बाजार में अमंगल: ट्रंप की जिद, तेल की आग, डॉलर की मार से शेयर बाजार बेहाल, 30 मिनट में डूबे ₹4.75 लाख करोड़
Share Market 29 September: शेयर बाजार में आज भी भारी गिरावट आई. सेंसेक्स 700 अंक की गिरावट के साथ खुला. बाजार की गिरावट के चलते 30 मिनट के भीतर निवेशकों के करीब 4.75 लाख करोड़ डूब गए.
Share market: शेयर बाजार में गिरावट का दौर खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. वैश्विक तनाव, खाड़ी युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों में जारी तेजी स्टॉक मार्केट पर हावी हो रही है. बीते हफ्ते की गिरावट सोमवार को और तेज हो गई. मंगलवार को बाजार बड़ी गिरावट के साथ खुला. सेंसेक्स और निफ्टी दोनों 1.5% तक फिसल गए.
सेसेंक्स 700 अंक तक फिसला
शेयर मार्केट में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट जारी है. सोमवार, 28 सितंबर को सेंसेक्स 1124 अंक गिरावट के साथ 72,772 पर बंद हुआ, निफ्टी में 360 अंक फिसलकर 22,780 पर बंद हुआ. मंगलवार को सेंसेक्स 700 प्वाइंट की गिरावट के साथ 72,633 पर खुला , जबकि Nifty 50 आज 166 अंक की गिरावट के साथ 22,650 पर खुला.
30 मिनट में डूबे 4.75 लाख करोड़ रुपये
29 सितंबर को बाजार में गिरावट के चलते बीएसई पर लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप 4,75,43,563.067 करोड़ से गिरकर 4,70,78,191.10 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यानी बाजार खुले के 30 मिनट के भीतर मार्केट कैप 4,65,371.967 करोड़ घट गया. सोमवार को इसमें 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक की गिरावट आई थी. बीते दो दिनों में बाजार से 12 लाख करोड़ रुपये स्वाहा हो चुके हैं.
बाजार में क्यों आ रही है इतनी बड़ी गिरावट
बाजार में गिरावट के पीछे कई फैक्टर्स जिम्मेदार है. सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान का युद्ध है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से जंग रोकने से इनकार कर दिया है. जिसके बाद से बाजार में असमंजस की स्थिति बनी हुई है. जिसके बाद अमेरिका-ईरान में जल्द डील के आसार नहीं दिख रहे हैं. तनाव बढ़ने की आशंका के बीच बाजार में दबाव बना हुआ है.
कच्चे तेल की कीमतों में फिर से तेजी
एक तरफ युद्ध खत्म नहीं हो रहा है और दूसरी तरफ कच्चे तेल के दाम बढ़ रहे हैं. कच्चे तेल की कीमत 105-106 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच चुकी है. तेल के बढ़ते दाम के साथ महंगाई बढ़ रही है. बढ़ती महंगाई केंद्रीय बैंकों पर ब्याज दर बढ़ाने का प्रेशर बढ़ाती है. अमेरिका-जापान के सेंट्रल बैंकों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर दी है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की ओर से भी रेपो रेट में बढ़ोतरी का खतरा बना हुआ है. जिसकी वजह से निवेशकों में घबराहट है.
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की तेजी निवेशकों की चिंता बढ़ा रही है. 10-साल के ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.11% पर पहुंच चुकी है. 30-साल का US बॉन्ड यील्ड 5.7% पर पहुंच चुका है. बॉन्ड यील्ड सरकारी बॉन्ड पर मिलने वाला सालाना रिटर्न है,जिसे बाजार में खरीद-बिक्री और मांग-आपूर्ति से तय होती है.
बाजार गिरने के पीछे ये भी है फैक्टर्स
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया गिरता ही जा रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपये 96 पर पहुंच चुका है.
FII आउटफ्लो भी बाजार में गिरावट के लिए बड़ा रोल निभा रहे हैं. NSE डेटा के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने बाजार से 5,353 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं. जुलाई, अगस्त में FPI फ्लो पॉजिटिव रहने के बाद सितंबर में विदेशी निवेश की निकासी बाजार पर निगेटिव असर डाल रही है. ग्लोबल बाजार की स्थिति और वैश्विक तनाव की वजह से भारतीय बाजार में गिरावट की स्थिति बनी हुई है.