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बस्तर जिले में कुपोषण के खिलाफ लड़ाई जारी है. बीते वर्षों के मुकाबले कुपोषण की दर में जरूर कमी आई है, लेकिन अब भी बस्तर जिले में 13,700 से अधिक बच्चे कुपोषित हैं. ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर कुपोषण को जड़ से खत्म करने के प्रयास जमीनी स्तर पर क्यों नजर नहीं आते? सर्वाधिक कुपोषित बच्चों की संख्या वाले जिलों में बस्तर भी शामिल है. जिले के 2 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों में 81 हजार बच्चे पंजीकृत हैं, इनमें से 13,700 से अधिक बच्चे कुपोषण से जूझ रहे हैं.
कुपोषण को लेकर कम वजन, दुबलापन और बौनापन के अलावा अति गंभीर कुपोषित श्रेणी में भी बच्चों की गणना की जाती है. इस मामले में छत्तीसगढ़ में आदिवासी समुदाय की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है. महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि राज्य गठन के दौरान बस्तर में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत थी, जबकि मार्च 2024 के आंकड़ों के अनुसार यह 22.43 प्रतिशत थी. वहीं, इस साल यह आंकड़ा घटकर 17 प्रतिशत तक पहुंच गया है. जिले के बस्तानार, दरभा और बकावंड जैसे ब्लॉकों में कुपोषण बाकी विकासखंडों की तुलना में ज्यादा है.
पहले कितना था कुपोषण
महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी मनोज सिन्हा का कहना है कि जब राज्य नया बना था, उस समय बस्तर में कुपोषण की दर 52 प्रतिशत थी. इसके बाद अब यह घटकर 17 प्रतिशत हो गई है. मार्च 2024 में यह दर 22.43 प्रतिशत थी. उन्होंने कहा कि कुपोषण के मामले में काफी अच्छी प्रगति हुई है और विभाग की टीम ने लगातार मेहनत की है. शासन की ओर से इम्यूनाइजेशन, अंडरवेट बच्चों की पहचान, पोषण आहार वितरण और जागरूकता अभियान पर काम किया जा रहा है.
कितनी है कुपोषण की दर
उन्होंने बताया कि गंभीर रूप से कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए NRC की मदद ली जा रही है. इसके साथ ही डॉक्टरों की मदद से हेल्थ कैंप लगाए जाते हैं और जरूरत के मुताबिक अस्पताल की दवाइयां और विभाग की ओर से उपलब्ध दवाइयां भी दी जाती हैं. अधिकारी के मुताबिक, मार्च 2024 में कुपोषण की दर 22.43 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 17 प्रतिशत रह गई है. विभाग का कहना है कि कुपोषण कम करने के लिए कई स्तरों पर लगातार काम किया जा रहा है.
कुपोषण के कितने कारण?
मनोज सिन्हा ने कहा कि कुपोषण के कई कारण होते हैं और इसमें मेडिकल पहलू भी शामिल हैं. बस्तर में मलेरिया जैसी स्थानीय बीमारी के प्रकोप का असर महिलाओं और बच्चों पर भी पड़ता है. मलेरिया के कारण ब्लड काउंट कम होने से शरीर कमजोर हो सकता है, जिससे कुपोषण की स्थिति भी प्रभावित होती है. ऐसे में मेडिकल हेल्प, इलाज, NRC और हेल्थ कैंप के जरिए विभाग लगातार प्रयास कर रहा है. अधिकारी ने कहा कि कुपोषण के खिलाफ उनकी पूरी टीम मेहनत कर रही है और जितनी जल्दी सफलता मिलेगी, उतना ही उन्हें गर्व महसूस होगा.
(रिपोर्टः अनूप अवस्थी, जगदलपुर)