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एक और बैंक का होगा मर्जर, 5600 करोड़ की पूंजी और 45 लाख कस्टमर बेस वाला बैंक के बिकने की नौबत क्यों आई?

Federal Bank and Jana SFB Merger: फेडरल बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच शेयर स्वैप डील के जरिये अधिग्रहण की बातचीत अंतिम चरण में है. इस मर्जर के बाद कैसे जना बैंक का वजूद खत्म हो जाएगा और बैंक कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा?

Written By Kriyanshu Saraswat
Published: Sep 26, 2026, 10:49 AM IST | Updated: Sep 26, 2026, 10:53 AM IST
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Jana SFB Merger: देश के बैंकिंग सेक्टर में एक और बड़े मर्जर की तैयारी चल रही है. बताया जा रहा है कि प्राइवेट सेक्टर के दिग्गज फेडरल बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच अधिग्रहण को लेकर चल रही बातचीत अंतिम दौर में पहुंच गई है. यह पूरी डील शेयर स्वैप (Share Swap) के जरिये होने की संभावना है. यह डील मैच्योर हुई तो जना स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank) का अलग बैंक के रूप में अस्तित्व खत्म हो जाएगा. मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि 82,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाला फेडरल बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के एसेट और देनदारियों का अधिग्रहण करने के लिए बातचीत कर रहा है. इस डील के शेयर स्वैपिंग के जरिये होने की उम्मीद है.

शेयर स्वैपिंग के जरिये साल 2015 में कोटक महिंद्रा बैंक ने आईएनजी वैश्य बैंक का टेकओवर किया था. पिछले दिनों एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने फिनकेयर एसएफबी का मर्जर किया था. फेडरल बैंक और जना स्मॉल फाइनेंस बैंक के बीच स्वैप रेश्यो पर बातचीत चल रही है. जना स्मॉल फाइनेंस बैंक का मौजूदा मार्केट कैप करीब 5,600 करोड़ रुपये है. इसके अलावा बैंक के पास 45 लाख ग्राहकों का कस्टमर बेस है. मनी कंट्रोल में प्रकाशित खबर के अनुसार इस डील के तहत जना एसएफबी के शेयर का मूल्यांकन 620 से 650 रुपये प्रति शेयर के बीच किया जा सकता है. दूसरी तरफ फेडरल बैंक का शेयर प्राइस 350 रुपये प्रति शेयर तय किये जाने की उम्मीद है.

जना बैंक का वजूद होगा खत्म?

बैंकिंग सेक्टर के जानकारों का मानना है कि इस डील को लेकर घोषणा अगले कुछ हफ्तों के अंदर की जा सकती है. डील में शामिल एक अधिकारी ने बताया सभी संपत्तियों और देनदारियों के ट्रांसफर होने के बाद जना स्मॉल फाइनेंस बैंक का एक स्वतंत्र बैंक के रूप में अस्तित्व खत्म हो जाएगा. यह डील जना एसएफबी के प्रमुख निवेशक टीपीजी (TPG) को बाहर निकलने का एक बड़ा और सुरक्षित मौका देगी. टीपीजी (TPG) का इस स्मॉल फाइनेंस बैंक में निवेश का टेन्योर पूरा हो गया है. ऐसे में काफी लंबे समय से बाहर निकलने का रास्ता तलाश रहे थे.

कर्मचारियों के लिए मुसीबत बना मर्जर

इस डील में सबसे बड़ी अड़चन कर्मचारियों के एडजस्टमेंट को लेकर हो सकती है. 30 जून 2026 तक फेडरल बैंक की कुल लोन बुक 2.77 लाख करोड़ रुपये की थी और उसके पास करीब 17,000 कर्मचारी हैं. दूसरी तरफ 37,600 करोड़ के लोन पोर्टफोलियो वाले जना एसएफबी के करीब 26,000 कर्मचारी हैं. जना बैंक के ज्यादातर कर्मचारी फील्ड वर्क में हैं, जो माइक्रोफाइनेंस (MFI) बिजनेस को संभालते हैं. फेडरल बैंक, जना बैंक के इतने बड़े स्टाफ को अपने साथ जोड़ने के अलग-अलग ऑप्शन पर विचार कर रहा है. यदि एचआर इंटीग्रेशन और परिचालन से जुड़े मामलों का सॉल्यूशन नहीं निकलता तो बातचीत अटक भी सकती है.

फेडरल बैंक और टीपीजी के बीच पिछले कई महीने से बातचीत चल रही थी. जून में जब जना होल्डिंग्स लिमिटेड ने कुछ एनसीडी (NCDs) पर डिफॉल्ट किया तब बातचीत में तेजी आई. शुरुआत में फेडरल बैंक की तरफ से जना होल्डिंग्स में टीपीजी की 17 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का प्रस्ताव रखा गया था, ताकि फेडरल बैंक जना एसएफबी का प्रमोटर बन सके. हालांकि, इससे फेडरल बैंक को कोई खास फायदा नहीं मिल रहा था. इसलिए इस प्रपोजल को खारिज कर दिया गया. बाद में जब जना एसएफबी का फेडरल बैंक में सीधे मर्जर का नया स्ट्रक्चर प्रस्तावित किया गया, तब दोनों पक्षों की बातचीत में फिर से तेजी आई.

जना एसएफबी के मर्जर की नौबत क्यों आई?

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About the Author

क्रियांशु सारस्वत वरिष्ठ बिजनेस जर्नलिस्ट (Business Journalist) हैं, उन्हें डिजिटल और प्रिंट मीडिया में 17 साल का अनुभव है. मौजूदा समय में वह Zee News (Hindi) की डिजिटल टीम में बतौर 'असिस्टेंट न्यूज एडिटर' कार्यरत हैं. क्रियांशु को बिजनेस, पर्सनल फाइनेंस, टैक्सेशन, कमोडिटी और सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी खबरों को आसान भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में महारथ हासिल है. Zee News से पहले क्रियांशु ने टाइम्स इंटरनेट, हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और अमर उजाला की वेबसाइट में अहम संपादकीय जिम्मेदारियां निभाई हैं. इस दौरान क्रियांशु ने ऑटो, टेक्नोलॉजी और लाइफस्‍टाइल लीड की जिम्मेदारी संभाली है. अभी क्रियांशु बिजनेस लीड हैं. यूपी से ताल्‍लुक रखने वाले क्र‍ियांशु पत्रकार‍िता में पोस्ट ग्रेजुएट हैं.
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