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बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान का कहर: छत्तीसगढ़ में 28-29 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट, 140KM की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

छत्तीसगढ़ में मौसम बदलने की संभावना है. 28-29 अक्टूबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है, जिसका सबसे ज्यादा असर राज्य के दक्षिणी और मध्य हिस्सों में देखने को मिल सकता है.

Written By Ranjana Kahar
Published: Oct 26, 2026, 09:21 AM IST | Updated: Oct 26, 2026, 12:41 PM IST
Image Credit: छत्तीसगढ़ में 28-29 अक्टूबर को भारी बारिश का अलर्ट
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Cyclone Alert: बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान का आंशिक असर आज से छत्तीसगढ़ में महसूस किया जाने लगेगा. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौसम विभाग (IMD) ने 28 और 29 अक्टूबर के लिए राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश और आंधी-तूफान को लेकर अलर्ट जारी किया है. इस दौरान 140 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से चलने वाली विनाशकारी हवाएं चलने की आशंका है.

दक्षिणी और मध्य छत्तीसगढ़ में तूफान का सबसे ज्यादा असर

तूफान का सबसे व्यापक और गंभीर असर दक्षिणी और मध्य छत्तीसगढ़ के इलाकों में देखने को मिल सकता है. बस्तर संभाग और इसके आसपास के कई जिलों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश होने की संभावना है. मौसम में आए इस अचानक बदलाव से जनजीवन और परिवहन व्यवस्था प्रभावित हो सकती है. इसलिए, स्थानीय प्रशासन को अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए हैं.

आज कैसा रहेगा मौसम

मौसम विभाग के अनुसार आज (सोमवार) पूरे राज्य में मौसम शुष्क रहने का अनुमान है. किसी भी इलाके के लिए बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया गया है. जबकि कल 27 अक्टूबर से बारिश का दौर शुरू हो सकता है.

फसलों पर सबसे ज्यादा खतरा

इस चक्रवाती तूफान से राज्य के कृषि क्षेत्र और फसलों पर सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है. इस समय धान, दालें और तिलहन की फसलें पूरी तरह पक चुकी हैं और कई इलाकों में इनकी कटाई या तो शुरू हो चुकी है या जल्द ही शुरू होने वाली है. तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण इस बात का बड़ा खतरा है कि ये फसलें खेतों में गिरकर बर्बाद हो सकती हैं, या फिर पानी में डूबकर नष्ट हो सकती हैं.

यह भी पढ़ें: MP में चक्रवाती तूफान का बड़ा खतरा! कई जिलों में बिगड़ेगा मौसम...भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट
 

कृषि विश्विद्यालय ने जारी की एडवाइजरी

इसे ध्यान में रखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय ने राज्य के किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी और सलाह जारी की है. कृषि विश्वविद्यालय ने किसानों को सलाह दी है कि वे कटी हुई फसलों को तुरंत सुरक्षित, सूखी जगहों या गोदामों में पहुंचा दें. यदि कटी हुई फसलें अभी भी खेतों में हैं, तो उन्हें तिरपाल या प्लास्टिक की शीट से अच्छी तरह ढक देना चाहिए. जिन खेतों में फसलें अभी भी खड़ी हैं, वहां जलभराव को रोकने के लिए तुरंत पानी निकासी का उचित इंतजाम करना चाहिए, क्योंकि पानी जमा होने से फसलों की जड़ें खराब हो सकती हैं.
 

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रंजना कहार एक डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें न्यूज़ मीडिया और डेस्क ऑपरेशंस के क्षेत्र में 4 सालों से ज्यादा का अनुभव है. वर्तमान में वे Zee News (MP-CG) की डिजिटल टीम में सब-एडिटर की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की राजनीतिक हलचलों, क्राइम और स्थानीय मुद्दों (हाइपरलोकल खबरों) की सटीक, निष्पक्ष व तथ्य-आधारित कवरेज में उनकी एक्सपर्टीज है.छत्तीसगढ़ के प्रतिष्ठित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (बिलासपुर) से पत्रकारिता में मास्टर डिग्री पूरी करने के बाद रंजना ने अपने करियर की शुरुआत ETV भारत से की थी. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने APN न्यूज़ के साथ भी काम किया है. कंटेंट एडिटिंग, न्यूज़ प्रोडक्शन और डेस्क मैनेजमेंट पर मजबूत पकड़ होने के कारण वे रीडर्स तक खबरें तेजी, गुणवत्ता और प्रामाणिकता के साथ पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं.रंजना कहार से आप ranjana.kahar@india.com पर ईमेल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा, एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर भी उनसे सीधा संवाद कर सकते हैं.
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