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मिलिए प्रेम वत्स से: घर-घर घूमकर बेचा सामान, देश से ₹64 लेकर गए, अब बनने जा रहे IDBI बैंक के मालिक

IDBI Bank Share Price: देश के बैंकिंग सेक्टर में जल्द ही बड़ा बदलाव होने जा रहा है. जी हां, कैबिनेट की तरफ से आईडीबीआई बैंक की बड़ी हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दे दी गई है. इस हिस्सेदारी की बिक्री के बाद बैंक का कंट्रोल सरकार के पास से फेयरफैक्स ग्रुप के पास आ जाएगा. आइए जानते हैं कौन हैं इस ग्रुप के मालिक प्रेम वत्स?

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Oct 15, 2026, 10:50 AM IST | Updated: Oct 15, 2026, 11:03 AM IST
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Who is Prem Watsa: केंद्र सरकार की तरफ से बुधवार को आईडीबीआई बैंक (IDBI Bank) में 60 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी की बिक्री को मंजूरी दे दी है. सरकार और एलआईसी (LIC) के हिस्सेदारी वाले आईडीबीआई को कनाडाई फाइनेंशियल कंपनी फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) खरीद रहा है. इसे देश के बैंकिंग सेक्टर की सबसे बड़ी डील बताया जा रहा है. डील के तहत बैंक का कंट्रोल फेयरफैक्स ग्रुप को 52,878 करोड़ रुपये में सौंपा जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद हर किसी की जुबान पर भारतीय मूल के अरबपति कारोबारी प्रेम वत्स (Prem Watsa) का नाम है.

फेयरफैक्स ग्रुप के साथ की जा रही डील करीब 5.6 अरब डॉलर की है, जो कि ग्रुप की कुल संपत्ति से भी ज्यादा बताई जा रही है. कनाडा के वॉरेन बफेट कहे जाने वाले वत्स ने अपनी मेहनत के दम पर हजारों करोड़ का कारोबार खड़ा किया है. भारत से कुछ रुपये लेकर गए प्रेम वत्स ने पहले विदेश में शिक्षा ग्रहण की. इस दौरान उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए अलग-अलग काम किये. आइए जानते हैं प्रेम वत्स के बारे में विस्तार से-

आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई

साल 1950 में हैदराबाद के पास जन्म लेने वाले प्रेम वत्स टोरंटो बेस्ड फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स (Fairfax Financial Holdings) के चेयरमैन और सीईओ हैं. हायर एजुकेशन के लिए कनाडा जाने से पहले उन्होंने अपनी पढ़ाई इंडिया में ही की थी. वत्स ने 1971 में आईआईटी मद्रास से केमिकल इंजीनियरिंग में डिग्री ली. इसके बाद वह हायर एजुकेशन के सिलसिले में कनाडा चले गए. वहां उन्होंने वेस्टर्न ओंटारियो यूनिवर्सिटी से एमबीए पूरा किया. वहां अपनी पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए वत्स ने घर-घर जाकर एसी और फर्नेस तक बेचे.

1974 में करियर की शुरुआत

इसके बाद प्रेम वत्स ने 1974 में बतौर इन्वेस्टमेंट एनालिस्ट अपने करियर की शुरुआत की. इस दौरान उन्होंने वैल्यू इन्वेस्टिंग की बारीकियों को करीब से समझा. यहां से काम सीखने के बाद उन्होंने अपने पार्टनर्स के के साथ मिलकर अपनी खुद की इन्वेस्टमेंट फर्म की शुरुआत की. 1985 में उन्होंने निवेशकों का एक ग्रुप तैयार किया और एक छोटी कनाडाई कंपनी का कंट्रोल अपने हाथों में लिया. यही कंपनी आगे चलकर विशाल फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग्स के रूप में उभरी. आज यही कंपनी दुनिया की चुनिंदा कंपनियों में शुमार है.

घर-घर जाकर बेचे होम अप्लायंसेज

कनाडा पहुंचने के बाद प्रेम वत्स का शुरुआती जीवन काफी संघर्ष वाला रहा. जिस समय वह भारत से कनाडा के लिए गए थे, उस समय उनकी जेब में महज 8 डॉलर (64 रुपये) थे. लेकिन वहां पहुंचकर उन्होंने अपनी पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए घर-घर जाकर होम अप्लायंसेज की बिक्री की. वह सुबह में यूनिवर्सिटी में पढ़ाई पूरी करने के बाद अपना खर्च निकालने के लिए काम करते. काम से लौटने के बाद वह देर रात तक पढ़ाई करते थे. उन्होंने चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया और अपना एमबीए पूरा किया.

फेयरफैक्स का भारत से पुराना नाता

भारतीय बाजार के साथ फेयरफैक्स का पुराना नाता रहा है. कंपनी की तरफ से पहले थॉमस कुक इंडिया में बड़ी हिस्सेदारी हासिल की गई थी. शुरुआत में इसकी 77 प्रतिशत हिस्सेदारी लेने के बाद इसे घटाकर 68 फीसदी कर दिया गया. इसके अलावा साल 2015 में फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स की शुरुआत हुई. इस कंपनी का मकसद देश में लॉन्ग टर्म निवेश करना रहा. इसका सबसे ज्यादा निवेश बेंगलुरु के केम्पेगौड़ा इंटरनेशनल एयरपोर्ट में है. कंपनी ने अपनी हिस्सेदारी 64% से बढ़ाकर 74% कर ली है.

भारत आ रहा कनाडाई डेलीगेशन

भारत और कनाडा के बीच कारोबारी संबंधों को मजबूत करने और साल 2030 तक दोनों देशों के व्यापार को दोगुना से भी ज्यादा करने के मकसद से कनाडा 300 कारोबारियों के डेलीगेशन भारत में है. पिछले 30 साल से ज्यादा के दौरान यह भारत के लिए कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार मिशन है. कनाडा के इंटरनेशनल ट्रेड मिनिस्टर मनिंदर सिद्धू के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल 17 अक्टूबर तक मुंबई और बेंगलुरु का दौरा करेगा. डेलीगेशन का मकसद दोनों देशों के बीच ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और इंडस्ट्रीज के लिए मौके तलाशना है.

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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