TVS family dispute: पिता-बेटे ने खटखटाया कोर्ट का दरवाजा, मां-बेटी ने सुलह के लिए बढ़ाया हाथ, जानें क्या है मामला?
मद्रास हाई कोर्ट में वेणु श्रीनिवासन और सुदर्शन की ओर कैविएट दाखिल किए जाने के बाद अब मल्लिका और लक्ष्मी ने पूरे मामले के समाधान की इच्छा जताई है.
TVS Family Dispute : TVS परिवार के उत्तराधिकार विवाद में दोनों पक्षों ने कई अदालतों में 'केविएट' (caveat) दाखिल की हैं. इनका मकसद ये सुनिश्चित करना है कि उनकी दलीलें सुने बिना कोई आदेश पारित न हो जाए, क्योंकि मालिकाना हक और पारिवारिक समझौतों की व्याख्या को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. वेणु श्रीनिवासन, उनके बेटे सुदर्शन वेणु और TVS ग्रुप की कुछ कंपनियों ने मल्लिका श्रीनिवासन, लक्ष्मी वेणु और उनसे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ केविएट दाखिल की हैं. इस मामले की जानकारी रखने वाले कई लोगों के मुताबिक, मल्लिका-लक्ष्मी गुट ने भी वेणु श्रीनिवासन और TVS ग्रुप की प्रमुख कंपनियों के खिलाफ केविएट दाखिल की हैं.
क्या है पूरा मामला?
ये फाइलिंग लगभग 10 दिन पहले की गई हैं और इनमें मद्रास हाई कोर्ट, सिटी सिविल कोर्ट और नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) शामिल हैं. अलग-अलग अदालतों में मामला ले जाने से पता चलता है कि इस विवाद के कानूनी पहलू कितने व्यापक हो सकते हैं. सूत्र ने बताया कि 1 करोड़ रुपये से कम वैल्यू वाले मुकदमे, (जिनमें स्टे ऑर्डर की मांग शामिल है) सिटी सिविल कोर्ट में जा सकते हैं. वहीं, उत्पीड़न, मिसमैनेजमेंट और कॉर्पोरेट गवर्नेंस से जुड़े मुद्दों को NCLT में ले जाया जा सकता है.
बातचीत के जरिए समझौता करने की इच्छा
इन दोनों तरफ से की गई फाइलिंग से संकेत मिलता है कि दोनों पक्ष संभावित कानूनी कार्यवाही के लिए तैयारी कर रहे हैं, जबकि मल्लिका और लक्ष्मी ने बातचीत के जरिए समझौता करने की अपनी इच्छा फिर से दोहराई है. मां-बेटी की जोड़ी पारदर्शी चर्चा और बातचीत के जरिए एक सौहार्दपूर्ण समाधान चाहती हैं.
विवाद की मुख्य जड़ ये है कि 2020 और 2024 में हुए पारिवारिक समझौतों में TVS व्यवसायों के मालिकाना हक का बंटवारा तय हुआ था या फिर ये समझौते मुख्य रूप से उनके एडमिनिस्ट्रेशन से जुड़े थे.
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वेणु और सुदर्शन के गुट का मानना है कि इन समझौतों के जरिए मालिकाना हक का सवाल पहले ही सुलझाया जा चुका है. उनके अनुसार, TVS होल्डिंग्स और कारोबार के अन्य बड़े हिस्से सुदर्शन को दिए गए थे, जबकि सुंदरम-क्लेटन' और छोटे व्यवसाय लक्ष्मी को सौंपे गए थे.
TVS होल्डिंग्स के पास TVS मोटर की 50.26% हिस्सेदारी है. इससे वह इस मोटरसाइकिल निर्माता कंपनी की मुख्य शेयरधारक (कंट्रोलिंग शेयरहोल्डर) बन जाती है. इन हिस्सों के मालिकाना हक या उनके ट्रांसफर को लेकर कोई भी विवाद, समूह की उत्तराधिकार योजनाओं और इसके विभिन्न व्यवसायों के नियंत्रण के बंटवारे पर असर डाल सकता है.
मां-बेटी की क्या है मांग?
लक्ष्मी का पक्ष इस व्याख्या से सहमत नहीं है. लक्ष्मी श्रीनिवासन का कहना है कि ये समझौते बिजनेस के प्रबंधन से जुड़े हैं, न कि मालिकाना हक के ट्रांसफर से. उनका पक्ष मालिकाना हक के 'फेयर-वैल्यू' (उचित मूल्य) पर आधारित ट्रांसफर की मांग कर रहा है. इससे ये साफ होता है कि परिवार के व्यावसायिक हितों को किस तरह बांटा जाए, इस पर दोनों पक्षों के बीच असहमति है.
'केविएट' का मकसद ये सुनिश्चित करना है कि संबंधित कानूनी कार्यवाही में कोई भी आदेश पारित करने से पहले, अदालत या ट्रिब्यूनल केविएट दाखिल करने वाले पक्ष को अपनी बात रखने का मौका दे.