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ट्रेन में नहीं दिखेगा कचरे का अंबार! क्या है रेलवे का 367 लीटर का नया डिस्पोजल सिस्टम; जानिए कैसे करेगा काम?

भारतीय रेलवे ने LHB कोचों के लिए नया हाई-कैपेसिटी गार्बेज डिस्पोजल सिस्टम विकसित किया है. ये 18 लीटर की मौजूदा क्षमता के मुकाबले 367.4 लीटर तक कचरा जमा कर सकेगा और ट्रेनों में सफाई व कचरा प्रबंधन को आसान बनाएगा.

Written By Gaurav Singh
Published: Sep 04, 2026, 04:58 PM IST | Updated: Sep 04, 2026, 05:05 PM IST
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Indian Railways : लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरे से होने वाली परेशानी को कम करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक नया हाई-कैपेसिटी गार्बेज डिस्पोजल सिस्टम विकसित किया है. ये सिस्टम खास तौर पर एलएचबी (LHB) कोच में कचरा प्रबंधन को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैयार किया गया है. इससे ट्रेनों में डस्टबिन के ओवरफ्लो होने, कोच में कचरा फैलने और सफाई कर्मचारियों को बार-बार कचरा हटाने की जरूरत को कम किया जा सकेगा.

ये नया सिस्टम झांसी स्थित वैगन रिपेयर वर्कशॉप ने विकसित किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें करीब 367.4 लीटर तक कचरा जमा किया जा सकता है, जबकि मौजूदा व्यवस्था में कचरा रखने की क्षमता लगभग 18 लीटर है यानी नई व्यवस्था मौजूदा क्षमता से 20 गुना से भी ज्यादा कचरा स्टोर कर सकती है.

कैसे काम करेगा रेलवे का नया गार्बेज डिस्पोजल सिस्टम?

नए सिस्टम में मुख्य रूप से गार्बेज ड्रॉप बॉक्स, कनेक्टर और अंडरगियर कलेक्टर शामिल हैं. यात्री कोच के अंदर लगे ड्रॉप बॉक्स में कचरा डाल सकेंगे. इसके बाद कचरा कनेक्टर के जरिए कोच के नीचे लगाए गए बड़े अंडरगियर कलेक्टर में पहुंच जाएगा. इससे कोच के अंदर मौजूद छोटे डस्टबिन को बार-बार खाली करने की जरूरत कम होगी. खास तौर पर लंबी दूरी की यात्राओं में यह व्यवस्था कचरा जमा करने की क्षमता बढ़ाएगी और कोच में कचरा फैलने की समस्या को कम करने में मदद कर सकती है.

18 लीटर से बढ़कर 367.4 लीटर हुई क्षमता

रेलवे की नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत इसकी क्षमता है. मौजूदा व्यवस्था में करीब 18 लीटर कचरा जमा हो सकता है, जबकि नया अंडरगियर कलेक्टर 367.4 लीटर तक कचरा स्टोर कर सकेगा. इतनी अधिक क्षमता होने से लंबी दूरी की यात्रा के दौरान कचरे को बार-बार मैनुअली हटाने की जरूरत कम होगी. कलेक्टर को ट्रेन के सफर के बाद मेंटेनेंस के दौरान खाली किया जा सकेगा.

स्टेनलेस स्टील से बनाया गया कलेक्टर

नए डिस्पोजल सिस्टम को स्टेनलेस स्टील से तैयार किया गया है. इससे इसके टिकाऊपन, जंग से बचाव और लंबे समय तक इस्तेमाल की संभावना बढ़ती है. अंडरगियर कलेक्टर में विशेष 3:10 टेपर डिजाइन दिया गया है, जिससे इसे खाली करने और मेंटेनेंस के लिए जल्दी हटाया जा सके. ड्रॉप बॉक्स और कलेक्टर को दोनों तरफ से अलग-अलग साफ भी किया जा सकता है. इससे स्वच्छता बनाए रखने और दुर्गंध को नियंत्रित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

सफाई कर्मचारियों की मेहनत भी होगी कम

लंबी दूरी की ट्रेनों में मौजूदा छोटे डस्टबिन जल्दी भर जाते हैं. ऐसे में उन्हें यात्रा के दौरान कई बार खाली करना पड़ता है. नई व्यवस्था में बड़ी मात्रा में कचरा एक ही कलेक्टर में जमा हो सकेगा. इससे बार-बार होने वाली मैनुअल गार्बेज हैंडलिंग कम हो सकती है. साथ ही, कोच के अंदर कचरा जमा रहने या कचरा रेलवे ट्रैक पर फेंके जाने की संभावना भी कम करने में मदद मिल सकती है.

सफर के बाद खाली किया जाएगा कचरा

नए सिस्टम की खास बात यह है कि कलेक्टर को ट्रेन के संचालन के दौरान बार-बार खाली करने की जरूरत नहीं होगी. यात्रा पूरी होने के बाद ट्रेन के मेंटेनेंस के दौरान अंडरगियर कलेक्टर को खाली किया जा सकेगा. रेलवे के मुताबिक, इस सिस्टम को कोच के नीचे उपलब्ध जगह का इस्तेमाल करते हुए डिजाइन किया गया है और इसके लिए मौजूदा अंडरगियर या संरचनात्मक हिस्सों में किसी तरह की बाधा नहीं आने दी गई है.

अभी प्रोटोटाइप चरण में है सिस्टम

फिलहाल यह नया गार्बेज डिस्पोजल सिस्टम प्रोटोटाइप स्टेज में है. इसे निरीक्षण और मंजूरी के लिए रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) को भेजा गया है. नॉर्थ सेंट्रल रेलवे के सीपीआरओ शिवम शर्मा के मुताबिक, RDSO के निरीक्षण के दौरान यदि किसी तरह के बदलाव का सुझाव दिया जाता है तो उन्हें शामिल करने के बाद आगे इसे लागू किया जाएगा.

एक बिन की अनुमानित लागत 12 हजार रुपये

रिपोर्ट के अनुसार, नए डिस्पोजल बिन की अनुमानित असेंबली लागत करीब 12,000 रुपये प्रति यूनिट है. प्रत्येक एलएचबी कोच में ऐसे दो बिन लगाए जाने की योजना है. इन्हें कोच के दोनों निकास द्वारों के पास लगाया जाएगा. अगर RDSO से मंजूरी मिलती है और सिस्टम को आगे लागू किया जाता है, तो इससे लंबी दूरी की ट्रेनों में कचरा प्रबंधन और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है.

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About the Author

जी न्यूज में सीनियर सब-एडिटर हैं और वर्तमान में बिजनेस व फाइनेंशियल न्यूज कवर करते हैं.  देश की राजनीति से लेकर दुनिया के बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों और घटनाओं को कवर कर चुके हैं  पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो UPTU से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया है. उत्तर प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले गौरव ने अपने करियर की शुरुआत डिजिटल मीडिया से की और पिछले 6 वर्षों से लगातार इस क्षेत्र में सक्रिय हैं. आप गौरव सिंह से Gaurav.Singh@India.Com पर ईमेल के जरिए सीधे जुड़ सकते हैं. 
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