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Gold Import in India: इस साल मई की ही बात है जब प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से सोना कम खरीदने की अपील की थी. उनकी यह अपील एक बार फिर से चर्चा में है. सरकार की मंशा सोने का आयात कम करके डॉलर के मुकाबले रुपये को मजबूत करने की है. सरकार चाहती है कि सोने के आयात पर होने वाला खर्च कम हो और भारतीय परिवारों के पास जमा सोने को देश की इकोनॉमी में इस्तेमाल किया जा सके. लेकिन सवाल यह है कि क्या पीएम मोदी की अपील के बाद सोने के आयात में कमी आई है? पीएम मोदी की तरफ से बार-बार की जा रही अपील और सरकार की तरफ से उठाए जा रहे कदमों के बाद बाजार की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है.
प्रधानमंत्री की अपील और मई में कस्टम ड्यूटी बढ़ाकर 15 प्रतिशत किये जाने के बाद देश में सोने का आयात गिरा है. वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) के पार्टनर मेटल्स फोकस के आंकड़ों के अनुसार मई के बाद देश में सोने का आयात लगातार नीचे आ रहा है. मई में आयात पिछले साल के मुकाबले 4 फीसदी घटकर 29.4 टन रह गया. इसके बाद जून में इसमें 20 फीसदी की गिरावट आई और जुलाई में यह 23.7 फीसदी घट गया. ऑल इंडिया जेम एंड ज्वैलरी डोमेस्टिक काउंसिल की तरफ से अनुमान जताया गया है कि अगस्त के महीने में यह गिरावट 30 फीसदी तक पहुंच सकती है.
सोने के आयात में गिरावट के पीछे आपको भले ही यह लगे कि गोल्ड इम्पोर्ट में कमी पीएम मोदी की अपील के बाद आई है. लेकिन इस गिरावट के पीछे उनकी ही अपील अकेला कारण नहीं है. मई में सरकार ने सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी में 9 फीसदी का इजाफा करके इसे 6 फीसदी से बढ़ाकर सीधा 15 फीसदी कर दिया था. टैक्स में बढ़ोतरी से सोने का आयात महंगा हो गया. इंटरनेशनल मार्केट में भी सोने की ऊंची कीमत ने खरीदारों के उत्साह को कम कर दिया.
भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता देश है. हर साल करीब 700 से 900 टन सोने का आयात भारत की तरफ से किया जाता है. एक अनुमान के अनुसार भारतीय परिवारों के पास करीब 31,000 टन सोना तिजोरियों में पड़ा है. सरकार का मकसद आयात बिल को कम करना और करंट अकाउंट डेफिसिट को कंट्रोल करना है. इसके साथ ही सरकार की कोशिश है कि घरों में रखा सोना देश की इकोनॉमी के काम आ सके.
यहां गौर देने वाली बात यह है कि मई में गिरावट आने से पहले साल की शुरुआत में सोने का आयात काफी तेजी से हुआ था. जनवरी 2026 में आयात 171.6 फीसदी बढ़कर 99.4 टन और फरवरी में 114.3 फीसदी बढ़कर 66 टन पर पहुंच गया था. मार्च के महीने में इसमें कुछ गिरावट देखी गई थी लेकिन अप्रैल में यह फिर से 30.7 फीसदी बढ़ गया था. इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि पीएम मोदी की हालिया अपील के बाद सितंबर में भी सोने के आयात में करीब 15 फीसदी की गिरावट आ सकती है. सरकार सितंबर के आंकड़ों पर नजर रख रही है.
भारत में सोने का आयात देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (Current Account Deficit) बढ़ाने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारण है. देश में जब भी सोने का आयात बढ़ता है, भारत को इसके भुगतान के लिए बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर देने पड़ते हैं. इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव बनता है और डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है. सोने का आयात घटने से सीधे देश का व्यापार घाटा कंट्रोल में रहेगा और रुपये की एक्सचेंज रेट को मजबूती मिलेगी.
15 प्रतिशत की कस्टम ड्यूटी के कारण भारतीय बाजार में पुराने गोल्ड को रीसाइकिल (Old Gold Exchange) कराने का चलन बढ़ा है. लोग नया सोना खरीदने के बजाय तिजोरी में रखे पुराने गहनों को रीसाइकिल करवाकर ज्वैलरी बनवा रहे हैं. हालांकि, इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि इम्पोर्ट फीस बढ़ने से गलत तरीके से सोने की तस्करी का रिस्क बढ़ जाता है. जानकारों का कहना है कि अपने कुल इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो का 5 से 10 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखना चाहिए. ज्वैलरी खरीदने पर 10% से 25% तक मेकिंग चार्ज और 3% GST का नुकसान होता है. इसलिए डिजिटल गोल्ड, गोल्ड ETF या बॉन्ड किफायती और अच्छा विकल्प माने जाते हैं.