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रायपुर में अन्नदाता गर्जना रैलीः धान की MSP बढ़ाने की मांग, एक नजर में जानिए किसानों की सभी डिमांड

छत्तीसगढ़ में किसानों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. उन्होंने रायपुर में अन्नदाता गर्जना रैली निकालकर अपनी मांगें रखी है. आइए जानते हैं कि किसानों की क्या-क्या मांगें हैं.

Written By Manish Kushawah
Published: Oct 27, 2026, 04:26 PM IST | Updated: Oct 27, 2026, 04:31 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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छत्तीसगढ़ में इस समय किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर देखने को मिल रहा है. धान खरीदी समेत कई अन्य मांगों को लेकर किसान संगठनों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राजधानी रायपुर में अन्नदाता गर्जना रैली निकालकर किसान महानदी भवन का घेराव करने के लिए पहुंचे. रैली के दौरान किसानों ने अपनी कई मांगें रखीं. आइए जानते हैं कि इन किसानों की क्या-क्या मांगें हैं?

रैली के दौरान किसानों ने धान का समर्थन मूल्य बढ़ाने, बकाया राशि का तत्काल भुगतान करने और धान खरीदी की व्यवस्था में सुधार समेत कई मांग रखी. किसानों की सबसे बड़ी मांग यह है कि धान की खरीदी 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से की जाएगी. साथ ही 2022-23 की धान खरीदी की बकाया 1700 करोड़ रुपए की राशि किसानों को तुरंत देने की मांग की है.

खाद की बिक्री रोकने की भी रखी मांग

किसान संगठनों का कहना है कि धान खरीदी 15 नवंबर से 15 फरवरी तक करने, टोकन व्यवस्था में सुधार, बाढ़ से प्रभावित फसलों का सर्वे कर मुआवजा देने और खाद की अधिक कीमत पर बिक्री रोकने की भी मांग की है. इसके अलावा, किसानों ने गौवंदन योजना लागू करने, अधूरी सिंचाई परियोजनाओं को जल्द पूरा करने और मक्का व गेहूं की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर करने की मांग शामिल है.

एक नजर में किसानों की मुख्य मांगे

1. गौ सरक्षणः गौवंदन योजना लागू होनी चाहिए. साथ ही जी-राम-जी योजना को गौ संरक्षण एवं संवर्धन से जोड़ा जाए. 
2. बकाया भुगतानः साल 2022-23 की धान खरीदी का बकाया 1700 करोड़ रुपए की राशि तुरंत दी जाए. 
3. धान का समर्थन मूल्यः तीन सालों की 258 रुपए की वृद्धि का लाभ देकर 3358 रुपए प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी की मांग की है. 
4. फल-सब्जी किसानः कृषक उन्नति योजना में शामिल किया जाना चाहिए. 
5. धान-खरीदी अवधिः 15 नवंबर से 15 फरवरी तक धान खरीदी होनी चाहिए. 
6. तौल सीमाः प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम की सीमा का आदेश जारी हो. 
7. फसल मुआवजाः बाढ़ से हुए नुकसान का सर्वे कर उचित भरपाई की मांग की. 
8. टोकन व्यवस्थाः बड़े किसानों को 5, लघु किसानों को 3 और सीमांत किसानों को 2 टोकन देने की मांग की. 
9. खाता समर्पणः दबाव डालकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया बंद होनी चाहिए. 
10. सिंचाई परियोजनाएंः अरपा-भैंसाझार समेत अधूरी योजनाएं जल्द पूरी हों और पैटरी हाईडैम को मंजूरी मिले.
11. खाद की कीमतः अधिक मूल्य पर खाद बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. 
12. भूमि अधिग्रहणः उदयपुर डिक्लेरेशन के मुताबिक प्रक्रिया अपनाई जाए. 
13. वैकल्पिक फसलेंः जल संरक्षण के लिए मक्का और गेहूं की खरीदी भी समर्थन मूल्य पर हो.

(रिपोर्टः राजेश निषाद, रायपुर)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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