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भगवान बुद्ध के महाप्रसाद वाले चावल की कोरबा में खेती, 400 रुपये किलो तक है कीमत

छत्तीसगढ़ के कोरबा में पहली बार उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध काला नमक धान की प्राकृतिक खेती का ट्रायल किया गया है. 300-400 रुपये किलो बिकने वाला यह सुगंधित चावल किसानों की आय बढ़ाने की उम्मीद जगा रहा है.

Written By Manish Kushawah
Published: Nov 02, 2026, 04:11 PM IST | Updated: Nov 02, 2026, 04:14 PM IST
Image Credit: ZEE NEWS
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छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले को 'काला सोना' उगलने वाली धरती कहा जाता है. कोयले की नगरी कोरबा में अब 'काला नमक' धान की खुशबू महकने लगी है. मान्यता है कि काला नमक धान से निकला चावल बेहद खुशबूदार होता है.

यह वही चावल बताया जाता है, जिससे भगवान बुद्ध का महाप्रसाद बनाया जाता है. इतना ही नहीं, लोग इसे सेहत के लिए कुदरत का नायाब तोहफा भी मानते हैं. इस चावल की बाजार में कीमत 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक बताई जाती है. इस खास चावल की खेती का कोरबा में पहला सफल प्रयोग शुरू हो चुका है.

प्राकृतिक खेती का सफल ट्रायल

बता दें कि उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर और गोरखपुर के तराई क्षेत्रों की पहचान मानी जाने वाली इस ऐतिहासिक फसल 'काला नमक' धान ने अब छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में दस्तक दी है. कृषि विभाग की पहल पर जिले में पहली बार प्राकृतिक खेती के तहत इसका सफल ट्रायल किया गया है.

डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद

वहीं शहर से लगे ग्राम रूमगरा और रिस्दी में 50-50 डिसमिल के तीन अलग-अलग खेतों में इसकी बुवाई की गई है. मकसद साफ है- कोरबा की आबोहवा में इस धान की पैदावार, सुगंध और गुणवत्ता को परखना. रूमगरा के किसान विजय सिंह कंवर, शिवकुमार कंवर और रिस्दी के संजय कंवर इस बदलाव की अगुवाई कर रहे हैं.

इस चावल की खासियत सिर्फ इसका स्वाद और खुशबू नहीं, बल्कि इसके पोषक गुण भी हैं. काला नमक चावल में भरपूर मात्रा में प्रोटीन, आयरन, जिंक और जरूरी विटामिन पाए जाते हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्य चावल के मुकाबले कम होता है, जिसके चलते यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है.

सामान्य धान की कीमतें सीमित

किसान विजय सिंह कवर का कहना है कि बाजार में जहां सामान्य धान की कीमतें सीमित होती हैं, वहीं यह चावल 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिकता है. ऐसे में यह प्रयोग किसानों की माली हालत बदलने का बड़ा जरिया बन सकता है.

वहीं ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी संजय पटेल का कहना है कि इस अनूठे धान के साथ एक पावन इतिहास भी जुड़ा है. धार्मिक और ऐतिहासिक मान्यताओं के मुताबिक, जब भगवान गौतम बुद्ध सिद्धार्थनगर क्षेत्र से गुजरे थे, तब उन्होंने स्थानीय लोगों को आशीर्वाद स्वरूप यह सुगंधित धान भेंट किया था. इसी वजह से इसे 'बुद्ध का महाप्रसाद' भी कहा जाता है.

किसानों में उत्सुकता बढ़ गई

आज 'बुद्ध के महाप्रसाद' की काली बालियों को कोरबा के खेतों में लहलहाते देखकर आसपास के दूसरे गांवों के किसानों में भी इसे लेकर उत्सुकता बढ़ गई है. वे अभी से इसके बीज की मांग करने लगे हैं. इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि कोरबा अब सिर्फ अपनी खदानों और बिजली उत्पादन के लिए ही नहीं, बल्कि उन्नत और प्राकृतिक खेती के नए प्रयोगों के लिए भी पहचाना जा सकता है.

50-50 डिसमिल के छोटे से रकबे से शुरू हुआ 'काला नमक' धान का यह सफर अगर पूरी तरह कामयाब रहता है, तो यह कोरबा के किसानों की तकदीर और तस्वीर, दोनों बदलने का दम रखता है.

ये भी पढ़ेंः छुईखदान के पान की कहानी: कभी पाकिस्तान तक थी पहचान, अब नए अंदाज में हो रही वापसी

(रिपोर्टः नीलम पड़वार, कोरबा)

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मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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