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Cheaper Crude Oil: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीने से चल रहे संघर्ष के चलते मिडिल ईस्ट में तनाव बना हुआ है. लेकिन भारत सरकार की तरफ से तेल के दाम को कंट्रोल में रखने के लिए बड़ा मास्टरस्ट्रोक खेला गया है. मार्च से करीब ठप पड़े सबसे अहम समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (strait of hormuz) से क्रूड ऑयल लाने के लिए भारतीय तेल रिफाइनरियों ने अपनी स्ट्रैटजी को पूरी तरह बदल दिया है. नई पॉलिसी के तहत भारतीय कंपनियां सीधे जहाजों को किराये पर लेकर फारस की खाड़ी के अंदर से सस्ता क्रूड ऑयल देश में जाने की तैयारी में जुट गई हैं.
मार्च 2026 से जंग शुरू होने के बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जहाजों की आवाजाही के लिए बेहद संवेदनशील बना हुआ है. इसके बावजूद देश की प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियां इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और एचपीसीएल जैसी दिग्गज भारतीय कंपनियों ने इस रास्ते से सीधा क्रूड ऑयल उठाने का फैसला लिया है.
जब दोनों देशों के बीच जंग की शुरुआत हुई थी तो भारतीय रिफाइनरियों ने किसी भी हादसे या हमले के डर से खुद के या किराये के जहाजों को सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पार भेजने से परहेज किया था. उस समय रिफाइनरियां खाड़ी देशों के तेल प्रोडक्शन और इंटरनेशनल ट्रेडिंग कंपनियों पर निर्भर थीं. वे कंपनियां अपने रिस्क पर तेल भारत पहुंचाती थीं. इसके लिए भारतीय रिफाइनरियों को 'कॉस्ट एंड फ्रेट' (C&F) शर्तों के तहत भारी प्रीमियम और एक्स्ट्रा किराया चुकाना पड़ता था.
हालांकि, पिछले कुछ हफ्तों से भारतीय कंपनियों ने इस महंगी व्यवस्था को खत्म कर दिया है. अब भारतीय रिफाइनरियों ने 'फ्री ऑन बोर्ड' (FOB) के बेस पर इराकी क्रूड ऑयल खरीदना शुरू किया है. FOB सौदे के तहत तेल का ट्रांसपोर्टेशन और जहाज तय करने की जिम्मेदारी भारतीय कंपनियों की ही होती है. इससे कंपनियों को भाड़े पर अच्छी खासी बचत होती है और एक्स्ट्रा प्रीमियम से राहत मिलती है.
FOB डील को अंजाम देने के लिए भारतीय रिफाइनरियों ने दुनिया की दिग्गज जहाजरानी कंपनियों के साथ टेंडर प्रोसेस शुरू कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट में बताया गया कि सिनोकोर ग्रुप (Sinokor Group) और डैनाकॉम टैंकर्स मैनेजमेंट ने टैंकर उपलब्ध कराने के कुछ टेंडर अपने फेवर में करने में कामयाबी हासिल की है. शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SCI) और लीला ग्लोबल भी बिड में शामिल हुई थीं.
भारतीय जहाजों के इस एरिया में एंट्री का कारण भारत सरकार की तरफ से पॉलिसी में किया गया बदलाव भी है. अगस्त 2026 में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने अपनी एडवाइजरी में ढील दी. पहले भारतीय नाविकों के होर्मुज में जाने पर रोक थी. लेकिन नई गाइडलाइन के तहत लिखित सहमति के आधार पर इसमें छूट दी गई. इस पॉलिसी के पीछे सबसे बड़ा कारण इराक से तेल पर मिलने वाला भारी डिस्काउंट है. इराक की सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनी SOMO ने अक्टूबर सप्लाई के लिए रीजनल बेंचमार्क के मुकाबले प्रति बैरल 37 डॉलर तक की बड़ी छूट दी है.
37 डॉलर तक की भारी छूट के साथ भाड़े की जिम्मेदारी खुद पर लेने से भारतीय कंपनियों को भारी फायदा हो रहा है. दूसरी तरफ अमेरिका के दबाव के कारण भारत रूस से क्रूड ऑयल खरीदने में झिझक रहा है. ऐसे में मिडिल ईस्ट से तेल सप्लाई लेना ज्यादा जरूरी हो गया है. जेपी मॉर्गन की एक रिपोर्ट के अनुसार मिडिल ईस्ट से क्रूड ऑयल की सप्लाई जंग से पहले के लेवल के 98 प्रतिशत तक बहाल हो गई है.
केपलर (Kpler) के अनुसार सितंबर में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत आने वाला क्रूड ऑयल औसतन 13 लाख बैरल प्रतिदिन रहा. यह फरवरी के बाद का सबसे ज्यादा लेवल है. मौजूदा समय में भारत मिडिल ईस्ट से कुल 28 लाख बैरल तेल रोजाना क्रूड ऑयल का आयात कर रहा है. भारतीय कंपनियों की तरफ से इस स्ट्रैटजी से किये जा रहे काम से देश में तेल की कीमत को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी.