ग्राउंड रिपोर्ट: न डॉक्टर, न नर्स… 2500 रुपये के सफाईकर्मी के भरोसे मरीजों की जिंदगी, बयानार में स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के बयानार स्वास्थ्य केंद्र में स्टाफ की कमी के बीच सफाईकर्मी से मरीजों का इलाज कराए जाने का मामला सामने आया है. जी मीडिया के कैमरे पर सफाईकर्मी ने इंजेक्शन लगाने, ड्रिप चढ़ाने, दवाइयां देने और टांके लगाने जैसे काम करने की बात स्वीकार की.
छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के बयानार में स्वास्थ्य व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम की निगरानी पर सवाल खड़े करती है. जी मीडिया के कैमरे पर सफाईकर्मी गणेश शोरी ने स्वीकार किया कि वह इंजेक्शन लगाने, ड्रिप चढ़ाने, दवाइयां देने और टांके लगाने तक का काम करता है. सफाईकर्मी गणेश शोरी के इस खुलासे ने स्वास्थ्य विभाग की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
जीवन दीप समिति के तहत महज 2500 रुपए महीने पर काम कर रहे गणेश शोरी ने बताया कि अस्पताल में 21 गांवों के मरीज इलाज कराने आते हैं. हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य केंद्र में न तो मेडिकल ऑफिसर है और न ही पर्याप्त स्टाफ. ऐसे में सवाल उठता है कि सीमित संसाधनों और कर्मचारियों के अभाव में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कैसे मिल पाएंगी.
सफाईकर्मी करता है इलाज
जी मीडिया संवाददाता से बात करते हुए सफाईकर्मी गणेश कुमार शोरी ने बताया कि 'दो साल से सबकुछ संभाल रहा हूं. डिलीवरी छोड़कर इंजेक्शन लगाना, ड्रिप चढ़ाना, टांके लगाना सब करता हूं. जीवन दीप समिति से 2500 रुपए महीना मिलता है, पैसे कम हैं, मगर सम्मान मिलता है, इसलिए ये सारे काम करता हूं.'
बयानार स्वास्थ्य केंद्र में 7 पद खाली
आयुर्वेदिक डॉक्टर प्रभजन पुरोहित ने भी स्टाफ की कमी की बात मानी है. उन्होंने कहा कि बयानार स्वास्थ्य केंद्र में मेडिकल ऑफिसर, तीन स्टाफ नर्स, महिला आरएचओ, फार्मासिस्ट और ड्रेसर समेत सात पद खाली है. डॉक्टर ने भी सफाईकर्मी से मदद लेने की बात स्वीकार की है. लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ काम सिखा देने भर से प्रशिक्षित और योग्य स्वास्थ्यकर्मियों की कमी पूरी हो सकती है? सबसे अहम बात यह है कि आखिर मरीज की सुरक्षा और सही इलाज मुहैया कराने की जिम्मेदारी किसकी है?
CMHO को नहीं है मामले की जानकारी
सीएमएचओ डॉ. आर.के. चतुर्वेदी ने कहा कि 'ऐसा अभी तक हमारी जानकारी में नहीं है. अगर ऐसा हो रहा है तो यह गंभीर मामला है. जांच करवाएंगे, दोषी पाए जाने पर नोटिस जारी किया जाएगा और व्यवस्था में सुधार किया जाएगा.' सीएमएचओ जांच का भरोसा दे रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि अगर स्वास्थ्य केंद्र में ऐसी स्थिति लंबे समय से है, तो विभाग की निगरानी व्यवस्था कहां थी?
ये भी पढ़ें: पैसों के लिए जिगर के टुकड़े का सौदा: 1. 80 लाख में मां ने 10 माह के बच्चे को बेचा, पश्चिम बंगाल से जुड़े हैं तार
(चम्पेश जोशी की रिपोर्ट)