लगे हैं. सोमवार 2 नवंबर की सुबह राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई. कई इलाकों में AQI 350 के पार निकल गया.
दिल्ली में प्रदूषण का स्तर एक बार फिर तेजी से बढ़ने लगा है. सोमवार 2 नवंबर की सुबह राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड CPCB के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक सुबह 8 बजे दिल्ली का AQI 310 दर्ज किया गया. वहीं सुबह 10 बजे के अपडेट में यह आंकड़ा 314 तक पहुंच गया. यह रीडिंग दिन का अंतिम औसत नहीं है, बल्कि सुबह के समय की स्थिति है. वैसे भी CPCB के मुताबिक दिन का औसत AQI शाम 4 बजे जारी किया जाता है.
असल में दिल्ली के कई इलाकों में प्रदूषण का स्तर राजधानी के औसत से भी ज्यादा है. AQI डैशबोर्ड के मुताबिक सोमवार सुबह अलग-अलग इलाकों में AQI 242 से 396 के बीच दर्ज किया गया. इनमें रोहिणी सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा, जहां AQI 396 तक पहुंच गया. इसके बाद अलीपुर में 375 और विवेक विहार में 370 AQI दर्ज किया गया. यानी राजधानी के कई हिस्सों में लोगों को सांस लेने के लिए साफ हवा नहीं मिल पा रही है.
रोहिणी में सबसे खराब हवा, अलीपुर और विवेक विहार भी पीछे नहीं
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति को समझने के लिए अलग-अलग इलाकों का AQI देखना जरूरी है. सोमवार सुबह सामने आए आंकड़ों में रोहिणी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में शामिल रहा. यहां AQI 396 दर्ज किया गया, जो बहुत खराब श्रेणी की ऊपरी सीमा के बेहद करीब है.
वहीं अलीपुर में AQI 375 और विवेक विहार में 370 दर्ज किया गया. इन इलाकों में प्रदूषण का स्तर भी लोगों की सेहत के लिए चिंता बढ़ाने वाला है. खासकर सुबह के समय बाहर निकलने वाले लोगों, मॉर्निंग वॉक करने वालों और खुले में काम करने वाले लोगों को ज्यादा परेशानी हो सकती है.
AQI के आंकड़ों से यह भी साफ है कि दिल्ली के सभी इलाकों में प्रदूषण का स्तर एक जैसा नहीं है. कुछ जगहों पर हवा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर हो सकती है, लेकिन राजधानी का कुल औसत भी बहुत खराब श्रेणी में पहुंच चुका है. हालांकि सिर्फ कुछ जगहों की हवा देखकर पूरी दिल्ली की स्थिति का अंदाजा लगाना सही नहीं होगा.
क्या होता है AQI और कब हवा को माना जाता है जहरीला?
AQI यानी Air Quality Index को हिंदी में वायु गुणवत्ता सूचकांक कहा जाता है. इसके जरिए पता चलता है कि किसी इलाके की हवा सांस लेने के लिहाज से कितनी साफ या प्रदूषित है. इसका आंकड़ा जितना ज्यादा होता है, हवा में प्रदूषण की स्थिति उतनी ही खराब मानी जाती है.
CPCB के निर्धारित पैमाने के मुताबिक, AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है.
- 0 से 50: अच्छी हवा (Good).
- 51 से 100: संतोषजनक (Satisfactory).
- 101 से 200: मध्यम (Moderate).
- 201 से 300: खराब (Poor).
- 301 से 400: बहुत खराब (Very Poor).
- 401 से 500: गंभीर (Severe).
दिल्ली का AQI 310 से 314 के बीच रहने का मतलब है कि राजधानी की हवा बहुत खराब श्रेणी में पहुंच चुकी है. वहीं, रोहिणी का 396 तक पहुंचना स्थिति की गंभीरता को और बढ़ाता है. हालांकि, यह अभी गंभीर यानी Severe श्रेणी में नहीं आया है, क्योंकि उसके लिए AQI का 401 या उससे ऊपर होना जरूरी है.
उधर नोएडा से कैथल और हापुड़ तक बढ़ी परेशानी
प्रदूषण का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है. सोमवार सुबह उत्तर भारत के कई दूसरे शहरों में भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गई. इनमें नोएडा, हरियाणा का कैथल और उत्तर प्रदेश का हापुड़ भी शामिल हैं.
