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कोंडागांव में तीन दिन की मूसलाधार बारिश के बाद मौसम साफ हो गया है, लेकिन इसका असर बाजार और खेतों में दिख रहा है. फसलों को नुकसान और सब्जियों की कम आवक से टमाटर के दाम 20 से बढ़कर 50 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं.
कोंडागांव में लगातार तीन दिनों की मूसलाधार बारिश के बाद अब मौसम साफ हो गया है और लोगों ने राहत की सांस ली है. हालांकि, कोंडागांव बारिश, खेतों में भरा पानी और सब्जियों की कम आवक ने नई परेशानी खड़ी कर दी है. लगातार करीब 48 घंटे हुई बारिश का असर अब बाजार में साफ नजर आ रहा है. जो टमाटर कुछ दिन पहले 20 रुपये किलो बिक रहा था, वही अब 50 रुपये किलो तक पहुंच गया है. दूसरी सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं. जी मीडिया टीम ने कोंडागांव के बाजार से लेकर खेतों तक पहुंचकर हालात का जायजा लिया.
रोजमर्रा की खरीदारी महंगी
बारिश थमने के बाद भी कोंडागांव सब्जी बाजार में इसकी मार साफ दिखाई दे रही है. आम लोगों का कहना है कि सब्जियों के दाम बढ़ने से रोजमर्रा की खरीदारी महंगी हो गई है. इसका सीधा असर घर के बजट पर पड़ रहा है. वहीं सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि बारिश के कारण बाहर से सब्जियों की आवक कम हुई है, इसलिए दाम बढ़े हैं. टमाटर की कीमत इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो कुछ दिन पहले 20 रुपये किलो था. अब 50 रुपये किलो तक बिक रहा है. दूसरी सब्जियों के भाव में भी बढ़ोतरी हुई है.
खेतों में पानी, फसलें प्रभावित
दूसरी तरफ कोंडागांव किसानों की फसल पर भी लगातार बारिश का असर पड़ा है. कई खेतों में पानी भर गया, जिससे सब्जियों समेत दूसरी फसलों को नुकसान पहुंचा है. किसानों का कहना है कि खेत से पानी जल्द नहीं निकला तो नुकसान और बढ़ सकता है. लगातार बारिश के कारण खेतों में पानी जमा रहा. इसका सीधा असर सब्जियों की फसल पर पड़ा है. किसानों का कहना है कि अभी से फसल प्रभावित होने के चलते आगे उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में कोंडागांव में बारिश से फसल नुकसान की चिंता किसानों के बीच बनी हुई है.
बारिश थमी, परेशानी अब भी जारी
कोंडागांव में मौसम भले ही साफ हो गया हो, लेकिन कोंडागांव बारिश का असर अभी खत्म नहीं हुआ है. खेतों में फसल खराब होने से सब्जियों की आवक प्रभावित हुई है और बाजार में दाम बढ़ गए हैं. इसका सीधा असर आम लोगों की रसोई और जेब पर पड़ रहा है. एक तरफ किसान खेत में पानी और खराब होती फसल को लेकर परेशान हैं, तो दूसरी तरफ लोग महंगी सब्जियों से परेशान हैं. यानी तीन दिन की बारिश थम गई, लेकिन उसकी मार अब बाजार से लेकर किसानों के खेतों और आम आदमी के घर तक दिखाई दे रही है.