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Dollar Swap Scheme: RBI का मास्टरस्ट्रोक! विदेश से डॉलर का सैलाब, रिकॉर्ड लेवल पर फॉरेक्स रिजर्व; देश को कैसे होगा फायदा?

What is Dollar Swap Scheme: इस बार आरबीआई की डॉलर स्वैप स्कीम ने ऐसा धमाल मचाया कि इसे तय समय से करीब एक महीने पहले ही बंद करना पड़ा. इसका असर यह हुआ कि देश का फॉरेक्स रिजर्व 729 बिलियन डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया.

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Sep 03, 2026, 12:18 PM IST | Updated: Sep 03, 2026, 12:31 PM IST
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RBI Forex Reserve: विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवारों (NRI) ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया है कि उन्हें देश की इकोनॉमी और बैंकिंग सिस्टम पर कितना भरोसा है. रिजर्व बैंक (RBI) की तरफ से शुरू की गई स्पेशल डॉलर स्वैप स्कीम ने सफलता के पुराने रिकॉर्ड को तोड़ दिया है. रिजर्व बैंक (RBI) के हालिया आंकड़ों के अनुसार 31 अगस्त तक इस स्कीम के जरिये देश में 136 अरब डॉलर (करीब 11.3 लाख करोड़) का भारी फॉरेन करेंसी इनफ्लो (Foreign Currency Inflow) हुआ. इसमें 127 अरब डॉलर (करीब 93%) का सबसे बड़ा हिस्सा एनआरआई (NRI) के FCNR(B) डिपॉजिट से आया है.

रिजर्व बैंक ने विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने और इकोनॉमी को मजबूत करने के मकसद से 8 जून को डॉलर स्वैप स्कीम को पेश किया था. शुरुआत में योजना की रफ्तार सामान्य रही, लेकिन अगस्त के आखिरी दिनों में इसमें जबरदस्त तेजी देखने को मिली. आंकड़ों पर नजर डालें तो 21 अगस्त तक देश में 73 अरब डॉलर इस स्कीम के जरिये आए. इससे साफ है योजना के आखिरी 10 दिन में ही 63 अरब डॉलर से भारत में आया है. डॉलर की आवक में तेजी और टारगेट के समय से पहले पूरा होने के कारण आरबीआई (RBI) ने FCNR(B) डिपॉजिट विंडो को 31 अगस्त को बंद करना पड़ा.

30 सितंबर से पहले ही बंद की गई स्कीम

डॉलर स्वैप स्कीम के तहत पहले इसे 30 सितंबर तक ओपन रखने का प्लान किया गया था. रिजर्व बैंक के हालिया कदम से साफ है कि योजना ने उम्मीद से बढ़कर रिजल्ट दिया, जिसके बाद इसे समय से पहले बंद कर दिया गया. हालांकि, भारतीय कंपनियों के लिए ओवरसीज बरोइंग्स और एक्सटर्नल कमर्शियल बरोइंग्स (ECB) के रास्ते अभी 31 दिसंबर तक खुले रहेंगे. आरबीआई (RBI) ने साल 2013 में इसी तरह की स्वैप स्कीम चलाई थी. उस समय तीन महीने के दौरान 26 अरब डॉलर जुटाए गए थे. लेकिन इस बार स्कीम के तहत 2013 के मुकाबले पांच गुना से ज्यादा रकम जुटाकर नया इतिहास रच दिया है.

इंडियन इकोनॉमी को क्या फायदा होगा?

फाइनेंस मिनिस्ट्री के अनुसार फॉरेन करेंसी इनफ्लो से देश का बाहरी बफर मजबूत होगा. जब भी ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता आती है, क्रूड की कीमत अचानक बढ़ती है या विदेशी निवेशक पैसा निकालते हैं तो विदेशी मुद्रा भंडार देश की इकोनॉमी को सुरक्षा मुहैया कराता है. इससे भारतीय रुपये के एक्सचेंज रेट को ग्लोबल मार्केट में मजबूती मिलती है. आरबीआई की तरफ से शुरू की गई NRI डिपॉजिट स्कीम का चरण अब पूरा हो चुका है. लेकिन दो अन्य माध्यमों से पैसा आने का सिलसिला जारी है. जानकारों का मानना है कि 31 दिसंबर तक इस योजना का अंतिम आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है.

रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचा फॉरेक्स रिजर्व

आरबीआई (RBI) की स्पेशल डॉलर स्वैप फैसिलिटी के दम पर फॉरेक्स रिजर्व 21 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में बढ़कर 729.33 बिलियन डॉलर पर पहुंच गया. पिछले 8 हफ्ते से जारी तेजी के दौरान भारतीय खजाने में करीब 63 बिलियन डॉलर का इजाफा हुआ है. इस तेजी के दम पर फरवरी का पुराना रिकॉर्ड भी पीछे छूट गया है. IDFC फर्स्ट बैंक की चीफ इकोनॉमिस्ट गौरा सेन गुप्ता का कहना है कि यह उछाल RBI की तरफ से डॉलर की खरीदारी और रीवैल्यूएशन गेन का नतीजा है. फॉरेक्स रिजर्व के रिकॉर्ड लेवल पर पहुंचने से भारतीय रुपये को स्थिरता मिलेगी और ग्लोबल उतार-चढ़ाव से देश की सुरक्षा होगी.

क्या है डॉलर स्वैप स्कीम

आरबीआई (RBI) की स्पेशल डॉलर स्वैप स्कीम के तहत बैंक विदेशों से डॉलर (विदेशी मुद्रा) जुटाते हैं और उसे आरबीआई (RBI) के साथ स्वैप करते हैं.     इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलती है. यही फॉरेक्स रिजर्व संकट के समय देश का सबसे बड़ा सहारा होता है.

फॉरेक्स रिजर्व के अहम एसेट्स

फॉरेक्स रिजर्व जुटाने में टॉप पर रहे ये बैंक

(22 अगस्त 2026 के आंकड़ों के अनुसार)

फॉरेक्स रिजर्व के मोर्चे पर हुआ फायदा

बैंकों ने डॉलर स्वैप स्कीम के तहत 136 अरब डॉलर का भारी भरकम फंड जुटाया है. विदेशी मुद्रा भंडार (डॉलर) बढ़ने से देश का फॉरेक्स रिजर्व बढ़ता है. योजना की शर्तों के अनुसार बैंक जो भी विदेशी मुद्रा जुटा रहे हैं, वे उसे साथ के साथ आरबीआई (RBI) से स्वैप (Swap) कर रहे हैं. इससे यह साफ है कि ये रिजर्व बैंक के पास डॉलर जमा होने का फायदा आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) को मिल रहा है. लगातार इनफ्लो के कारण फॉरेक्स रिजर्व बढ़कर 729 बिलियन डॉलर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया है.

फॉरेक्स रिजर्व बढ़ने के फायदे

 

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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