दिल्ली से सटे नोएडा में प्रदूषण बढ़ना खास तौर पर चिंता की बात है, क्योंकि दिल्ली-NCR में रहने और काम करने वाले लाखों लोग रोजाना अलग-अलग शहरों के बीच सफर करते हैं. ऐसे में एक शहर की खराब हवा का असर आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है.
कैथल और हापुड़ में भी हवा की गुणवत्ता बहुत खराब श्रेणी में पहुंचने से यह संकेत मिलता है कि प्रदूषण की समस्या अब केवल दिल्ली जैसे बड़े महानगर तक सीमित नहीं रह गई है. उत्तर भारत के कई शहरों में सर्दियों की शुरुआत के साथ हवा की गुणवत्ता बिगड़ने लगी है.
बारिश ने दी थी राहत, अब फिर क्यों बढ़ रहा प्रदूषण?
कुछ दिन पहले दिल्ली-NCR में हुई बारिश और तेज हवाओं ने प्रदूषण से काफी हद तक राहत दिलाई थी. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम समेत आसपास के इलाकों में AQI में सुधार देखने को मिला था. कई स्थानों पर हवा की गुणवत्ता बेहतर होकर ग्रीन जोन तक पहुंच गई थी.
बारिश के दौरान वातावरण में मौजूद धूल के कण नीचे बैठ जाते हैं. वहीं, तेज हवाएं प्रदूषित हवा को एक जगह जमा होने से रोकने में मदद करती हैं. इससे कुछ समय के लिए वायु गुणवत्ता में सुधार हो सकता है. लेकिन यह राहत हमेशा बनी रहे, ऐसा जरूरी नहीं है.
अब मौसम फिर शुष्क होने लगा है. बारिश की संभावना नहीं होने और तापमान में धीरे-धीरे गिरावट के बीच प्रदूषण का स्तर दोबारा बढ़ने लगा है. वातावरण में मौजूद धूल और दूसरे प्रदूषक कणों का असर भी बढ़ सकता है. यही वजह है कि दिल्ली-NCR की हवा एक बार फिर खराब से बहुत खराब श्रेणी की तरफ बढ़ती दिखाई दे रही है.
अगले सात दिन कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम?
मौसम विभाग के 2 नवंबर से 7 नवंबर तक के पूर्वानुमान के मुताबिक, दिल्ली में अगले कुछ दिनों तक मौसम मुख्य रूप से साफ रहने की संभावना है. आसमान में कहीं-कहीं आंशिक रूप से बादल दिखाई दे सकते हैं, लेकिन फिलहाल बारिश की कोई संभावना नहीं जताई गई है.
तापमान की बात करें तो नवंबर के पहले सप्ताह में अधिकतम तापमान 28 से 29 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है. वहीं, न्यूनतम तापमान 16 से 17 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है.
2 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. 3 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री रह सकता है. 4 नवंबर को अधिकतम तापमान में थोड़ी गिरावट के साथ यह 28 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जबकि न्यूनतम तापमान 16 डिग्री रहने की संभावना है.
इसके बाद 5 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. वहीं, 6 और 7 नवंबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है.
मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान आर्द्रता का स्तर 60 से 85 प्रतिशत के बीच रह सकता है. पूरे सप्ताह बारिश की संभावना नहीं होने के कारण प्रदूषण से राहत मिलने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है. हालांकि, मौसम की स्थिति के साथ AQI में बदलाव भी संभव है.
दिल्ली में प्रदूषण रोकने के लिए एक्शन में सरकार
हवा की गुणवत्ता बिगड़ने के साथ दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए निगरानी और कार्रवाई तेज की है. दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने बताया कि सरकार की टीमें सड़कों पर वाहनों की जांच कर रही हैं. इसके साथ ही प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUCC की वैधता और निर्माण स्थलों पर धूल से जुड़े नियमों का पालन भी चेक किया जा रहा है.
सिरसा ने रविवार को ट्विटर पर जानकारी देते हुए बताया कि 1 नवंबर को कुल 14,930 वाहनों की जांच की गई. इस दौरान PUCC नियमों का उल्लंघन करने पर 566 चालान काटे गए. इसके अलावा प्रदूषण से जुड़े नियमों के पालन की जांच के लिए 300 निर्माण स्थलों का निरीक्षण भी किया गया.
