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पहाड़ चढ़ो, नेटवर्क खोजो, फिर अंगूठा लगाओ… छत्तीसगढ़ में फ्री राशन के लिए जद्दोजहद, बुजुर्गों की दर्दभरी कहानी

छत्तीसगढ़ के एमसीबी जिले में फ्री राशन लेने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ रहा है. लेकिन उसके बावजूद भी कई लोगों को राशन हाथ नहीं लग पा रहा है. कई बार शिकायत के बावजूद भी स्थायी समाधान नहीं हुआ है. हर बार जांच की बात कही जा रही है.

पहाड़ चढ़ो, नेटवर्क खोजो, फिर अंगूठा लगाओ… छत्तीसगढ़ में फ्री राशन के लिए जद्दोजहद, बुजुर्गों की दर्दभरी कहानी
Image Credit: ZEE NEWS

एक तरफ सरकार गरीबों को राशन देने के लिए डिजिटल व्यवस्था लागू कर रही है. दूसरी तरफ कई परिवारों के लिए यह मुसीबत बनकर सिर पर आ रही है. ऐसा ही छत्तीसगढ़ के मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के भरतपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत गढ़वार और उसके आसपास के गांवों में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल, इन गांवों में मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलने के चलते ग्रामीणों को आज भी राशन लेने के लिए पहाड़ चढ़ने पड़ रहे हैं. बुजुर्गों के लिए यह किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. हालात ऐसे हैं कि नेटवर्क की तलाश में करीब 150 मीटर ऊंचे पहाड़ पर पहुंचने के बाद भी फिंगरप्रिंट सत्यापन की कोई गारंटी नहीं है.

कितने लोगों को समस्या

मिली जानकारी के मुताबिक, करीब पांच गांवों के लगभग 450 राशन कार्ड धारक इस समस्या से जूझ रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में नेटवर्क नहीं मिलने के कारण ई-पॉस मशीन पर बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाता है. ऐसे में फिंगरप्रिंट लगवाने के लिए उन्हें पहाड़ पर जाना पड़ता है. कई बार कमजोर नेटवर्क के कारण घंटों मशक्कत के बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होती है. सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों और शारीरिक रूप से कमजोर लोगों को उठानी पड़ रही है.

पहाड़ पर चढ़ना पड़ रहा

गढ़वार की रहने वाली बुजुर्ग महिला दुआसिया ने अपनी पीड़ा को बताते हुए कहा कि उम्र के इस पड़ाव पर उनके लिए सामान्य रूप से चलना-फिरना भी मुश्किल होता जा रहा है, लेकिन राशन पाने के लिए उन्हें पहाड़ चढ़ने की चिंता सताती है. उन्होंने कहा कि यदि कोई सहारा देकर पहाड़ पर पहुंचा दे, तो वे किसी तरह फिंगरप्रिंट लगवा सकती हैं.


कई लोगों को है परेशानी

वहीं, रमर्जिया, सत्यवती, जयकरण सिंह और रामप्रसाद सिंह भी इसी समस्या से परेशान हैं. इन लोगों का कहना है कि कई बार बायोमेट्रिक सत्यापन के लिए दो से तीन दिनों तक पहाड़ के चक्कर लगाने पड़ते हैं. सवाल यह है कि जब राशन जीवन की बुनियादी जरूरत है, तो उसे पाने के लिए बुजुर्गों को इस तरह संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है.

नहीं मिला स्थायी समाधान

दुकान विक्रेता रामफल पंडो का कहना है कि नेटवर्क की समस्या के कारण राशन वितरण का काम प्रभावित हो रहा है. उनका कहना है कि नेटवर्क मिलने के बाद भी इंटरनेट की गति इतनी धीमी रहती है कि 100 लोगों के फिंगरप्रिंट सत्यापन में मुश्किल से 15 लोगों की प्रक्रिया पूरी हो पाती है. उन्होंने बताया कि इस समस्या से खाद्य निरीक्षक और जिला प्रशासन को अवगत कराया गया है. कलेक्टर के समक्ष आवेदन देकर भी समाधान की मांग की. लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं मिला है.

दोबारा जांच की बात कही

मामले में खाद्य निरीक्षक प्रवीण मिश्रा ने बताया कि गढ़वार क्षेत्र में आइडिया यानी वर्तमान वीआई का नेटवर्क उपलब्ध है. वे पहले भी मौके पर जाकर नेटवर्क की स्थिति का निरीक्षण कर चुके हैं. उस दौरान नेटवर्क मिला था. हालांकि, ग्रामीणों की शिकायत को देखते हुए उन्होंने दोबारा मौके पर जाकर जांच करने की बात कही है.

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About the Author

Manish Kushawah

Manish Kushawah

मनीष कुशवाह डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें टीवी और डिजिटल मीडिया में 5 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर के रूप में काम कर रहे हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीति, क्राइम, कृषि व्यवस्था और ग्रामीण (हाइपरलोकल) सरोकारों से जुड़ी खबरों की गहराई से कवरेज करना उनकी एक्सपर्टीज है.नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन (NIMC) से पत्रकारिता में डिप्लोमा पूरा करने के बाद मनीष ने मीडिया जगत में अपना सफर शुरू किया. ज़ी न्यूज़ से पहले उन्होंने News18 Hindi (Local18), इंडिया न्यूज़ और जनता टीवी जैसे प्रमुख समाचार चैनलों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में काम किया है. इस दौरान उन्होंने न्यूज़ प्लानिंग, कंटेंट आइडिएशन और डेस्क मैनेजमेंट की अहम जिम्मेदारियां संभाली हैं. वे खबरों की प्रामाणिकता और ग्राउंड रियलिटी को प्राथमिकता देते हैं, ताकि पाठकों तक सटीक और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे.मनीष कुशवाह से आप Manish2.Kumar@india.com पर ईमेल के माध्यम से संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और फेसबुक के जरिए भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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