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चक्रवाती तूफान 'अर्नब' और अन्य सक्रिय मौसमी प्रणालियों के प्रभाव के कारण छत्तीसगढ़ में मौसम बदल गया है. राज्य के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी से लेकर भारी बारिश तक की स्थिति बनी हुई है, जिसका असर आम जनजीवन पर पड़ा है. विशेष रूप से उत्तरी छत्तीसगढ़ में भारी बारिश हुई है.बलरामपुर जिले के कुसमी में सबसे अधिक 28 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई. इसके अलावा चंदो, सामरी, कुनकुरी, तमनार और रायगढ़ में भी भारी बारिश हुई है.
शुक्रवार को तापमान के लिहाज से जगदलपुर सबसे गर्म (30.3°C) और पेंड्रा रोड सबसे ठंडा (17.8°C) स्थान दर्ज किया गया. मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले दो दिनों में पूरे राज्य में अधिकतम तापमान 3-4 डिग्री तक बढ़ सकता है.
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय तीन मौसमी प्रणालियां एक निम्न दबाव का क्षेत्र उत्तरी छत्तीसगढ़-पूर्वी मप्र पर दूसरा दक्षिण अंडमान सागर पर और एक मौसमी द्रोणिका एक्टिव हैं. इसके प्रभाव से आज शनिवार को भी बस्तर संभाग, रायपुर और अन्य हिस्सों में गरज-चमक, वज्रपात और हल्की से मध्यम बारिश की चेतावनी जारी की गई है.
राजधानी रायपुर में आसमान मुख्य रूप से बादलों से घिरा रहने की संभावना है और कुछ इलाकों में बारिश हो सकती है. इसके अलावा, शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने के भी आसार हैं. शहर का तापमान अधिकतम 30 डिग्री और न्यूनतम 21 डिग्री के आसपास रहने की उम्मीद है.
इसके अलावा अंडमान-निकोबार के पास समुंदर में भी एक कम दबाव का सिस्टम बना हुआ है, जो काफी एक्टिव है. इसकी ऊंचाई 5.8 किलोमीटर तक है. वहीं, उत्तर-पश्चिमी यूपी से लेकर उत्तरी छत्तीसगढ़ और पूर्वी एमपी तक हवा की एक लाइन बनी हुई है, जिसकी वजह से मौसम में हो रही ये सारी हलचल और तेज हो गई है.
तूफान के कारण बस्तर जिले में लगभग 30,522 हेक्टेयर धान की फसल खतरे में है, जिससे करीब 15 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है. भारी बारिश की वजह से कई खेतों में खड़ी फसलें पानी में डूब गई हैं और पूरी तरह पक चुकी धान की फसलें जमीन पर गिर गई हैं. इसके अलावा तूफान का असर बस्तर, रायपुर, बिलासपुर और सरगुजा संभागों में भी देखने को मिला. लगातार दो दिनों तक हुई बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में तैयार धान की फसलें गिर गईं और अब वहां पानी भर गया है. किसान दिवाली से ठीक पहले अपनी फसल की कटाई करने की योजना बना रहे थे. ऐसे में जिन किसानों ने बीज और खाद खरीदने के लिए कर्ज लिया था उन पर अब दोहरी मार पड़ी है.