पर्यावरण मंत्री ने लोगों से अपील की कि वे अपने वाहनों का PUCC वैध रखें, प्रवेश से जुड़े प्रतिबंधों का पालन करें और निर्माण स्थलों पर धूल रोकने के नियमों को गंभीरता से लें. सरकार का कहना है कि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए केवल प्रशासनिक कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि लोगों का सहयोग भी जरूरी है.
ट्रैफिक पुलिस ने भी बढ़ाई सख्ती, 714 वाहन लौटाए
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए ट्रैफिक पुलिस ने भी GRAP के तहत लागू प्रतिबंधों को लेकर कार्रवाई तेज की है. दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के मुताबिक, 1 नवंबर को कुल 7,279 वाहनों की जांच की गई. इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले 714 वाहनों को वापस लौटाया गया, जबकि 38 वाहनों को जब्त किया गया.
इस कार्रवाई का मकसद प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करना और लागू प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करना है. दिल्ली में सर्दियों के प्रदूषण को देखते हुए 1 नवंबर से शीतकालीन प्रदूषण नियंत्रण उपाय भी लागू किए गए हैं.
हालांकि वाहनों की जांच और निर्माण स्थलों पर कार्रवाई के बावजूद प्रदूषण का बढ़ना बताता है कि राजधानी के सामने चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है. आने वाले दिनों में प्रशासन को लगातार निगरानी और नियमों का सख्ती से पालन कराना होगा.
GRAP स्टेज-2 से क्या बदलेगा?
दिल्ली का AQI 300 के पार पहुंचने के बाद GRAP यानी Graded Response Action Plan के दूसरे चरण से जुड़े उपाय भी महत्वपूर्ण हो गए हैं. GRAP प्रदूषण की स्थिति के हिसाब से लागू होने वाला एक्शन प्लान है. इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता बिगड़ने पर अलग-अलग स्तरों पर प्रदूषण को नियंत्रित करना है.
GRAP के स्टेज-2 के तहत 301 से 400 के बीच AQI रहने पर अतिरिक्त प्रदूषण नियंत्रण उपाय लागू किए जाते हैं. इनमें सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव, धूल नियंत्रण के लिए कदम, सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर निगरानी जैसे उपाय शामिल हैं.
इसका मकसद प्रदूषण को गंभीर श्रेणी तक पहुंचने से रोकना है. हालांकि, किसी भी प्रतिबंध या कार्रवाई की वास्तविक स्थिति संबंधित सरकारी आदेशों और लागू निर्देशों के आधार पर तय होती है.
सेहत पर कितना असर डाल सकती है ऐसी हवा?
बहुत खराब श्रेणी में पहुंच चुकी हवा का असर लोगों की सेहत पर पड़ सकता है. लंबे समय तक ऐसी हवा में सांस लेने से स्वस्थ लोगों को भी सांस लेने में परेशानी, खांसी, गले में जलन और आंखों में चुभन जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
जिन लोगों को पहले से अस्थमा, सांस की बीमारी या दिल से जुड़ी परेशानी है, उनके लिए प्रदूषण का बढ़ता स्तर ज्यादा जोखिम भरा हो सकता है. बच्चों और बुजुर्गों को भी विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है.
ऐसे में जरूरी है कि लोग सुबह और देर शाम के समय बाहर ज्यादा देर तक रहने से बचें, खासकर जब AQI बहुत खराब हो. बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क इस्तेमाल करना मददगार हो सकता है. घर में धूल कम रखने, खिड़कियां बंद रखने और प्रदूषण का स्तर ज्यादा होने पर बाहर व्यायाम करने से बचने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं.
अभी राहत के आसार कम, AQI पर रखनी होगी नजर
दिल्ली-NCR में नवंबर की शुरुआत के साथ प्रदूषण का बढ़ना लोगों की चिंता बढ़ा रहा है. बारिश से मिली राहत अब खत्म होती नजर आ रही है. आने वाले दिनों में बारिश नहीं होने और मौसम मुख्य रूप से साफ रहने के पूर्वानुमान के बीच प्रदूषण से राहत मिलना आसान नहीं दिख रहा है. हालांकि, हवा की दिशा, गति और तापमान जैसे कारक AQI को प्रभावित कर सकते हैं.
फिलहाल दिल्ली-NCR के लोगों को अपने इलाके की हवा की गुणवत्ता पर नजर रखनी होगी. साथ ही प्रशासन के प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करना भी जरूरी है. एजेंसी इनपुट्स